फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Minor rape victim did not get permission for abortion, court - government should bear the cost of delivery

High Court : नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को नहीं मिली गर्भपात की अनुमति, कोर्ट ने कहा- प्रसव का खर्च उठाए सरकार

Thu, 29 Aug 2024 11:49 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 Aug 2024 11:49 AM IST
सार

13 वर्षीय नाबालिग संग उसके एक नजदीकी रिश्तेदार ने दुष्कर्म किया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद किशोरी का मेडिकल कराया गया तो उसके गर्भवती होने का पता चला। किशोरी की ओर से गर्भपात कराने की अनुमति की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

विज्ञापन
Minor rape victim did not get permission for abortion, court - government should bear the cost of delivery
गर्भपात। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि 13 वर्ष की किशोरी गर्भपात कराने या गर्भधारण को जारी रखने के बीच निर्णय ले पाने में सक्षम नहीं है। यह टिप्पणी कर हापुड़ के एक थानाक्षेत्र की किशोरी को 32 सप्ताह के गर्भ का गर्भपात कराने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह बच्चे के जन्म पर होने वाले सभी खर्च स्वयं उठाए।

विज्ञापन

13 वर्षीय नाबालिग संग उसके एक नजदीकी रिश्तेदार ने दुष्कर्म किया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद किशोरी का मेडिकल कराया गया तो उसके गर्भवती होने का पता चला। किशोरी की ओर से गर्भपात कराने की अनुमति की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। न्यायमूर्ति शेखर बी सर्राफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंड पीठ ने इस पर मेडिकल बोर्ड गठित कर यह राय देने के लिए कहा था कि क्या उसका गर्भपात कराया जा सकता है, इससे उसकी जान को कोई खतरा नहीं होगा।

विज्ञापन

इस पर मेडिकल बोर्ड की ओर से दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान स्थिति में गर्भ को जारी रखना ज्यादा सुरक्षित है। क्योंकि, गर्भपात से उसकी जान को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की राय के बाद गर्भपात कराने की इजाजत देने से इन्कार कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चे के जन्म पर होने वाले सभी खर्च वहन करे। पीड़िता के पास कोई पारिवारिक सहारा नहीं है। इसलिए बच्चे के जन्म के बाद उसे किसी को गोद दिया जा सकता है। कोर्ट ने इस संबंध में डायरेक्टर सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी को उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed