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High Court : वैवाहिक विवादों में केवल नाम शामिल कर देने से आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकतीu

Sat, 16 May 2026 01:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 16 May 2026 01:52 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल नाम शामिल कर देने मात्र से किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।

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Mere inclusion of names in matrimonial disputes cannot trigger criminal proceedings
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल नाम शामिल कर देने मात्र से किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती। जब तक उसके खिलाफ सक्रिय भूमिका के ठोस और विशिष्ट आरोप न हों। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए पति के रिश्तेदारों को राहत दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने पत्नी की ओर से ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर दिया है।

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मामला हाथरस के शासनी कोतवाली क्षेत्र का है। पीड़िता ने 2020 में पति, सास-ससुर, देवर और ननद के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। हाथरस के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 26 मई 2023 को और अपर सत्र न्यायाधीश ने 29 सितंबर 2025 को पति के रिश्तेदारों को आरोपों से मुक्त कर दिया। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश न्यायसंगत और विधिसम्मत है। अक्सर वैवाहिक विवादों में पूरे परिवार को सामान्य तरीके से फंसाने की प्रवृत्ति देखी जाती है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्मोचन के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला देखा जाना चाहिए, जबकि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों की विस्तृत विवेचना कर गलती की है।
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कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केवल यह परीक्षण किया कि आरोपों के मूल तत्व बनते हैं या नहीं, जो कानून के अनुरूप है। निश्चित आरोपों और सहायक साक्ष्यों के अभाव में रिश्तेदारों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

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