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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh: Saints of the new Udasin Akhara came out wearing a python and a garland around their neck.

महाकुंभ : गले में अजगर और मुंडमाला धारण कर निकले नया उदासीन अखाड़े के संत

Fri, 10 Jan 2025 08:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 10 Jan 2025 08:37 PM IST
सार

उदासीन परंपरा के संतों का कारवां शुक्रवार को छावनी प्रवेश शोभायात्रा के रूप में निकला तो संगम से शहर की संकरी गलियों तक लोगों की आंखें ठहर सी गईं। शिव स्तुति और गुरुवाणी के पाठ के साथ महामंडलेश्वर, महंत और आचार्य रथों और बग्घियों पर सवार होकर निकले।

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Mahakumbh: Saints of the new Udasin Akhara came out wearing a python and a garland around their neck.
उदासीन अखाड़े के संतों ने किया छावनी प्रवेश। निकाली झांकियां। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उदासीन परंपरा के संतों का कारवां शुक्रवार को छावनी प्रवेश शोभायात्रा के रूप में निकला तो संगम से शहर की संकरी गलियों तक लोगों की आंखें ठहर सी गईं। शिव स्तुति और गुरुवाणी के पाठ के साथ महामंडलेश्वर, महंत और आचार्य रथों और बग्घियों पर सवार होकर निकले। शिव के वेश में गले में नागों की माला धारण करने वाले बाबाओं की झलक पाने के लिए जगह-जगह भीड़ उमड़ती रही।

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छावनी प्रवेश शोभायात्रा दिन के 11 बजे मुट्ठीगंज स्थित मुंशीराम की बगिया से निकली। शोभायात्रा में सबसे पहले ध्वजा-निशान लेकर संत चल रहे थे। छावनी प्रवेश में सैकड़ों साधु-संत शिव आराधना के साथ गुरुवाणी का पाठ करते हुए चल रहे थे। मुंशीराम बगिया से आगे शोभायात्रा के पहुंचने पर साधु-संतों पर फूलों की वर्षा की जाने लगी। सबसे आगे अखाड़े के सचिव जगतार मुनि, आकाश मुनि समेत कई संत रथों पर सवार होकर चल रहे थे। रास्ते भर पुष्पवर्षा से उनका स्वागत किया जाता रहा। श्रद्धालुओं ने साधुओं के साथ सेल्फी लेकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

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इस अखाड़े का गठन 1913 में हुआ था। बड़ा उदासीन अखाड़े से वैचारिक मतभेद होने के बाद संतों ने एक नए अखाड़े की स्थापना की, जिसे श्रीपंचायती नया उदासीन अखाड़ा नाम दिया गया। पौष पूर्णिमा से आरंभ होने वाले महाकुंभ मेले में जहां लगभग 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, वहीं नया उदासीन अखाड़ा के संत अपने तप और साधना से संगम की रेती पर महीने भर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेंगे। संत संगम की रेती पर शिविरों में प्रवास कर ध्यान, साधना और धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहेंगे।

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