पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को छाती में संक्रमण की समस्या के कारण शुक्रवार (16 अक्तूबर) की शाम को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 98 वर्षीय वरिष्ठ नेता को इससे पहले भी इसी साल मई में उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
सेहत की बात: लाल कृष्ण आडवाणी के सीने में इंफेक्शन, जानिए बुजुर्गों में क्यों बढ़ जाती है ये दिक्कत
Lal Krishna Advani Health Condition: वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को शुक्रवार शाम छाती में संक्रमण (चेस्ट इन्फेक्शन) के कारण राजधानी के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुजुर्गों में कमजोर इम्युनिटी, पुरानी बीमारियों के कारण छाती के इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। लगातार खांसी, बलगम, सांस फूलने जैसे संकेत दिखें तो सावधान हो जाना चाहिए।
बुजुर्गों में फेफड़ों का संक्रमण
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि छाती और फेफड़ों के संक्रमण बुजुर्गों में बीमारी और मौत के प्रमुख कारणों में से एक हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनोसिनसेंस) और फेफड़ों की कार्यप्रणाली में आने वाले बदलावों के कारण इसका जोखिम हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ इस समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर काफी बढ़ जाती है।
- आम आबादी में जहां प्रति 1,000 लोगों में से एक-दो लोगों को छाती में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है वहीं 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह दर लगभग 12 है।
छाती में संक्रमण होने पर खांसी, बलगम आने, बुखार, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं। ये सामान्य वायरल संक्रमण से लेकर निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों की वजह से हो सकता है इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
आखिर क्यों बढ़ जाती है बुजुर्गों में ये दिक्कत?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कमजोर होने लगती है।
- उम्र बढ़ने के साथ शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, ऐसे में वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण का जोखिम काफी बढ़ जाता है। बुजुर्गों में सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे आम संक्रमण के कारण भी छाती में संक्रमण होने का खतरा हो सकता है।
- इसके अलावा जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, अस्थमा, सीओपीडी और दिल की बीमारी की दिक्कत रही है, उनमें निमोनिया जैसे संक्रमण का जोखिम ज्यादा देखा जाता है।
- बुजुर्गों में समय के साथ खांसी की ताकत भी कम हो जाती है, जिससे बलगम बाहर निकालने में कठिनाई हो सकती है। इससे भी फेफड़ों में बलगम जमा होने पर बीमारी के बढ़ने का खतरा हो सकता है।
- कई बार भोजन या पानी निगलते समय सांस की नली में चले जाने से भी फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है।
छाती के इंफेक्शन की पहचान कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र वालों में छाती में संक्रमण होने पर ज्यादा दिक्कत नहीं होती है, लेकिन उम्रदराज लोगों में ये गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है।
- छाती में संक्रमण होने लगातार खांसी की दिक्कत होती रहती है। कई लोगों को खांसी के साथ पीले-हरे रंग का बलगम भी आ सकता है।
- छाती में संक्रमण सांस लेने में परेशानी भी बढ़ा देती है जिससे सांस फूलना, घरघराहट या तेजी से सांस चलने की दिक्कत हो सकती है।
- संक्रमण के कारण बुखार और सीने में दर्द और ठंड लगने जैसी दिक्कत भी देखी जाती रही है।
- संक्रमण के कारण बुजुर्गों में बहुत ज्यादा कमजोरी, भूख कम लगने, सुस्ती जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
छाती के इंफेक्शन हो जाए तो क्या करें?
बुजुर्गों में छाती में संक्रमण के लक्षण दिखने पर समय रहते इलाज जरूरी हो जाता है। संक्रमण के कारण तेजी से सेहत बिगड़ने का खतरा हो सकता है। सांस लेने में दिक्कतों के साथ होंठ नीले पड़ने या अचानक भ्रम होने पर इमरजेंसी में डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है।
- डॉक्टर की सलाह पर गुनगना पानी और अन्य तरल पदार्थ दें।
- आराम करते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखने से सांस लेने में राहत मिल सकती है।
- हर बार छाती का इंफेक्शन बैक्टीरिया की वजह से नहीं होता। वायरल संक्रमण भी इसका कारण हो सकता है जिसमें एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है।
- हाथों की सफाई रखना, धूम्रपान से दूरी और फ्लू, कोविड-19 तथा न्यूमोकोकल टीके लगवाने से संक्रमण से बचाव हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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