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महाकुंभ में महामंडलेश्वर : अखाड़ों में चलती रही है उठा-पटक, पदवियों पर छिड़े हैं कई विवाद

Sat, 01 Feb 2025 06:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 01 Feb 2025 06:44 AM IST
सार

अखाड़ों में आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और श्रीमहंत की पदवी सबसे अहम होती है। पदवी देने से पहले जांच-पड़ताल करने का सख्त नियम है। अखाड़े की ओर से उनके घर और थाने पर पत्र भेजकर चरित्र का सत्यापन कराया जाता है।

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Mahamandaleshwar in Mahakumbh: There has been uproar in the Akharas
फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और किन्रर अखाड़े में आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी। file pic - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने से पहले भी कुंभ में अखाड़े विवादित व्यक्तियों को महामंडलेश्वर बनाकर विवादों में घिर चुके हैं। अखाड़ों में आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और श्रीमहंत की पदवी सबसे अहम होती है। पदवी देने से पहले जांच-पड़ताल करने का सख्त नियम है। अखाड़े की ओर से उनके घर और थाने पर पत्र भेजकर चरित्र का सत्यापन कराया जाता है।

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स्वच्छ छवि होने पर ही आचार्य महामंडलेश्वर की सहमति से अखाड़े कुंभ के दौरान महामंडेलश्वर के पद पर पट्टाभिषेक करते हैं। अखाड़ा पदाधिकारियों का कहना है धीरे-धीरे शर्तों में नरमी आती जा रही है। धर्मध्वजा के नीचे पुकार से अब उनकी छूट तय होती है। इसी वजह से कई ऐसे भी पट्टाभिषेक करा लेते हैं, जो इस पद के योग्य नहीं होते। प्रयाग में पिछले कुंभ के दौरान निरंजनी अखाड़े ने गाजियाबाद के शराब कारोबारी रहे सचिन दत्ता को सच्चिदानंद बनाकर महामंडलेश्वर की पदवी दी थी। 
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संत समाज ने इसका भारी विरोध किया। इससे सच्चिदानंद को महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा देना पड़ा। जूना अखाड़ा भी राधे मां को महामंडलेश्वर बनाने पर विवादों में घिरा था। महानिर्वाणी अखाड़ा ने भी प्रयाग में 2013 के कुंभ के दौरान अश्लील सीडी को लेकर विवादों में आए संत नित्यानंद को महामंडलेश्वर बनाया था। नित्यानंद कुंभ स्नान के लिए प्रयाग आए, लेकिन संतों के विरोध के चलते एक स्नान के बाद वापस लौट गए। नित्यानंद अब देश छोड़कर एक नए द्वीप में जा बसे हैं। 
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किन्नर अखाड़े की स्थापना में थी महत्वपूर्ण भूमिका : ऋषि अजय दास की किन्नर अखाड़े की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2015 के उज्जैन कुंभ में उन्होंने अखाड़े का छावनी प्रवेश जुलूस निकलवाया था। हालांकि, बाद में उनका लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से विवाद हो गया। इसके बाद से ही दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। ऋषि अजय दास ने लक्ष्मी नारायण पर किन्नर अखाड़े पर कब्जा जमाने का भी आरोप लगाया है।

महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया काफी कठिन होती है 
महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया काफी कठिन होती है। सबसे पहली शर्त व्यक्ति का संन्यासी होना होता है। इसके साथ ही उसको चारों वेद, पुराण और शास्त्रों का ज्ञान होना चाहिए। घर-परिवार और रिश्ते-नाते, मोहमाया का पूरी तरह से परित्याग करना होता है। कथा, सत्संग, प्रवचन के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार करने का साक्ष्य मिलने पर उसका नाम महामंडलेश्वर के लिए नामित होता है। तकरीबन सभी अखाड़ों में अब जाति बंधन नहीं रह गया। इस वजह से किसी भी जाति के व्यक्ति का महामंडलेश्वर पद पर अभिषेक किया जा सकता है। 


अखाड़े में वरिष्ठता समेत मिलती हैं कई सुविधाएं 
महामंडलेश्वर पद गरिमा का होता है। महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद अखाड़े में उनकी वरिष्ठता तय हो जाती है। अखाड़ों के कामकाज में भी वह हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके साथ ही कई अन्य सुविधाएं भी उनको मिलती हैं। अमृत स्नान के दौरान राजसी रथ पर सवार होकर अखाड़े के जुलूस में शामिल होने का अवसर मिलता है। कुंभ प्रवास में भी उनको अतिरिक्त सुविधा मिलती है। छावनी प्रवेश जुलूस में भी वह रथ के साथ शामिल होते हैं। 

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