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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Misdiagnosed and treated for Type 2 diabetes for four years; tests revealed Type 1 diabetes.

Health News : चार साल तक टाइप-2 का गलत इलाज, जांच में निकली टाइप-वन डायबिटीज

Mon, 13 Jul 2026 03:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 13 Jul 2026 03:48 PM IST
सार

कोरांव निवासी 29 वर्षीय महिला का चार साल तक मधुमेह का गलत इलाज होता रहा। इस कारण महिला के हाथ-पैर की नसें खराब हो गईं। इससे उसका चलना-फिरना मुश्किल हो गया। 

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Misdiagnosed and treated for Type 2 diabetes for four years; tests revealed Type 1 diabetes.
डायबिटीज - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

कोरांव निवासी 29 वर्षीय महिला का चार साल तक मधुमेह का गलत इलाज होता रहा। इस कारण महिला के हाथ-पैर की नसें खराब हो गईं। इससे उसका चलना-फिरना मुश्किल हो गया। महिला को करीब चार साल पहले डायबिटीज की शिकायत हुई थी। उसने गांव से लेकर शहर तक कई डॉक्टरों से उपचार कराया। डॉक्टरों ने दवा से महिला का डायबिटीज नियंत्रित करना चाहा, मगर शुगर नियंत्रित होने की बजाए बढ़ता गया।

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मरीज के हाथ-पैर की नसों में सूजन आ गई। इसके बाद परिजन महिला को स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय लेकर पहुंचे। वहां जांच में टाइप-टू की जगह टाइप-वन डायबिटीज की पुष्टि हुई। ऐसे में मरीज को दवाइयों की जगह इंसुलिन की डोज देना शुरू की गई। इसके बाद शुगर नियंत्रित होने लगी। खराब हो चुकी नसों को अब ठीक किया जा रहा है, लेकिन नसों का पूरी तरह से ठीक हो पाना मुश्किल है।

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टाइप-वन और टाइप-टू डायबिटीज में अंतर

टाइप-वन में शरीर बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है। जबकि टाइप-टू में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इसका सही उपयोग नहीं कर पाता है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध कहते हैं।

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टाइप-वन डायबिटीज के लक्षण

टाइप-वन डायबिटीज के लक्षण आमतौर पर बहुत तेजी से कुछ ही दिनों या हफ्तों में विकसित होते हैं। इनमें बार-बार पेशाब आना (विशेषकर रात में), बहुत ज्यादा प्यास व भूख लगना शामिल है। बिना किसी कारण के तेजी से वजन घटना और अत्यधिक थकान व कमजोरी महसूस होना भी इसके लक्षण हैं।


अगर दवा के कुछ दिनों बाद भी मरीज का शुगर लेबल नियंत्रित नहीं हो रहा है, तो बिना जांच के इंसुलिन की डोज शुरू की जा सकती है। क्योंकि देर करने से मरीज को अन्य प्रकार की समस्या हो सकती है। इसके अलावा मरीज का परीक्षण करते समय डॉक्टर को समय देना चाहिए, जिससे रोग के लक्षण को पूरी तरह से पहचाना जा सके। इससे उपचार में लाभ मिलता है। - विभु रंजन खरे, मधुमेह रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।

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