कुंभ टूटती दुनिया के बीच विचारों, मतों और संस्कृतियों का बेजोड़ संगम- मोरारी बापू
मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने शनिवार को कहा कि, प्रयागराज में सिर्फ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती जैसी पावन नदियों का ही संगम नहीं, यह पूरे विश्व को एक करने और मिलाने की भूमि है। यहां का हर घर तीर्थ है। इस दौर में इतने विघटन, तथाकथित धर्मों, संप्रदायों, मान्यताओं, विचाधाराओं के नाम पर और धर्म, जाति, वर्गों, कट्टर आग्रहों के नाम पर दुनिया टूटती जा रही है। इसके बीच संगम पर भिन्न-भिन्न विचारधाराओं, संस्कृतियों का मेल अनुकरणीय है। इसी के साथ संत मोरारी बापू की निंबार्कनगर पंडाल में मानस संगम पर आधारित सात दिवसीय राम कथा आरंभ हो गई।
मोरारी बापू ने संगम की महिमा की विस्तार से व्याख्या की। बताया कि यह भारत के भूगोल का एक हिस्सा नहीं, वल्कि दुनिया के साथ समन्वय की भूमिका का अहम केंद्र है। संगम तट पर कुंभ से सबको जोडऩे की परंपरा रही है। विश्व को संगम के तट पर एक करने का कुंभ है। यह सिर्फ पवित्र नदियों का संगम नहीं, दुनिया के एकजुट होने का महापर्व है। हर जगह सिद्धांतों में विघटन आ गए हैं। ऐसे समय संगम की उपयोगिता बढ़ गई है। राम चरित मानस के सातों सोपान में प्रगट और अप्रगट संगम है। कहीं विचारों का तो, कहीं मतों का, तो कहीं व्यक्ति-व्यक्ति का संगम है। उन्होंने कहा कि यहां नदियों का ही संगम नहीं है।
इस भूमि ने विश्व को अगाध वैचारिक संगम दिया है। देव और दनुज दोनों इस संगम में एक साथ स्नान करते रहे हैं। दोनों परस्पर विरोधी विचारधारा के होते हुए भी, रहन-सहन, खान-पान में भेद, हिंसा-अहिंसा का भेद, स्वरूप का भेद होते हुए भी एक साथ स्नान करते थे।
मोरारी बापू ने दिव्य कुंभ के लिए सीएम को फोन पर दी बधाई
नर और किन्नर दोनों का संगम की इस भूमि पर एक साथ स्नान करने का तुलसी दास जी ने उल्लेख किया है। तीर्थराज सबको मिलाता है। उन्होंने तीर्थ के लक्षण भी बताए। कहा कि किसी भी तीर्थ के कुछ लक्षण होते हैं। वैसे तो संपूर्ण भारत ही तीर्थ है। लेकिन, जहां जल हो,अक्षयता हो, वहीं तीर्थ है। चाहे सरिता के रूप में हो या सरोवर के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में ज्ञानरूपी अनादि काल से अक्षयवट की जड़ें साक्षात तीर्थ के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि कभी तेजाब जैसा ज्वलनशील पदार्थ इसकी जड़ों में डाल दिया गया था कि यह नष्ट हो जाए, लेकिन अक्षयवट हरा भरा ही रहा। अक्षयवट अनादि काल से तीर्थ के रूप में विराजमान हैं। प्रलयकाल में भी इसका क्षरण नहीं हुआ था। हमारी सनातन परंपरा में जिसके प्रति अटल विश्वास है,वही अक्षयवट है। कोई माई का लाल इसे मिटा नहीं सकता।
मोरारी बापू ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सेफोन पर बातकर कुंभ के दिव्य आयोजनके लिए बधाई दी। व्यास पीठ से इसकी जानकारी उन्होंने दी। बापू ने बताया कि मैंने सीएम योगी को साधुवाद दिया है। ऐसा दिव्य कुंभ पहले नहीं हुआ था। पहली बार संगम तट पर गंगा-यमुना में श्रद्धालुओं-संतों को अविरल-निर्मल प्रवाह मिल रहा है।