केशरी देवी और रेखी सिंह के बीच समझौता से साधे कई सियासी समीकरण
जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह और सांसद केशरी देवी पटेल के बीच जारी शीतयुद्ध को फिलहाल खत्म कराके भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कई सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की है। समझौते की इस पूरी कवायद को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का हस्तक्षेप और फिर जिस तरह से केशरी देवी पटेल के आवास पर समझौते को अंतिम रूप दिया गया, उससे साफ जाहिर है कि पार्टी किसी भी सूरत में बगावत और गुटबाजी को पनपने नहीं देना चाहती।
प्रदेश में सरकार बनने के बाद कई जिलों में पंचायत अध्यक्षों और ब्लाक प्रमुखों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व को आशंका रही कि यदि रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया तो अन्य स्थानों पर भी इस तरह की गुटबाजी शुरू हो सकती है। इस तरह से दोनों पक्षों में समझौता कराके इन आशंकाओं को खत्म करने की कोशिश की गई है।
इसके अलावा लंबे समय तक यह बहस भी छिड़ी रही कि रेखा सिंह और उनके पति पार्टी में हैं या नहीं। इससे गुटबाजी को और हवा मिल रही थी। जबकि, अशोक सिंह और केशरी देवी पटेल दोनों ही नेताओं की यमुनापार की राजनीति में प्रभावी दखलंदाजी है। केशरी देवी के पुत्र दीपक करछना से विधायक रह चुके हैं तो पूर्व ब्लाक प्रमुख अशोक सिंह की मांडा के अलावा मेजा की सियासत में मजबूत दखल है।