सुबह का तापमान 35 से 40 डिग्री, कैसे जाएं बच्चे स्कूल
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लगातार बढ़ती गर्मी के कारण स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं। सुबह-सुबह स्कूल पहुंचने के समय ही यह बच्चे गर्मी के चपेट में आकर पसीने से तर-बतर हो जाते हैं। स्कूलों में चलने वाली कक्षाओं में बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से पंखे के नीचे बच्चे 40 डिग्री के तापमान में झुलसते रहते हैं। छोटे बच्चों के स्कूल में एससी-कूलर की व्यवस्था नहीं होने से शिक्षकों के प्रयास के बाद भी पढ़ाई का माहौल नहीं बन रहा है।
शहर के स्कूलों में दोपहर 12 बजे छुट्टी होने के समय तेज धूप में खड़ीं स्कूल बसे भट्टी बन जाती है। तेज धूप में खड़ी होने के कारण बसों की सीट सहित पूरी बस छूने लायक नहीं होती है। बस के बाहर और अंदर के तापमान में अंतर होने के कारण बच्चों को अंदर घुटन होने लगती है। इसके बाद पूरे घंटे भर शहर-शहर की सड़कों पर बस एक-एक बच्चे को घर छोड़ती है। बसों के अंदर बैठने पर बच्चे उल्टी करने लगते हैं। बाहर और भीतर के तापमान में अंतर होने के कारण बच्चों को आक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है।
स्कूलों में गर्मी से राहत देने के लिए कूलर-एसी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण छोटे बच्चे ही नहीं बड़े बच्चे भी परेशान हैं। दोपहर एक बजे के बाद स्कूल छूटने पर बच्चे लू और तेज गर्मी की चपेट में आ रहे हैं। बड़े बच्चों के अभिभावकों डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी, संजीव पांडेय, ज्योति मिश्रा ने स्कूल प्रबंधन और जिला प्रशासन से गर्मी को देखते हुए समय में बदलाव की मांग की है। उन्होंने छोटे बच्चों के स्कूल अधिकतम 10 बजे बंद करने की मांग की है।