Prayagraj : 90 से अधिक प्रजातियों के देशी और विदेशी पक्षी पहुंचे, प्रदूषण को रोकने में करते हैं मदद
महाकुंभ के दौरान पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। जिससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल रहा है। 90 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के पक्षी पहुंच रहे हैं।
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महाकुंभ के दौरान पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। जिससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल रहा है। 90 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के पक्षी पहुंच रहे हैं। जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बना रहे हैं।
गंगा की रेती पर दुर्लभ प्रजाति के नन्हे इंडियन स्कीमर के वेलकम की तैयारी शुरू हो गई है। मेले की शुरुआत में 150 जोड़े इंडियन स्कीमर के पहुंचे, जो दिसंबर से लेकर मार्च की शुरुआत तक अंडे देते हैं। अब 150 जोड़ों के साथ ही इन दुर्लभ प्रजाति के नन्हे इंडियन स्कीमर को जंगली जानवरों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर वाचर तैनात कर दिए गए हैं। इसी के साथ वाइल्ड लाइफ की टीम भी अलर्ट कर दी गई है। प्रदूषण को रोकने में भी यह काफी कारगर साबित होते हैं।
डीएफओ प्रयागराज अरविंद कुमार यादव ने बताया कि ये पक्षी जंगली जानवरों से अपने अंडे को बचाने के लिए संगम की रेती में छुपा देते हैं। जिन्हें बचाने और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं। दुर्लभ प्रजाति के अंडों और नन्हे पक्षियों को जंगली जानवरों और अन्य खतरों से बचाने के लिए बड़ी संख्या में वाचर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा वाइल्ड लाइफ की टीम को भी लगाया गया है। जो पक्षियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी गणना का भी काम कर रहे हैं। ताकि पक्षियों और उनके अंडों को किसी भी तरह के खतरे से बचाया जा सके।