{"_id":"57faa2c64f1c1b7c5228e884","slug":"milk-and-milk-jalebi-of-duldul-karmkdm","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूध-जलेबी खिलाकर दुलदुल का खैरमकदम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूध-जलेबी खिलाकर दुलदुल का खैरमकदम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 10 Oct 2016 02:23 AM IST
विज्ञापन
allahabad
इलाहाबाद। सातवीं मुहर्रम रविवार को शहर के अलग-अलग मोहल्लों से मातमी जुलूस निकले। फिज़ा में सदाएं गूंजी। पानदरीबा स्थित इमामबाड़ा सफदर अली बेग से दुलदुल का जुलूस भोर में उठाया गया। संयोजक मोहम्मद अली बेग और मिर्जा इकबाल हुसैन की कयादत में निकला जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ जुलूस इमामबाड़ा वजीर हसन पहुंचकर पूरा हुआ। खास यह रहा कि दशहरा की चौकियों के मद्देनजर दुलदुल के जुलूस के वक्त में बदलाव किया गया था। जुलूस शाम से पहले ही पूरा हो गया।
दुलदुल के घर-घर पहुंचने पर महिलाओं ने दूध-जलेबी खिलाकर उसका खैरमकदम किया। फूलों की चादरें चढ़ाकर मन्नतें, मुरादें मांगी गईं। बेहतर सेहत के लिए बच्चों को गिरवी किया। साथ ही रवायत के मुताबिक बच्चों को दुलदुल के नीचे से भी निकाला गया। इस बीच दायराशाह अजमल स्थित इमामबाड़ा अली नकवी से दिन में दो दर्जन अलम के साथ जुलूस निकलकर दुलदुल जुलूस में शामिल हो गया। अलम के जुलूस डॉ.मुस्तफा के हाते पर जाकर पूरा हुआ।
यहां अलम के जुलूस पूरे हुए जबकि दुलदुल आगे के लिए रवाना हुआ और शाहगंज, पत्थरगली,नखासकोहना, अहमदगंज, बक्शीबाजार, अकबरपुर, पुरानी गुड़िया तालाब, बैदनटोला, रानीमंडी बच्चा जी कोठी होता हुआ चक स्थित इमामबाड़ा वजीर हसन पहुंचा। इस बीच गुडमंडी के इमामबाड़े पर दुलदुल के पहुंचने पर गैरमुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने भी फूलों की चादर चढ़ाकर मन्नत मुरादें मांगी। लंगर भी किया।
विज्ञापन
जंजीरी मातम का नजराना
सात मुहर्रम को रानीमंडी से मातमी अंजुमनों, अंजुमन हैदरिया, अंजुमन मजलूमिया, अंजुमन आबिदिया की ओर से जुलूस निकालकर नौहा और मातम का नजराना पेश किया गया। मातमी जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ चक, जीरोरोड स्थित इमाम बारगाह मीर वजीर अली पर पूरा हुआ। जुलूस में अंजुमन गुंचए कासिमिया के मीडिया प्रभारी सैयद मुहम्मद अस्करी सहित मुंबई से आए अली दानिश रिजवी, ऊंचाहार से मुहम्मद मुस्तफा तबरेज, राधिका आदि ने शामिल होकर अपनी अकीदत का इजहार किया।
विज्ञापन
दुलदुल के घर-घर पहुंचने पर महिलाओं ने दूध-जलेबी खिलाकर उसका खैरमकदम किया। फूलों की चादरें चढ़ाकर मन्नतें, मुरादें मांगी गईं। बेहतर सेहत के लिए बच्चों को गिरवी किया। साथ ही रवायत के मुताबिक बच्चों को दुलदुल के नीचे से भी निकाला गया। इस बीच दायराशाह अजमल स्थित इमामबाड़ा अली नकवी से दिन में दो दर्जन अलम के साथ जुलूस निकलकर दुलदुल जुलूस में शामिल हो गया। अलम के जुलूस डॉ.मुस्तफा के हाते पर जाकर पूरा हुआ।
विज्ञापन
यहां अलम के जुलूस पूरे हुए जबकि दुलदुल आगे के लिए रवाना हुआ और शाहगंज, पत्थरगली,नखासकोहना, अहमदगंज, बक्शीबाजार, अकबरपुर, पुरानी गुड़िया तालाब, बैदनटोला, रानीमंडी बच्चा जी कोठी होता हुआ चक स्थित इमामबाड़ा वजीर हसन पहुंचा। इस बीच गुडमंडी के इमामबाड़े पर दुलदुल के पहुंचने पर गैरमुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने भी फूलों की चादर चढ़ाकर मन्नत मुरादें मांगी। लंगर भी किया।
विज्ञापन
जंजीरी मातम का नजराना
सात मुहर्रम को रानीमंडी से मातमी अंजुमनों, अंजुमन हैदरिया, अंजुमन मजलूमिया, अंजुमन आबिदिया की ओर से जुलूस निकालकर नौहा और मातम का नजराना पेश किया गया। मातमी जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ चक, जीरोरोड स्थित इमाम बारगाह मीर वजीर अली पर पूरा हुआ। जुलूस में अंजुमन गुंचए कासिमिया के मीडिया प्रभारी सैयद मुहम्मद अस्करी सहित मुंबई से आए अली दानिश रिजवी, ऊंचाहार से मुहम्मद मुस्तफा तबरेज, राधिका आदि ने शामिल होकर अपनी अकीदत का इजहार किया।