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सद्भाव की नजीर ले ‘नगर कीर्तन’ संग आ जुड़ा जुलूस से मुहम्मदी
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Mohammadi is associated with the procession associated with 'Nagar Kirtan'
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। संगमनगरी में ‘सद्भाव के संगम’ का एक और रूप रविवार को भी दिखा जब गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में निकली शोभायात्रा ‘नगर कीर्तन’ के साथ रसूल की यौमे पैदाइश के जश्न में निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी भी आ मिला। नखासकोहना क्षेत्र में ‘वाहे गुरु जी का खासला, वाहे गुरु की फतेह’ के जयकारों के साथ निकली शोभायात्रा के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी के नारे भी बुलंद हुए। दोनों ने न सिर्फ एक दूसरे के जुलूसों का सम्मान किया बल्कि जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल एक अकीदतमंद ने नगर कीर्तन में शामिल सेवादार को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।
सद्भावना की मिसाल पेश करके दोनों जुलूस अपने अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए लेकिन इन जुलूसों के संगम में दिखे सद्भाव का जो भी साझी रहा, उसके लिए यह मिसाल नजीर बन गई। राम मंदिर पर फैसले के बाद शहरियों और सभी मजहब के लोगों ने आपसी भाईचारे, एकता और सद्भाव की जो मिसालें पेश कीं, वह गंगा जमुनी तहजीब की जमीन को और पुख्ता कर गई। सद्भाव की इन मिसालों ने मजहब का मतलब बताया। साबित किया कि कोई भी मजहब हो, हमें हमेशा इंसानियत, अमन-चैन, भाईचारा और सद्भाव की सीख देता है।
गुरुद्वारा खुल्दाबाद से पंचप्यारों की अगुवाई में निकली शोभायात्रा घंटाघर, हीवेट रोड,लोकनाथ चौक होकर गुरुद्वारा पहुंचकर पूरी हुई। सेवादारों ने झाडुओं से सड़क बुहारी, पानी का छिड़काव किया और गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां भी बिखेरीं। गुरुनानक देव जी का कीर्तन करते हुए महिलाएं, जत्थेदार, सेवादार सभी चले। गुरु तेग बहादुर खालसा इंटर कॉलेज की छात्राओं ने भी बैंडबाजा और कई कलाओं का प्रदर्शन किया। पूरे रास्ते शहरियों की ओर से कीर्तन में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उन्हें चाय, पानी, नाश्ता कराया।
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श्री गुरु सिंह सभा और खालसा कॉलेज कमेटी की ओर से प्रधान सरदार जोगिंदर सिंह के नेतृत्व में फूलों से सजी गाड़ी पर निकली गुरुग्रंथ साहिब जी की शोभायात्रा का संचालन महामंत्री प्रीतम सिंह ने किया। प्रधान के मुताबिक प्रकाशोत्सव पर बारह नवंबर को गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन के बाद गुरु का अटूट लंगर बरता जाएगा। गुरुद्वारा साहिब को बिजली की झालरों से आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा।
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सद्भावना की मिसाल पेश करके दोनों जुलूस अपने अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए लेकिन इन जुलूसों के संगम में दिखे सद्भाव का जो भी साझी रहा, उसके लिए यह मिसाल नजीर बन गई। राम मंदिर पर फैसले के बाद शहरियों और सभी मजहब के लोगों ने आपसी भाईचारे, एकता और सद्भाव की जो मिसालें पेश कीं, वह गंगा जमुनी तहजीब की जमीन को और पुख्ता कर गई। सद्भाव की इन मिसालों ने मजहब का मतलब बताया। साबित किया कि कोई भी मजहब हो, हमें हमेशा इंसानियत, अमन-चैन, भाईचारा और सद्भाव की सीख देता है।
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गुरुद्वारा खुल्दाबाद से पंचप्यारों की अगुवाई में निकली शोभायात्रा घंटाघर, हीवेट रोड,लोकनाथ चौक होकर गुरुद्वारा पहुंचकर पूरी हुई। सेवादारों ने झाडुओं से सड़क बुहारी, पानी का छिड़काव किया और गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां भी बिखेरीं। गुरुनानक देव जी का कीर्तन करते हुए महिलाएं, जत्थेदार, सेवादार सभी चले। गुरु तेग बहादुर खालसा इंटर कॉलेज की छात्राओं ने भी बैंडबाजा और कई कलाओं का प्रदर्शन किया। पूरे रास्ते शहरियों की ओर से कीर्तन में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उन्हें चाय, पानी, नाश्ता कराया।
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श्री गुरु सिंह सभा और खालसा कॉलेज कमेटी की ओर से प्रधान सरदार जोगिंदर सिंह के नेतृत्व में फूलों से सजी गाड़ी पर निकली गुरुग्रंथ साहिब जी की शोभायात्रा का संचालन महामंत्री प्रीतम सिंह ने किया। प्रधान के मुताबिक प्रकाशोत्सव पर बारह नवंबर को गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन के बाद गुरु का अटूट लंगर बरता जाएगा। गुरुद्वारा साहिब को बिजली की झालरों से आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा।