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mental disorder : देश में हर सात व्यक्तियों में एक को मानसिक रोग
Mon, 16 May 2022 12:46 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 16 May 2022 12:46 AM IST
सार
इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (आईपीएस) उत्तर प्रदेश राज्य शाखा की ओर से आयोजित किए गए सेमिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि रहीं।
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Prayagraj News : सिविल लाइंस स्थित होटल में मनोचिकित्सा एसोसिएशन की ओर से आयोजित सेमिनार का उद्घाटन करते अतिथिगण।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में मानसिक विकार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। भारत में प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति मानसिक विकार से पीड़ित है। बाइपोलर डिसऑर्डर एक दीर्घ अवधि का गंभीर मानसिक विकार है। इससे पीड़ित व्यक्ति में अवसाद और उन्माद के लक्षण आते हैं। अवसाद की स्थिति में व्यक्ति में थकान, रुचि का अभाव, नींद की कमी, भूख न लगना, अपने बारे में नकारात्मक विचार, स्वयं को नुकसान पहुंचाने के भाव आने लगते हैं। ये बातें रविवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग में आयोजित सेमिनार में देश भर से जुटे विशेषज्ञों ने कहीं।
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इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (आईपीएस) उत्तर प्रदेश राज्य शाखा की ओर से आयोजित किए गए सेमिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि रहीं। सेमिनार में विभिन्न राज्यों के करीब 100 मनोचिकित्सकों ने प्रतिभाग किया।
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सेमिनार में वक्ताओं ने बताया कि मानसिक विकार किसी भी आयु, लिंग, निवास स्थान और जीवन स्तर को प्रभावित कर सकता है।
मानसिक विकारों की न तो उपयुक्त तरीके से पहचान होती है, न ही ठीक से प्रबंधन होता है। भारत में प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति मानसिक विकार तथा 120 में एक व्यक्ति गंभीर मानसिक विकार से ग्रस्त है। चिकित्सा जगत में इतनी प्रगति होने के बाद भी 70 फीसदी गंभीर मानसिक विकार से पीड़ित लोग उपचार से वंचित रह जाते हैं। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जैसे अज्ञानता, जागरूकता का अभाव, उपचार की अनुपलब्धता, भ्रांतियां, अंधविश्वास और मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक लक्षण।
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Prayagraj News : सिविल लाइंस स्थित होटल में मनोचिकित्सा एसोसिएशन की ओर से आयोजित सेमिनार का मंचासीन अतिथिगण।
- फोटो : अमर उजाला।
चोरी की आदत भी बीमारी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि मनोचिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर सुधार हो रहा है, किंतु अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें अभी भी बहुत कार्य होना बाकी है। क्लिपटोमेनिया का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक बहुत आम बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बरबस ही दूसरों का सामान चुराने की आदत होती है।
यदि इस बीमारी को चिन्हित किया जाए और डॉक्टरों से परामर्श लिया जाए, तो इसका इलाज संभव है। सेमिनार में कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर प्राचार्य एमएलएन डॉ. एसपी सिंह, डॉ. एके टंडन, आयोजक समिति के चेयरमैन डॉ. वीके सिंह, डॉ. अनुराग वर्मा, केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. प्रभात, कोलकाता से डॉ. भाष्कर मुखर्जी, डॉ. चितरंजन समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि मनोचिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर सुधार हो रहा है, किंतु अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें अभी भी बहुत कार्य होना बाकी है। क्लिपटोमेनिया का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक बहुत आम बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बरबस ही दूसरों का सामान चुराने की आदत होती है।
यदि इस बीमारी को चिन्हित किया जाए और डॉक्टरों से परामर्श लिया जाए, तो इसका इलाज संभव है। सेमिनार में कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर प्राचार्य एमएलएन डॉ. एसपी सिंह, डॉ. एके टंडन, आयोजक समिति के चेयरमैन डॉ. वीके सिंह, डॉ. अनुराग वर्मा, केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. प्रभात, कोलकाता से डॉ. भाष्कर मुखर्जी, डॉ. चितरंजन समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।