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महाकुंभ हादसा : धीरेंद्र शास्त्री के बचाव में उतरे श्री श्री, कहा - संतों के शब्दों पर नहीं भावनाओं को समझें

Sun, 02 Feb 2025 10:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 02 Feb 2025 10:43 PM IST
सार

अमर उजाला से बातचीत करते हुए श्री श्री ने कहा कि महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। यह पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है। पूरा देश एक साथ अपनी संस्कृतियों के साथ यहां पर पहुुंचा है।

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Mahakumbh Incident: Sri Sri came to the defense of Dhirendra Shastri, said - understand the feelings
श्री श्री रविशंकर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने मौनी अमावस्या पर हुए हादसे में मारे जाने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे बाबा बागेश्वर धाम सरकार के महंत आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री श्री रविशंकर ने कहा कि संतों की भावनाओं को समझें, उनके शब्दों पर न जाएं। धीरेंद्र युवा संत हैं। संत किसी का अहित नहीं चाहता। संत कभी असंवेदनशील नहीं होता है। उसके दिल में सबके लिए एक समान करुणा और स्नेह होता है। जिन लोगों ने अपनों को खोया है उनके साथ पूरा देश खड़ा है। वह जल्द से जल्द सदमे में उबरें ऐसी हमारी प्रार्थना ईश्वर से है।

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अमर उजाला से बातचीत करते हुए श्री श्री ने कहा कि महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। यह पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है। पूरा देश एक साथ अपनी संस्कृतियों के साथ यहां पर पहुुंचा है। विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। यह सनातन धर्म की शक्ति है। सरकार ने इसकी तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। संगम तट पर मौनी अमावस्या की घटना के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं है। 
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साधना, सेवा और सत्संग का संगम 

श्री श्री ने कहा कि महाकुंभ में इतने सारे संप्रदाय हैं, सब अपने तरीके से भजन, कीर्तन और पूजन कर रहे हैं। कोई किसी को रोक-टोक नहीं रहा है न ही कोई किसी पर कोई दबाव बना रहा है। पूरे विश्व के लिए यह महाकुंभ एक संदेश है। पूरे भारत के लोग यहां अनेकता में एकता का संदेश दे रहे हैं। विश्व के कई देश आज धर्म को लेकर आपस में लड़ रहे हैं और एक दूसरे को खत्म करने पर आमादा हैं। ऐसे लोगों को महाकुंभ से सीख लेनी चाहिए।

महाकुंभ में सिर्फ तीन नदियों का ही संगम नहीं है, बल्कि यहां पर साधना, सेवा और संत्संग का भी संगम है। इतने सारे संप्रदाय एक जगह अपने हिसाब से सत्संग कर रहे हैं। कोई किसी पर पत्थर नहीं फेंक रहा है। यहां सहिष्णुता का संगम है। यहां हम सभी संप्रदायों का आदर कर रहे हैं।

ज्ञान, भक्ति और कर्म त्रिवेणी बह रही

श्री श्री रविशंकर ने कहा कि महाकुंभ में ज्ञान, भक्त और कर्म की त्रिवेणी बह रही है। ज्ञान गंगा, भक्ति यमुना और ध्यान सरस्वती का प्रतीक हैं। संगम नोज पर हादसे का जिम्मेदार कौन है इसकी जांच की जा रही है। पूरी देशकी जनता एक साथ है। पीड़ितों का दर्द पूरे देशका दर्द है। हम प्रार्थना करेंगे कि आपके मन को शांति मिले। बहुत बड़ा आघात लगा है। आपने खोया। देसका हर व्यक्ति दुखी है। संगम में ही स्नान करें जरूरी नहीं है। जहां गंगा या यमुना दिख रही हैं वहीं स्नान करें। मां मेला क्षेत्र में स्नान करना ही पुण्य है। सनातन बोर्ड के बारे में कहा कि धर्म संसद में गया नहीं इसलिए मुझे कुछ पता नहीं है।

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