Prayagraj News: औद्योगिक क्षेत्र परिसर में एमएनएनआईटी बनाएगा रिसर्च पार्क, खड़ा कर सकेंगे खुद का भी उद्योग
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) परिसर स्थित विवादित औद्योगिक क्षेत्र में रिसर्च पार्क विकसित करने की तैयारी है। इस पार्क में उद्योगों को लेकर व्यावहारिक ज्ञान तो दिए ही जाएंगे, छात्र खुद का उद्योग भी खड़ा कर सकेंगे।
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) परिसर स्थित विवादित औद्योगिक क्षेत्र में रिसर्च पार्क विकसित करने की तैयारी है। इस पार्क में उद्योगों को लेकर व्यावहारिक ज्ञान तो दिए ही जाएंगे, छात्र खुद का उद्योग भी खड़ा कर सकेंगे। इसके लिए संस्थान हर स्तर पर मदद करेगा। संस्थान की स्थापना के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था। इसका मकसद उद्यमियों के साथ मिलकर उद्योग लगाना था। ताकि, संस्थान के छात्र-छात्राएं प्रायोगिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकें। इसके लिए उद्यमियों को लीज पर जमीन दी गई थी लेकिन अब ये कारखाने पूरी तरह से निजी रूप में संचालित होने लगे हैं। कई कारखाने बंद भी हो गए हैं।
इन दिनों सरकार का उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर है। इसी के तहत रिसर्च पार्क विकसित करने की योजना शुरू की गई है। इसी क्रम में एमएनएनआईटी प्रशासन की ओर से इस भूखंड पर रिसर्च पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंजूरी भी मिल गई है। संस्थान की ओर से इसका प्रस्ताव संबंधित मंत्रालयों को भी भेजा जा चुका है। इसी मकसद से संस्थान प्रशासन की ओर से कारखाना संचालकों को बेदखली का नोटिस दिया गया है।
पिछले तीन महीने में ही चार बार नोटिस दिया जा चुका है। संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ.रमेश पांडेय का कहना है कि उद्यमियों को कुछ समय के लिए लीज पर जमीन दी गई थी। वह लीज बहुत पहले ही खत्म हो चुकी है। इसके अलावा इस औद्योगिक क्षेत्र का जिस मकसद से विकास किया गया था वह पूरा नहीं हो पा रहा। इसलिए सभी को जगह खाली करने का नोटिस दिया गया है। रजिस्ट्रार ने बताया कि इस भूखंड पर रिसर्च पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जमीन खाली होने के बाद उसका निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
छात्र लगा सकेंगे उद्यम, संस्थान देगा मदद
रिसर्च पार्क का मकसद संस्थान के छात्र-छात्राओं को उद्यमिता का व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ खुद का उद्यम खड़ा करने के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है। छात्र के पास उद्योग लगाने की कोई नई योजना है और वह संस्थान के मानकों की कसौटी पर खरा उतरता है तो इसके लिए हर स्तर पर मदद दी जाएगी। इसके तहत संस्थान की ओर से रिसर्च पार्क में जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसी के साथ आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
अलग-अलग क्षेत्र के उद्यमियों से मिलकर छात्र को अन्य तरह की भी मदद दी जाएगी। हालांकि, यह सुविधा कुछ वर्षों के लिए होगी। उद्योग स्थापित होने के बाद छात्र को दूसरी जगह देखनी होगी। रजिस्ट्रार का कहना है कि इसमें कोई भी नया उद्योग लगा सकेगा लेकिन प्राथमिकता में अपने संस्थान के छात्र होंगे। इसके बाद जगह है तो आसपास के अन्य तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों को रिसर्च पार्क में उद्योग लगाने के लिए जमीन दी जाएगी।
इंडस्ट्रीयल एस्टेड में बनाए गए हैं 68 शेड
एमएनएनआईटी के साथ स्थापित मोनेरिका इंडस्ट्रीयल एस्टेड 17 एकड़ में फैला है। इसमें उद्योगों के लिए 68 शेड बनाए गए हैं। इस पर उद्योग विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से भी 57 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। इसमें भारत सरकार की ओर से भी अपट्रान की स्थापना की गई थी। हालांकि, अब अपट्रान बंद हो गया है। इसके अलावा भी कई अन्य उद्योग बंद हो गए हैं। हालांकि, इस एस्टेड में 50 से अधिक उद्योग अब भी चल रहे हैं।
नोटिस के खिलाफ उद्यमियों ने भी मंत्रालय को लिखा है पत्र
एमएनएनआईटी प्रशासन के नोटिस के विरोध में उद्यमी भी सक्रिय हो गए हैं। उद्योगों को बचाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ एमएसएमई मंत्री से संपर्क करने के साथ मांग पत्र सौंपा है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी उद्यमियों ने संपर्क किया है। विधायक हर्षवर्धन बाजपेई के साथ उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को डीएम से भी मिला था। डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ का कहना है कि विवादित भूखंड को प्रदेश सरकार को सौंपने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।