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झुकाया माथ, जले दीप, जुड़े हाथ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 10 Aug 2015 01:28 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। अगस्त क्रांति की वर्षगांठ पर रविवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से देश के अमर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गई। राष्ट्रीय युवा क्रांतिकारी मोर्चा की ओर से चौक के ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे दीप जलाकर पुष्पांजलि अर्पित की गई। प्रदेश अध्यक्ष अतुल खन्ना ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन स्वाधीनता आंदोलन की वह घटना है जिसने अंग्रेजों को इस बात का अहसास कराया कि भारतीय राष्ट्रवाद की ताकत किसी कीमत पर हार नहीं मानेगी। कार्यक्रम में सुनील वर्मा, राकेश कुमार, अजीत सिंह, संजय आदि शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की ओर से लोगों ने नीम के पेड़ के पास कैंडल जलाकर अमर सपूतों को नमन किया। व्यापारी नेता अमर वैश्य मुन्ना भइया ने कहा कि वीर सपूतों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर देश को आजादी दिलाई है। 1975 इमरजेंसी में मीसा/ डीआईआर में गिरफ्तार राजनैतिक बंदी समिति ने बैठक कर अगस्त क्रांति को याद किया।
जनहित संघर्ष समिति की ओर से आजाद पार्क में चंद्रशेखर आजाद के प्रतिमा के आगे दीप जलाकर क्रांतिकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। भारतीय जन अधिकार मंच की ओर से नीम के पेड़ के नीचे कैंडल जलाकर अमर सपूतों को नमन किया गया। पूर्व कमिश्नर बादल चटर्जी, पूर्व आईएएस आरएस वर्मा, समाजसेवी सुनील चौधरी, अतुल तिवारी ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मौलाना मोहम्मद अली जौहर मेमोरियल कमेटी की ओर से गोष्ठी में अध्यक्ष हाजी शफकुर्रहमान ने कहा कि अगस्त क्रांति से हिंदी-मुस्लिम एकता का संदेश मिलता है।
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कुशवाहा बंधु की ओर से अगस्त क्रांति पर महेवा में पौधरोपण किया। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के सदस्यों ने जिला संयोजक हरदेव सिंह की अध्यक्षता में शहीदों श्रद्धांजलि दी। जन संघर्ष मोर्चा की ओर वंचित तबकों की लोकतंत्र में भूमिका पर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही मप्र की तरह उप्र में कोलों को जनजाति का दर्जा देने, संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण, सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू करने सहित पांच सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया। गोंड युवा वाहिनी की दो दिनी संगोष्ठी वीर सपूतों में चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई।
अगस्त क्रांति की याद में स्वराज विद्यापीठ में स्वराज महोत्सव की शुरुआत हुई। जैन विश्वभारती के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रामजी सिंह ने कहा कि आज समाज में गरीबों और अमीरों के बीच दूरियां बढ़ती चली जा रही हैं। इसका कारण कारपोरेट व्यवस्था है। विशिष्ट अतिथि जिलाउलहक ने स्वराज को देश की आजादी की जरूरत माना। स्वराज विद्यापीठ के कुलगुरु प्रो.आरसी त्रिपाठी ने भूमंडलीकरण और कारपोरेट व्यवस्था को स्वराज की दिशा में सबसे बड़ा बाधक बताया। संचालन कृष्ण स्वरूप आनंदी ने किया।
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अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की ओर से लोगों ने नीम के पेड़ के पास कैंडल जलाकर अमर सपूतों को नमन किया। व्यापारी नेता अमर वैश्य मुन्ना भइया ने कहा कि वीर सपूतों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर देश को आजादी दिलाई है। 1975 इमरजेंसी में मीसा/ डीआईआर में गिरफ्तार राजनैतिक बंदी समिति ने बैठक कर अगस्त क्रांति को याद किया।
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जनहित संघर्ष समिति की ओर से आजाद पार्क में चंद्रशेखर आजाद के प्रतिमा के आगे दीप जलाकर क्रांतिकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। भारतीय जन अधिकार मंच की ओर से नीम के पेड़ के नीचे कैंडल जलाकर अमर सपूतों को नमन किया गया। पूर्व कमिश्नर बादल चटर्जी, पूर्व आईएएस आरएस वर्मा, समाजसेवी सुनील चौधरी, अतुल तिवारी ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मौलाना मोहम्मद अली जौहर मेमोरियल कमेटी की ओर से गोष्ठी में अध्यक्ष हाजी शफकुर्रहमान ने कहा कि अगस्त क्रांति से हिंदी-मुस्लिम एकता का संदेश मिलता है।
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कुशवाहा बंधु की ओर से अगस्त क्रांति पर महेवा में पौधरोपण किया। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के सदस्यों ने जिला संयोजक हरदेव सिंह की अध्यक्षता में शहीदों श्रद्धांजलि दी। जन संघर्ष मोर्चा की ओर वंचित तबकों की लोकतंत्र में भूमिका पर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही मप्र की तरह उप्र में कोलों को जनजाति का दर्जा देने, संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण, सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू करने सहित पांच सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया। गोंड युवा वाहिनी की दो दिनी संगोष्ठी वीर सपूतों में चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई।
अगस्त क्रांति की याद में स्वराज विद्यापीठ में स्वराज महोत्सव की शुरुआत हुई। जैन विश्वभारती के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रामजी सिंह ने कहा कि आज समाज में गरीबों और अमीरों के बीच दूरियां बढ़ती चली जा रही हैं। इसका कारण कारपोरेट व्यवस्था है। विशिष्ट अतिथि जिलाउलहक ने स्वराज को देश की आजादी की जरूरत माना। स्वराज विद्यापीठ के कुलगुरु प्रो.आरसी त्रिपाठी ने भूमंडलीकरण और कारपोरेट व्यवस्था को स्वराज की दिशा में सबसे बड़ा बाधक बताया। संचालन कृष्ण स्वरूप आनंदी ने किया।