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Mahakumbh : महिलाओं के अमृत स्नान की लड़ाई अब कोर्ट में आई, परी अखाड़े की ओर से दायर की गई याचिका

Tue, 28 Jan 2025 11:15 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 28 Jan 2025 11:15 AM IST
सार

महाकुंभ में महिला संतों के लिए अलग अमृत स्नान की लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। परी अखाड़े की ओर से दायर याचिका में सवाल उठाए गए हैं कि पुरुषों के लिए 13 अखाड़े हैं तो महिलाओं के लिए एक भी क्यों नहीं ?

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Mahakumbh: The fight for women's nectar bath now comes to the court, petition filed by Pari Akhara
महिला अखाड़ा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ में महिला संतों के लिए अलग अमृत स्नान की लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। परी अखाड़े की ओर से दायर याचिका में सवाल उठाए गए हैं कि पुरुषों के लिए 13 अखाड़े हैं तो महिलाओं के लिए एक भी क्यों नहीं ? इससे पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर ही पहली बार प्रयागराज महाकुंभ में परी अखाड़े को भूमि आवंटित कर सुविधाएं दी गईं हैं, हालांकि हरिद्वार, नासिक और उज्जैन के कुंभ में उन्हें सरकारी सुविधाएं मिलीं थीं, लेकिन अमृत स्नान की अनुमति नहीं मिल सकी थी।

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महिला संत त्रिकाल भवंता ने 2013 के कुंभ में महिलाओं के लिए अलग अखाड़े की स्थापना की थी। इसके बाद से महिलाओं के लिए अलग से अमृत स्नान की व्यवस्था कराने की मांग उठ रही है, लेकिन 13 मान्यता प्राप्त अखाड़ों के विरोध से अभी तक परी अखाड़े को इसमें सफलता नहीं मिल सकी है। अब प्रयागराज महाकुंभ में एकबार फिर परी अखाड़ा इस मुद्दे को लेकर मुखर है। इस संबंध में हाल ही में परी अखाड़े से जुड़ीं महिला संतों ने निरंजनी अखाड़े के प्रमुख और आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि और जूना अखाड़े के मुख्य संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री स्वामी हरि गिरि से भी वार्ता की, लेकिन बात नहीं बनी।
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यही नहीं परी अखाड़े से जुड़ीं महिला संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। ऐसे में प्रयागराज महाकुंभ से पहले परी अखाड़े ने एकबार फिर अदालत की शरण ली है और इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो जनवरी को याचिका दायर कर महिलाओं के लिए अलग से शाही स्नान की व्यवस्था के संबंध में गुहार लगाई है। हाईकोर्ट का फैसला जो भी, लेकिन परी अखाड़े की मांग ने संत जगत में अब हलचल पैदा कर दी है।

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देश में तीन मतों के 13 अखाड़े हैं मान्यता प्राप्त

देश में मान्यता प्राप्त कुल 13 अखाड़े मान्यता हैं जो तीन मतों में बंटे हैं। इनमें शैव संन्यासी संप्रदाय के सबसे अधिक सात अखाड़े हैं। वहीं वैरागी और उदासीन संप्रदाय के तीन-तीन अखाड़े हैं। अखाड़ों में वर्चस्व की जंग के बाद 1954 में अखाड़ा परिषद का गठन किया गया था। कुंभ और महाकुंभ के आयोजनों में भी इन अखाड़ों की भूमिका अहम होती है। इन्हें सरकार की ओर से विशेष सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

हजारों महिला संत प्रयागराज महाकुंभ में करना चाहती हैं अलग स्नान : संत त्रिकाल भवंता

परी अखाड़े की संस्थापक संत त्रिकाल भवंता का कहना है कि अखाड़ों के विरोध के कारण अब तक उन्हें अमृत स्नान की अनुमति नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि न्यायालय पर हमें पूरा भरोसा है। पहले भी न्यायालय के आदेश पर ही उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में जगह उपलब्ध हो सकी है। एकबार फिर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने बताया कि परी अखाड़े से देश-विदेश की हजारों महिला संत जुड़ी हुईं हैं, जो इस बार प्रयागराज महाकुंभ में अलग अमृत स्नान करना चाहती हैं।

महिला संतों के लिए अलग अमृत स्नान का मुद्दा अस्तित्व की लड़ाई : जागृति चेतना गिरि

परी अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर जागृति चेतना गिरि का कहना है कि महिला संतों के लिए अलग अमृत स्नान का मुद्दा महिलाओं के अस्तित्व की लड़ाई है। इसके लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। कई बड़े संतों ने इस प्रस्ताव को अखाड़ा परिषद के समक्ष रखने और समर्थन का भरोसा दिलाया है। न्यायालय से भी जल्द सुनवाई की गुहार लगाई जाएगी, ताकि प्रयागराज महाकुंभ में महिला संतों को अमृत स्नान का अवसर मिल सके।


अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बोले- नए अखाड़े को नहीं मिल सकती मान्यता

महिलाओं के लिए अलग से अमृत स्नान की व्यवस्था कराने की मांग पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी का कहना है कि 13 अखाड़े हीं मान्यता प्राप्त हैं। सभी अखाड़ों में महिला संतों का सम्मान है। हर अखाड़े में बड़ी संख्या में महिला संत और महामंडलेश्वर भी शामिल हैं। किसी नए अखाड़े को परिषद की ओर से मान्यता नहीं दी जा सकती है।
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