महंत नरेंद्र गिरि केस : निरंजनी अखाड़े के सचिव आशीष गिरि की मौत की नहीं होगी जांच
अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के बाद निरंजनी अखाड़ा के सचिव आशीष गिरि की मौत का मामला भी फिर चर्चा में आ गया था। चर्चा यह थी कि नरेंद्र गिरि की तरह ही दो साल पहले आशीष गिरि की मौत भी रहस्यमय परिस्थितियों में हो गई थी।
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निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत आशीष गिरि की मौत का राज फिलहाल राज ही रहेगा। पुलिस की ओर से कह दिया गया है कि उनकी मौत के मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच में हत्या की बात प्रकाश में नहीं आई है। यह जवाब सूचना के अधिकार के तहत किए गए आवेदन के क्रम में जिला पुलिस की ओर से आवेदनकर्ता को दी गई है। इस जवाब के बाद यह भी माना जा रहा है कि सचिव आशीष गिरि की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने की भी संभावना नहीं है।
अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के बाद निरंजनी अखाड़ा के सचिव आशीष गिरि की मौत का मामला भी फिर चर्चा में आ गया था। चर्चा यह थी कि नरेंद्र गिरि की तरह ही दो साल पहले आशीष गिरि की मौत भी रहस्यमय परिस्थितियों में हो गई थी जिसका राज अब तक नहीं खुला। इस मामले में अधिवक्ता विजय द्विवेदी की ओर से दारागंज थाने और आला पुलिस अधिकारियों को तहरीर देकर आशीष गिरि की मौत मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की गई थी।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी जानकारी
तहरीर में उन्होंने बताया था कि इस मामले में साजिश के तहत प्रार्थनापत्र दिया गया कि बीमारी से परेशान होकर आशीष गिरि ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। ऐसे में मुकदमा पंजीकृत कर जांच कराई जाए। चार अक्तूबर को यह तहरीर पुलिस को दी गई थी। कोई कार्रवाई न होने पर 10 अक्तूबर को उनकी ओर से सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर यह जानकारी मांगी गई कि उनकी तहरीर पर क्या कार्रवाई हुई।
सीओ की ओर से बिंदुवार दी गई आख्या
आरटीआई आवेदन के संबंध में दी गई जानकारी में पुलिस की ओर से बताया गया है कि मामले में सीओ दारागंज ने बिंदुवार आख्या उपलब्ध कराई। इसके मुताबिक, 17 नवंबर 2019 को आशीष गिरि की मौत के बाद मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल के दौरान आत्महत्या की बात प्रकाश में आई थी। मौके से मिली पिस्टल, डीबीबीएल शस्त्र, चेक आदि सामग्री फोरेंसिक लैब भेजी गई थी। जिसकी जांच रिपोर्ट में भी हत्या की बात प्रकाश में नहीं आई। आख्या में यह भी बताया गया है कि वर्तमान समय में भी स्थानीय लोगों से घटना के संबंध में जानकारी की गई लेकिन हत्या की बात प्रकाश में नहीं आई।
खुदकुशी की तो आखिर वजह क्या रही?
जानकारों का कहना है कि पुलिस भले ही यह कह रही हो कि हत्या की बात प्रकाश में नहीं आई हो, लेकिन इससे भी जांच की मांग को खारिज नहीं किया जा सकता। इसलिए क्योंकि अगर आशीष गिरि ने खुदकुशी की तो भी यह जांच का विषय है कि इसकी वजह क्या रही। उन्हें कनपटी पर एक गोली लगी तो मौके से कारतूस के दो खोखे कैसे बरामद हुए। एक सवाल यह भी है कि अगर वह बीमारी से इतने ही परेशान थे, तो अपने शस्त्र लाइसेंस का दायरा बढ़ाने के लिए क्यों प्रयासरत थे।