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आयोग के नए अध्यक्ष के सामने कई चुनौतियां

Sat, 29 Jun 2019 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jun 2019 12:54 AM IST
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Many challenges before UPPSC new chairperson.
UPPSC - फोटो : AU
पुराने विवादों से निपटना नए अध्यक्ष के लिए होगी चुनौती
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध सिंह एक जुलाई को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनकी जगह सेवानिवृत्त आईएएस अफसर प्रभात कुमार जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। नए अध्यक्ष दो जुलाई को ज्वाइन कर सकते हैं लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। आयोग की परीक्षाओं की सीबीआई और एसटीएफ जांच चल रही है। तमाम परीक्षाएं विवादों के घेरे में हैं। ऐसे में कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रभात कुमार को पुराने विवाद निपटाने के साथ आने वाली परीक्षाओं की शुचिता को भी सुनिश्चित करना होगा।
डॉ. अनिरुद्ध सिंह ने 15 मार्च 2016 को आयोग के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था। उनके तीन साल के कार्यकाल में परीक्षाओं को लेकर तमाम विवाद सामने आए और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। पीसीएस-2016 और पीसीएस-2017 में सवालों को लेकर विवाद रहा। पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा में गलत पेपर बंट गया और इसकी वजह से आयोग को दो पेपरों की परीक्षा निरस्त करते हुए परीक्षा का आयोजन दोबारा कराना पड़ा।
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आरओ/एआरओ-2016 की प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक का मामला भी सामने आया, जिसकी कई साल तक सीबीसीआईडी जांच चली। पीसीएस-जे 2018 की मुख्य परीक्षा को लेकर भी विवाद रहा। वहीं, एपीएस-2010 का अंतिम चयन परिणाम भी डॉ. अनिरुद्ध सिंह के कार्यकाल में घोषित किया गया और परीक्षा में धांधली की शिकायतों के कारण सीबीआई को इसकी जांच के लिए अलग से प्रदेश सरकार से मंजूरी लेनी पड़ी। सबसे बड़ा विवाद एलटी ग्रेड परीक्षा को लेकर सामने आया और पेपर आउट होने के मामले में आयोग की परीक्षा नियंत्रक रहीं डॉ. अंजू कटियार को जेल जाना पड़ा।
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डॉ. अनिरुद्ध सिंह अपने पीछे जो विवाद छोड़कर जा रहे हैं, नए अध्यक्ष प्रभात कुमार को उनसे निपटना होगा। इसके साथ ही आने वाली परीक्षाओं का सफल आयोजन भी नए अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा पर विवाद के बाद आयोग की आगामी सभी परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी हैं। परीक्षाओं का समय से आयोजन कराना भी नए अध्यक्ष के जिम्मे होगा। साथ ही एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर भी आयोग के नए अध्यक्ष को कोई न कोई निर्णय लेना होगा।
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