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Prayagraj News: ट्रेन की चपेट में आकर जा चुकी हैं कई जानें

Mon, 17 Aug 2026 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Mon, 17 Aug 2026 02:05 AM IST
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Many lives have been lost after being struck by trains
कबूतरा देवी और देवकी की मौत ने ग्रामीणों के पुराने जख्म फिर कुरेद दिए। लंबे समय से आरओबी या अंडरपास की मांग की जा रही है, जो अब तक पूरी नहीं हुई। ट्रेन की चपेट में आकर अब तक कई जानें जा चुकी हैं।
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गांव के जयंती लाल दुबे, गुड्डू दुबे और प्रधान राम किशुन निषाद ने बताया कि गांव के सामने चार रेल लाइन हैं, एक निर्माणाधीन है। दूसरे रास्ते से जाने पर करीब आठ किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे बचने के लिए ग्रामीण पटरियां पार करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, रमाशंकर दुबे, फूलपत्ती देवी, रामप्रकाश दुबे, राजा दुबे और मुन्नी देवी की भी इसी तरह मौत हो चुकी है।
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पिछले लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार और रेल बाउंड्रीवाल निर्माण के विरोध तक का रास्ता अपना चुके हैं। लेकिन मांगें अनसुनी हैं। गांव में मातम के साथ रेलवे के प्रति आक्रोश है।
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मासूम को सीने से लगाकर फूट पड़ा पिता

हादसे में पत्नी और बेटी को गंवाने वाला रमाशंकर छह माह के बेटे छोटू को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोता रहा। कहा कि आरओबी या अंडरपास बन जाता तो मासूम के सिर से मां का साया नहीं छिनता। उसका आठ वर्षीय बेटा आनंद और छह वर्षीय सत्यम भी रोते रहे।
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