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Prayagraj News: आम हुआ खास, कुदरत की मार से आम आदमी से दूर हुआ स्वाद

Mon, 08 Jun 2026 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Mon, 08 Jun 2026 01:49 AM IST
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Mango became special, nature's attack took away the taste from the common man
लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू
दशहरी आम इस बार आम आदमी की पहुंच से दूर होता नजर आ रहा है। जून महीने में अमूमन आम लोगों के बजट में आ जाते थे लेकिन इस साल स्थिति उलट हैं।
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मौसम की बेरुखी और बार-बार आई आंधी ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नतीजतन, बाजार में आम की किल्लत से इसके दाम आसमान छू रहे हैं। इस स्थिति में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आम का स्वाद अब एक सपना से कम नहीं है।



लालगोपालगंज बाजार में फलों का राजा दशहरी आम ही सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है लेकिन इसकी कीमतें खरीदारों के पसीने छुड़ा रही हैं। फुटकर में बड़े साइज की पाल दशहरी आम 120 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
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कमोबेश, यही तीखे तेवर सीकर दशहरी के भी हैं। उपभोक्ताओं के लिए छोटे साइज की पाल दशहरी भी कोई राहत नहीं दे पा रही है, जो बाजार में 80 से 120 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है।
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बाहर से मंगाए जा रहे बादामी आम की कीमत भी बाजार में 100 रुपये प्रति किलो से कम नहीं है। वहीं, चौंसा आम इस समय सबसे ज्यादा भाव खा रहा है जिसकी कीमत 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। बागवानों का कहना है कि फसल की रखवाली और कीटनाशकों में खर्च के बाद भी आंधी ने पूरी मेहनत मिट्टी में मिला दी है।






बौर से लेकर गुठली बनने तक मौसम की मार





इस साल आम की फसल को किसी एक नहीं बल्कि आंधी में प्राकृतिक मार झेलनी पड़ी है। शुरुआती दौर में जब पेड़ों पर बौर आए और कैरी बनने का समय हुआ तब आई आंधी व बेमौसम बारिश ने बौर को पूरी तरह झाड़ दिया। बार-बार हुए नुकसान के बाद पेड़ों पर नाममात्र के फल बचे हैं।






- थोक मंडी में इस बार आम की आवक बेहद कम है। बाजार में दशहरी पर्याप्त मात्रा में दिख तो रही है लेकिन पीछे से माल महंगा आने के कारण इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। - निसार अहमद (भोंदू) दुकानदार




- इस बार आम के दाम नीचे गिरने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। बीते वर्षों में जून में आम बेहद कम दामों पर बिकता था लेकिन इस बार शुरुआत से ही 100 रुपये से ऊपर है। - मोहम्मद हनीफ, दुकानदार




- ढाई बीघे का बाग चार लाख रुपये में ठेके पर लिया था। उसकी रखवाली, खाद, पानी और कीटनाशकों के छिड़काव में काफी खर्च हो गया। मौसम की मार के बाद अब मूल पूंजी निकालना भी मुश्किल हो रहा है।- मोहम्मद सेबू, बागवान





- मेरे बाग में करीब 60 पेड़ हैं। लगातार आई आंधी-बारिश में अधिकांश फल टूटकर समय से पहले ही गिर गए। अब बचे हुए फलों की रखवाली करना हमारी मजबूरी है। इस साल तो मेहनत की मजदूरी तक नहीं निकल पा रही है।- चेतराम पटेल, बागवान, लालगोपालगंज।

लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू

लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू

लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू

लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू

लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू

लालगोपालगंज-मोहम्मद सेबू

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