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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahant Narendra Giri Case: All the cameras of Baghbari Gaddi Math were closed on the day of Mahant's death, every step of the evidence erased

महंत नरेंद्र गिरि केस : महंत की मौत के दिन बंद थे बाघबंरी गद्दी मठ के सभी कैमरे, हर कदम मिटाए गए सबूत

Sun, 26 Sep 2021 04:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 26 Sep 2021 04:09 PM IST
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Mahant Narendra Giri Case: All the cameras of Baghbari Gaddi Math were closed on the day of Mahant's death, every step of the evidence erased
prayagraj : मठ बाघंबरी गद्दी में महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले की जांच करने पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : prayagraj

बाघंबरी गद्दी मठ के आगंतुक कक्ष में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत का राज हमेशा हर किसी के लिए राज ही बनकर रह जाए, इसके लिए हर कदम पर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। इस सनसनीखेज घटना को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। कहा जा रहा है कि इस रहस्यमय मौत की बिसात के पीछे मठ में लगे एचडी कैमरे भी हैं, जो घटना वाले दिन बंद हो गए थे ।

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ऐसे में अपने पहली मंजिल के विश्रामकक्ष से उस प्रतीक्षालय तक महंत कब और कैसे पहुंचे? क्या उस कमरे में पहले से कोई मौजूद था? या फिर उनके आने के बाद कोई वहां दाखिल हुआ? ऐसे सवालों के जवाब ढूंढ पाना मुश्किल हो गया है। क्योंकि, मठ के प्रवेश द्वार से लेकर उस कक्ष तक लगे कैमरों में इस घटनाक्रम से जुड़ी कोई रिकार्डिंग मौजूद नहीं है। इस वजह से सीबीआई के लिए महंत की मौत का सच बाहर लाना अब पत्थर पर दूब उगाने जैसा हो गया है।

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Mahant Narendra Giri Case: All the cameras of Baghbari Gaddi Math were closed on the day of Mahant's death, every step of the evidence erased
prayagraj : मठ बाघंबरी गद्दी में महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले की जांच करने पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : prayagraj

कुछ दिन पहले डीवीआर भी हो गया था खराब
कैमरों के अचानक बंद होने के पीछे मठ के कुछ साधु बिजली जाने की वजह बता रहे हैं, तो यह भी पता चला है कि इन कैमरों से जुड़ी एक डीवीआर मशीन कुछ दिन पहले ही खराब हो गई थी। अमर उजाला की तफ्तीश में पता चला कि उस दिन बख्शी बांध उपकेंद्र से जुड़े एसपी मालवीय फीडर पर 12:16 से 12:58 बजे तक कुल 42 मिनट तक बिजली आपूर्ति ठप थी। लेकिन, मठ के संतों, सेवादारों का इसके पीछे बिजली जाने का यह बहाना इसलिए भी नहीं माना जा सकता, क्योंकि वहां 63 केवीए क्षमता का जेनरेटर भी लगा है।

 

इसके अलावा चार किलोवाट का इनवर्टर भी है। ऐसे में फीडर का तार टूटने, शट डाउन लिए जाने से सप्लाई बाधित होने का असर मठ की आपूर्ति पर नहीं पड़ता रहा है। इस पड़ताल में बाघंबरी मठ में लगे कुल 43 में से 15 ऐसे कैमरे घटना के दिन बंद पाए गए, जो महंत के आराम कक्ष से बाहर आने के बाद भूतल पर जहां शव मिला उस कक्ष से लेकर मठ के मुख्य प्रवेश द्वार तक का बड़ा हिस्सा रिकार्ड करते थे।  
 

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prayagraj : मठ बाघंबरी गद्दी में महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले की जांच करने पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : prayagraj

मॉनिटर लगा था महंत के निजी कक्ष में

ये सभी कैमरे क्लाउड-9 कंपनी के थे और इनका मॉनीटर कंट्रोल महंत के निजी कक्ष में लगा है। जिसे सीबीआई ने सील कर दिया है। लेकिन, इन कैमरों से जुड़ी डीवीआर मशीन, जिसमें अचानक खराबी आने की बात कही जा रही है, वह महंत के कक्ष के बाहर लगाई गई थी और घटना के बाद आनन-फानन में बाहर भी निकाल दी गई।

 

इस डीवीआर के बैकअप से छेड़छाड़ की भी आशंका है। इन कैमरों का रखरखाव करने वाले हाशिम अली बताते हैं कि गोशाला, स्वामी विचारानंद महाविद्यालय, फव्वारा स्थल से लेकर मठ के मुख्य प्रवेश द्वार तक के क्लाउड-9 कैमरों की डीवीआर हीटिंग की वजह से कुछ दिन पहले ही खराब हो गई थी।

 

इससे इन कैमरों में रिकार्डिंग ठीक से नहीं हो पा रही थी। हाशिम अली का दावा है कि घटना से कुछ दिन पहले ही महंत को इन कैमरों की डीवीआर खराब होने और रिकार्डिंग न आने की जानकारी दी गई थी। इस डीवीआर से आठ से 10 दिन का बैकअप हासिल किया जा सकता है, लेकिन कैमरे कब से और कैसे निष्क्रिय हुए, यह गहरी जांच का विषय बन गया है।

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Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले की जांच करने मठ बाघंबरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : प्रयागराज

आखिरी बार 12:24 बजे सीढ़ियों से उतरे से महंत नरेंद्र गिरि
बाघंबरी मठ की पहली मंजिल पर महंत के कक्ष से लेकर सीढ़ियों तक पर लगे सीडी प्लस के कैमरे सही पाए गए हैं। इन कैमरों में उस दिन महंत के अपने निजी कक्ष से बाहर निकलने की फुटेज मौजूद है। घटना वाले दिन महंत नरेंद्र गिरि दिन के 12:24 बजे अपने कक्ष से निकलकर सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए दिखाए दे रहे हैं। इसके बाद वह किधर गए और किससे, कहां मिले, बाहरे के कैमरे बंद होने की वजह से यह सब रहस्य बन गया है।

आगंतुक कक्ष में किसी का था उन्हें इंतजार
प्रयागराज। मठ के मुंशी सर्वेश तिवारी उर्फ बब्लू का कहना है कि उस दिन नरेंद्र गिरि महाराज भोजन के बाद अपने ऊपर वाले कक्ष में गए ही नहीं थे। दिन के 11:30 बजे भोजन के लिए मठ की घंटी बजी, इसके बाद वह नीचे आए थे। भोजन के बाद वह आगंतुक कक्ष में किसी मुलाकाती का इंतजार करने चले गए थे। तब उन्होंने वहां मौजूद सेवादारों और चाय-नाश्ते के इंतजाम में रहने वाले कर्मियों को यह जानकारी दी थी, कि कोई उनसे मिलने के लिए आने वाला है। वह कौन था? कब आया और कैसे महंत की जान चली गई, यह सारे सवाल उन्हीं कर्मियों, सेवादारों और विद्यार्थियों के बीच रहस्य बनकर रह गए हैं।

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Prayagraj News : मठ बाघंबरी गद्दी। - फोटो : प्रयागराज

बाघंबरी मठ की दीवारों के पीछे छिपे महंत की मौत के कई राज

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत से जुड़े कई राज बाघंबरी मठ की दीवारों के पीछे छिपे हुए हैं। उन्हें एक-एक कर खोले जाने की जरूरत है। कम लोग जानते हैं कि साधु-संतों की देश की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को वाई श्रेणी की विशेष सुरक्षा प्राप्त थी। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दिन फंदे से लटकता महंत का शव पाए जाने की सनसनीखेज घटना सामने आई, उस दिन उनकी विशेष सुरक्षा दस्ते के 11 जवान वहां थे ही नहीं। इतना ही नहीं, जिस कमरे में फांसी लगाए जाने की बात कही जा रही है, वहां की परिस्थितियां भी घटना को लेकर गहरे संदेह पैदा करती हैं। समाधि भी जिस गड्ढे में दी गई, उसमें शव के साथ दो दर्जन से अधिक नमक की बोरियां पाटी गई हैं। ऐसे में महंत की मौत से जुड़े ऐसे कई अनसुलझे सवालों को सीबीआई समय रहते खोल पाती है या नहीं, यह भविष्य पर निर्भर करेगा।

सुरक्षा को लेकर खड़े हो रहे सवाल
पांच दिन पहले सोमवार को बाघंबरी गद्दी मठ में महंत नरेंद्र गिरि की मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई इसका सच जानने के लिए हर कोई आतुर है। इस घटना के पीछे सबसे बड़ा सवाल उनकी सुरक्षा को लेकर खड़ा हो रहा है। दरअसल महंत नरेंद्र गिरि को वाई श्रेणी की विशेष सुरक्षा मिली हुई थी। पुलिस अफसरों के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा में पीएसओ, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल समेत कुल 11 जवानों की तैनाती थी। महंत की सुरक्षा के लिए जवानों की आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई थी। साथ में पुलिस स्कॉर्ट भी उनके साथ चलती थी। कहा जा रहा है कि नियमानुसार ऐसी शख्सियत के आराम करने अथवा सोने दौरान भी उनके कमरे के बाहर एक सुरक्षा गार्ड की तैनाती रहनी चाहिए। लेकिन, जिस समय महंत की मौत की बात कही जा रही है, तब वहां कोई गार्ड तैनात नहीं था।

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Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले की जांच करने मठ बाघंबरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : प्रयागराज

फोन भी मिला था बंदअलबत्ता किसी सेवादार ने जब चाय देने के लिए कई बार दरवाजा खोलवाने की कोशिश की और फोन करने पर उनका मोबाइल नहीं उठा, तब दरवाजा तोड़कर मठ के शिष्य भीतर घुसे। यहां भूतल पर बने उस कक्ष का दरवाजा तोड़कर भीतर घुसने वाले शिष्यों की बात कितनी सच है, यह भी गहरी जांच का हिस्सा हो सकता है। इसलिए कि जिस कक्ष में महंत का शव मिला, उससे संबद्ध बाथरूम का दरवाजा भीतर से लिंक होने के साथ ही बाहर भी खुलता है। खुफिया विभाग ने घटना के बाद उस कक्ष के चोर दरवाजे की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी थी।

इतना ही नहीं, महंत के पार्थिव शरीर को जब समाधि दी गई, तब शव के साथ नमक की बोरियां पहले पाटी गईं। इसके पीछे कुछ संतों ने शास्त्रोक्त पद्धति का हवाला दिया था, ताकि हड्डियां भी गल जाएं और सबकुछ परमात्मा में विलीन हो जाए। अब, कहा जा रहा है कि नमक की बोरियां डाले जाने से शव जल्द ही गलकर नष्ट हो सकता है। ऐसे में सीबीआई अगर साक्ष्य के तौर पर चोट के निशान या अन्य जख्मों, फंदे के चिह्नों को देखने के लिए समाधि से शव बाहर निकलवाना भी चाहेगी तो क्या और कितना हासिल हो सकेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। 

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Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले की जांच करने मठ बाघंबरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम। - फोटो : प्रयागराज

सीबीआई ने सेवादारों और शिष्य से घंटों की पूछताछ 
 

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने शनिवार को अल्लापुर स्थित मठ बाघंबरी गद्दी पहुंच कर सेवादारों और शिष्य बलवीर पुरी से घंटों पूछताछ की। टीम ने दरवाजा तोड़कर महंत नरेंद्र गिरि का शव फंदे से उतारने वाले सेवादारों से कई सवाल किए। चार सेवादारों के मोबाइल जब्त कर लिए गए हैं। सीबीआई टीम ने जिले के आला अधिकारियों के साथ पुलिस लाइन में साढ़े तीन घंटे की मैराथन मीटिंग भी की। सीबीआई टीम आईजी वीके चौधरी और मुख्य जांच अधिकारी केएस नेगी के नेतृत्व में शाम चार बजे मठ पहुंची। टीम के साथ एसआईटी प्रभारी अजीत सिंह चौहान भी थे।

सर्वेश, सुमित ने तोड़ा था दरवाजा, धनंजय भी था साथ

टीम सीधे गेस्ट के उस कमरे के बाहर पहुंची जहां महंत का शव मिला था। पुलिस ने इस कमरे को सील कर रखा है। इसके बाद सीबीआई टीम गेस्ट हाउस के सभी कमरों में गई। कमरों और आसपास के  निरीक्षण के बाद सेवादारों सर्वेश उर्फ बबलू, सुमित और धनंजय को बुलाया गया। सर्वेश और सुमित ने ही दरवाजा तोड़कर महंत के शव को नीचे उतारा था। धनंजय भी उनके साथ था। तीनों सेवादारों से घंटों पूछताछ की गई। इसके बाद उनके मोबाइल जब्त कर लिए गए।

एक और सेवादार का मोबाइल जब्त किया गया है। इनसे पूछताछ के बाद टीम ने नरेंद्र गिरि के शिष्य बलवीर पुरी से एक घंटे तक पूछताछ की। टीम गेस्ट हाउस और मठ की छत पर भी गई। फिलहाल सील कमरे को नहीं खोला गया था। सीबीआई टीम इसी कमरे में सीन रिक्रिएट करेगी। इससे पहले सीबीआई टीम ने पुलिस लाइन में एडीजी, आईजी, डीआईजी समेत सभी आला अधिकारियों के साथ मीटिंग की। 

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