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हाईकोर्ट : नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य, अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज
Sat, 07 Nov 2026 07:42 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 07 Nov 2026 07:42 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य होती है। लिहाजा, सहमति के आधार पर उसे बहला-फुसला कर ले जाना और संबंध बनाने के अपराध से आरोपी बच नहीं सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य होती है। लिहाजा, सहमति के आधार पर उसे बहला-फुसला कर ले जाना और संबंध बनाने के अपराध से आरोपी बच नहीं सकता है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने इटावा निवासी युवक की जमानत अर्जी दोबारा खारिज कर दी। हाईस्कूल अंकपत्र के मुताबिक पीड़िता घटना के वक्त नाबालिग थी। याची की पहली जमानत अर्जी जुलाई 2025 में खारिज हो चुकी है।
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मामला इटावा के बकेवर थाना क्षेत्र का है। पीड़िता के पिता ने बेटी के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। इस पर शुरू हुए ट्रायल के दौरान पिता और पीड़िता के बयान दर्ज हुए। इसके बाद याची ने रिहाई के लिए दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की। दलील दी कि ट्रायल में पीड़िता ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसे पक्षद्रोही घोषित किया जा चुका है।
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पीड़िता अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी। दोनों शादी कर साथ रह रहे थे। मेडिकल और रेडियोलॉजिकल जांच में पीड़िता को बालिग बताया गया है। आरोपी 10 अप्रैल 2025 से जेल में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं, राज्य सरकार और विपक्ष की ओर से जमानत का विरोध कर कहा गया कि हाईस्कूल की के अंकपत्र में पीड़िता की जन्मतिथि चार अगस्त 2008 दर्ज है। इसके अनुसार घटना के समय वह नाबालिग थी। लिहाजा, कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। याची की ट्रायल के शीघ्र निस्तारण की अर्जी दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अवसर दिया गया है।
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