marriage muhurat : दस हजार से ज्यादा परिवारों में गूजेंगी शहनाई, तीन हजार करोड़ से ज्यादा के कारोबार का अनुमान
इस बार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्यक्रमों और विवाह-शादी जैसे आयोजन होंगे। नवंबर और दिसंबर में शादियों के कई शुभ मुहूर्त हैं। हालांकि सर्वाधिक शादियां 12 नवंबर को ही हो रही हैं।
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दिवाली और छठ के बाद अब घरों में शहनाईयां बजने का समय आ गया है। देवोत्थान एकादशी यानी 12 नवंबर से शुभ मुहूर्त में बैंड बाजा बजेगा, शहर सजेंगे और शादियां होंगी। यह सहालग इसलिए भी खास है कि इस बार बंपर शादियां होने का बड़ा फायदा प्रयागराज के कारोबार को होने जा रहा है। होटल, गेस्ट हाउस, सराफा, ऑटो मोबाइल्स, टेंट, कैटरिंग, कपड़े समेत तमाम सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को सहालग में अच्छे कारोबार का भरोसा है।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल के अनुसार, सहालग में लगभग 10 हजार शादियां होने से बैंड-बाजा और बरातियों की धूम रहेगी। इस अवधि में लगभग 3000 करोड़ से ज्यादा का कारोबार शहर को मिलेगा।
नवंबर और दिसंबर में हैं कई शुभ मुहुर्त
इस बार 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्यक्रमों और विवाह-शादी जैसे आयोजन होंगे। नवंबर और दिसंबर में शादियों के कई शुभ मुहूर्त हैं। हालांकि सर्वाधिक शादियां 12 नवंबर को ही हो रही हैं। इस वजह से शहर के सभी प्रमुख गेस्ट हाउस, होटल खाली नहीं है। यहां तक की रीवा रोड, झूंसी स्थित रिजार्ट की भी लोगों ने पहले से ही बुकिंग करवा रखी है। प्रयागराज में जनवरी एवं फरवरी में महाकुंभ का आयोजन है। इस वजह से जिले में अधिकांश शादियां नवंबर एवं दिसंबर माह में ही हो रही हैं। इसी वजह से शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण अंचलों के छोटे-बड़े गेस्ट हाउस व होटल में शादियों की भरमार है। इस वजह से लोगों को हलवाई भी काफी व्यस्त है।
कार से लेकर शानदार बाइक का क्रेज
शादियों में कार और बाइक उपहार में देने का भी रिवाज है। हालांकि नवरात्र, धनतेरस और दिवाली के मौके पर तमाम लोगों ने शादियों को लेकर चार पहिया एवं दो पहिया वाहन खरीदे, लेकिन सहालग की वजह से इसकी बिक्री अब भी काफी तेज है। कारों के कुछ मॉडल ऐसे भी हैं जिनकी वेटिंग तीन से चार महीने की है। फिलहाल इस सीजन तीन हजार से ज्यादा दो पहिया एवं डेढ़ हजार से अधिक कारें बिकने की बात कही जा रही है।
हल्की ज्वेलरी की खरीद ज्यादा
शादियों में आभूषण जरूरी है। सोना भले ही 80 हजार के पार हो लेकिन इसका कोई असर सहालग की तैयारियों में लगे लोगों पर नहीं दिख रहा है। बहू-बेटी के लिए पसंद की ज्वेलरी देने का इरादा लेकर आए खरीदार जमकर जेवर खरीद रहें हैं। हालांकि इस बार हल्की ज्वेलरी का चलन बढ़ा है। प्रयागराज ज्वेलर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिनेश सिंह का कहना है कि बहू-बेटी के लिए ही नहीं बल्कि दामाद और बेटे के लिए भी अंगूठी, सोने की चेन, ब्रेसलेट आदि की खरीदारी हो रही है।
बग्घी, कार की जगह घोड़ी ज्यादा पसंद कर रहे हैं दूल्हे
बहादुरगंज स्थित एक घोड़ी वाले आलम ने बताया कि इस बार बुकिंग अच्छी है। कहा कि घोड़ी की बुकिंग 2100 से लेकर 11000 रुपये में की जा रही है। उन्होंने बताया कि 70 फीसदी से ज्यादा शादियों में घोड़ी तो 10 फीसदी फूलों की बग्घी पसंद की जाती है।
अधिकांश होटलों में एक से दो हजार प्रति प्लेट खाने की बुकिंग
सहालग के मौके पर इस बार होटलों में भी अच्छी बुकिंग हुई है। अधिकांश होटलों में बुकिंग भोजन की प्लेट के हिसाब से होती है। कुछ होटलों में सजावट की खर्च अलग लिया जाता है। अधिकांश होटलों में खाने का रेट एक हजार रुपये से लेकर दो हजार रुपये प्लेट तक है। प्रयाग इन होटल के रौनक गुप्ता ने बताया कि महाकुंभ की वजह से नवंबर एवं दिसंबर में अच्छी बुकिंग है। जनवरी एवं फरवरी में बुकिंग काफी कम हुई है।
गेस्ट हाउस संचालकों का बढि़या जा रहा सीजन
प्रयागराज में 250-300 छोटे बड़े गेस्ट हाउस एवं बैंक्वेट हॉल हैं। अधिकांश में शादी का खर्च किराया, डेकोरेशन समेत डेढ़ से चार लाख रुपये है। कुछ में पैकेज के रूप में ग्राहकों को कैटरिंग, स्टेज, मंडप और लॉन की सजावट की सुविधाएं दी जाती हैं। कुछ मैरिज लॉन ऐसे हैं, जिनका एक दिन का पैकेज 10-20 लाख रुपये का है। इसके अलावा बैंड, बाजा, लाइट, डीजे का खर्च अलग होता है। इलाहाबाद गेस्ट हाउस एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. गुफरान ने बताया कि सीजन बढि़या जाएगा। अधिकांश गेस्ट हाउस को इस सीजन में कम से कम आठ से दस बुकिंग मिली है।
कहां कितना होगा कारोबार
गेस्ट हाउस - 150 करोड़
कैटरिंग - 100 करोड
हलवाई - 800 करोड़
ऑटोमोबाइल - 300 करोड़
फ्लावर डेकोरेशन - 50 करोड़
फर्नीचर - 70 करोड़
फोटोग्राफी - 40 करोड़
ट्रैवल - 25 करोड़
ज्वेलरी - 600 करोड़
कपड़े - 500 करोड़
फुटवियर - 40 करोड़
गिफ्ट - 100 करोड
बैंड, डीज - 55 करोड़
घोड़ी बग्घी - 2 करोड़
आतिशबाजी - 50 करोड़
अन्य - 200 करोड़
नोट...कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स की ओर से अनुमानित आंकड़ा