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एमबीबीएस छात्रों ने बंद कराई ओपीडी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 31 May 2016 02:09 AM IST
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सोमवार को मेडिकल कालेज के छात्रों के हड़ताल पर चले जाने से दूर दराज से आये मरीज बेहाल रहे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में परास्नातक (एमएस/एमडी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूसरी मेरिट जारी कर दी है। इस पर फ्रेश अभ्यर्थियों (एमबीबीएस के बाद सीधे प्रवेश परीक्षा में शामिल) और एमबीबीएस छात्रों ने जमकर आक्रोश जताया है। सोमवार को एमबीबीएस के छात्रों ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) और चिल्ड्रेन अस्पताल की ओपीडी को बंद कराने के साथ आसपास की दवा की दुकानों को भी बंद करा दिया। छात्रों ने इमरजेंसी के सामने प्रदर्शन करते हुए ‘वी वॉन्ट जस्ट्सि’ के नारे लगाए।
एमबीबीएस छात्रों ने सुबह अस्पताल खुलते ही एसआरएन चिकित्सालय में एकजुट हो गए। वहां नारेबाजी करते हुए पहले ओपीडी का पर्चा काउंटर बंद करा दिया। इससे मरीजों का पर्चा नहीं कटा। हजारों की संख्या में मरीज डॉक्टर को दिखाए बिना ही मासूस होकर लौट गए। कोरांव से आने वाले चंद्रनारायण, राधा देवी, सुनीता, राधेश्याम ने बताया कि उन्हें अंदर ही नहीं जाने दिया गया। हालांकि अस्पताल के कन्सलटेंट और सीनियर रेजिडेंट्स हड़ताल पर नहीं थे, लेकिन डेढ़ बजे के बाद कई ओपीडी कमरों में नजर नहीं आए। मरीज उन्हें ढूंढते नजर आए। हालांकि कई मेडिसिन, सर्जरी, आर्थोपेडिक, गॉयनी सहित कई विभागों में कई सीनियर कन्सलटेंट बैठे रहे लेकिन ज्यादातर ओपीडी वार्ड खाली रहे। एसआरएन चिकित्सालय में सामान्य तौर पर रोजाना साढ़े तीन हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं लेकिन एमबीबीएस छात्रों के आंदोलन से पचास फीसदी से कम मरीज ही देखे गए। छात्रों ने बाहर स्थित दवा की दुकानों को भी बंद करा दिया। इससे काफी देर तक मरीजों को काफी देर बाहर दवा भी नहीं मिल पाई।
उधर, चिल्ड्रेन अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में मासूमों को बिना ओपीडी में दिखाए ही लौटना पड़ा। चिल्ड्रेन अस्पताल में रोजाना औसतन तीन सौ से अधिक बीमार बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं लेकिन सोमवार को ओपीडी खुलने के दौरान कुछ मरीजों को देखा गया लेकिन उसके बाद ओपीडी बंद करा दी गई। हालांकि दोनों ही अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा को बहाल रखा गया।
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प्रदर्शन के दौरान एमबीबीएस छात्रों इमरजेंसी के सामने सभा कर कहा कि जब तक उनके साथ न्याय नहीं होता उनका आंदोलन जारी रहा। एमबीबीएस छात्र पीएमएस संवर्ग के छात्रों को तीस फीसदी दिए जाने वाले ग्रेस मार्क को लेकर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि इतना तीस फीसदी तक का ग्रेस मार्क मिलने से यूपीपीजी में वे बहुत ही पीछे हो जाएंगे। उनके चयन में बहुत समस्या खड़ी हो जाएगी।
मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं रहा
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय और चिल्ड्रेन अस्पताल में एमबीबीएस छात्रों की हड़ताल से हजारों की संख्या में मरीजों को हो रही परेशानी को सुनने वाला कोई नहीं रहा। एसआरएन के एसआईसी छुट्टी पर हैं जबकि मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य लखनऊ गए हैं। ऐसे में मरीज भटकते रहे। एसआईसी का कार्यालय खुला था लेकिन कर्मचारियों के अलावा कोई भी अधिकारी नहीं रहा। इसके चलते मरीज और परेशान घूूमते रहे।
दूसरी मेरिट पर हुए 350 प्रवेश
एमबीबीएस छात्रों के विरोध के बीच यूपीपीजी की दूसरी बार जारी हुई मेरिट के आधार पर देर रात तक 350 प्रवेश हो चुके थे। चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक प्रो. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि 150 सौ सीटों पर प्रवेश के लिए प्रक्रिया चल रही है।
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एमबीबीएस छात्रों ने सुबह अस्पताल खुलते ही एसआरएन चिकित्सालय में एकजुट हो गए। वहां नारेबाजी करते हुए पहले ओपीडी का पर्चा काउंटर बंद करा दिया। इससे मरीजों का पर्चा नहीं कटा। हजारों की संख्या में मरीज डॉक्टर को दिखाए बिना ही मासूस होकर लौट गए। कोरांव से आने वाले चंद्रनारायण, राधा देवी, सुनीता, राधेश्याम ने बताया कि उन्हें अंदर ही नहीं जाने दिया गया। हालांकि अस्पताल के कन्सलटेंट और सीनियर रेजिडेंट्स हड़ताल पर नहीं थे, लेकिन डेढ़ बजे के बाद कई ओपीडी कमरों में नजर नहीं आए। मरीज उन्हें ढूंढते नजर आए। हालांकि कई मेडिसिन, सर्जरी, आर्थोपेडिक, गॉयनी सहित कई विभागों में कई सीनियर कन्सलटेंट बैठे रहे लेकिन ज्यादातर ओपीडी वार्ड खाली रहे। एसआरएन चिकित्सालय में सामान्य तौर पर रोजाना साढ़े तीन हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं लेकिन एमबीबीएस छात्रों के आंदोलन से पचास फीसदी से कम मरीज ही देखे गए। छात्रों ने बाहर स्थित दवा की दुकानों को भी बंद करा दिया। इससे काफी देर तक मरीजों को काफी देर बाहर दवा भी नहीं मिल पाई।
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उधर, चिल्ड्रेन अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में मासूमों को बिना ओपीडी में दिखाए ही लौटना पड़ा। चिल्ड्रेन अस्पताल में रोजाना औसतन तीन सौ से अधिक बीमार बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं लेकिन सोमवार को ओपीडी खुलने के दौरान कुछ मरीजों को देखा गया लेकिन उसके बाद ओपीडी बंद करा दी गई। हालांकि दोनों ही अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा को बहाल रखा गया।
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प्रदर्शन के दौरान एमबीबीएस छात्रों इमरजेंसी के सामने सभा कर कहा कि जब तक उनके साथ न्याय नहीं होता उनका आंदोलन जारी रहा। एमबीबीएस छात्र पीएमएस संवर्ग के छात्रों को तीस फीसदी दिए जाने वाले ग्रेस मार्क को लेकर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि इतना तीस फीसदी तक का ग्रेस मार्क मिलने से यूपीपीजी में वे बहुत ही पीछे हो जाएंगे। उनके चयन में बहुत समस्या खड़ी हो जाएगी।
मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं रहा
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय और चिल्ड्रेन अस्पताल में एमबीबीएस छात्रों की हड़ताल से हजारों की संख्या में मरीजों को हो रही परेशानी को सुनने वाला कोई नहीं रहा। एसआरएन के एसआईसी छुट्टी पर हैं जबकि मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य लखनऊ गए हैं। ऐसे में मरीज भटकते रहे। एसआईसी का कार्यालय खुला था लेकिन कर्मचारियों के अलावा कोई भी अधिकारी नहीं रहा। इसके चलते मरीज और परेशान घूूमते रहे।
दूसरी मेरिट पर हुए 350 प्रवेश
एमबीबीएस छात्रों के विरोध के बीच यूपीपीजी की दूसरी बार जारी हुई मेरिट के आधार पर देर रात तक 350 प्रवेश हो चुके थे। चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक प्रो. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि 150 सौ सीटों पर प्रवेश के लिए प्रक्रिया चल रही है।