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विजिटर तक पहुंचा सर्च कमेटी का मामला

Mon, 09 Mar 2020 11:36 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2020 11:36 PM IST
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matter of au vc reached to visitor of  university
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी के दो सदस्यों के नाम होने के बाद शुरू हुआ विवाद राष्ट्रपति यानी विश्वविद्यालय के विजिटर तक पहुंच गया है। सर्च कमेटी के सदस्य बनाए गए प्रो. सीएल खेत्रपाल के नाम को लेकर शिक्षक दो धड़ों में बंट गए हैं। पूर्व कुलपति प्रो. आरएल हांगलू के करीबी रहे शिक्षक प्रो. खेत्रपाल का नाम पचा नहीं पा रहे हैं। जबकि, प्रो. हांगलू के विरोधी शिक्षक प्रो. खेत्रपाल के समर्थन में उतर आए हैं।
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इविवि कार्य परिषद की छह मार्च को हुई बैठक में प्रो. सीएल खेत्रपाल और प्रो. गौतम सेन को सर्च कमेटी का सदस्य चुना गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को ये दोनों नाम भेज दिए गए हैं। इविवि अध्यापक संघ (ऑटा) के अध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि प्रो. सीएल खेत्रपाल का चयन नियम विरुद्ध हुआ है। यूजीसी रेगुलेशन में कहा गया है कि जो व्यक्ति इविवि से जुड़ा रहा है, वह सर्च कमेटी का सदस्य नहीं बन सकता। प्रो. खेत्रपाल इविवि के पूर्व कुलपति और कार्य परिषद के सदस्य रह चुके हैं। प्रो. दुबे ने विजिटर से मांग की है कि कार्य परिषद की बैठक दोबारा बुलाई जाए। उनका कहना है कि 16 मार्च को कार्य परिषद की नियमित बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में यूजीसी रेगुलेशन-2018 के अनुरूप नए सिरे से सर्च कमेटी के सदस्य का मनोनयन किया जाए।
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उधर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व डीन विज्ञान संकाय प्रो. एके श्रीवास्तव का कहना है कि यूजीसी रेगुलेशन में कहा गया है कि सर्च कमेटी का सदस्य इविवि से जुड़ा नहीं होना चाहिए। इसकी परिभाषा संसद द्वारा पारित इविवि अधिनियम 2005 की धारा (2) की उपधारा (2) में दी गई है। जिसमें कहा गया है कि सर्च कमेटी का सदस्य इविवि का कर्मचारी या किसी बॉडी का सदस्य नहीं होना चाहिए। प्रो. खेत्रपाल वर्तमान में न तो कर्मचारी हैं और न ही किसी बॉडी के सदस्य हैं। प्रो. श्रीवास्तव का कहना है कि जो लोग यूजीसी रेगुलेशन की दुहाई दे रहे हैं, वे चार साल तक प्रो. हांगलू के साथ मिलकर यूजीसी रेगुलेशन, अधिनियम, परिनियम की धज्जियां उड़ाते रहे। ऐसे में उन्हें ये बातें शोभा नहीं देतीं। प्रो. हांगलू के साथ उन लोगों को भी सजा मिलनी चाहिए, जिन्होंने नियमों की धज्जियां उड़ाने में प्रो. हांगलू का साथ दिया।
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