Prayagraj : विवादों में घिरी महाकुंभ की फसाड लाइटिंग योजना, शासन तक पहुंचा मामला
फसाड लाइटिंग का काम इलेक्ट्रिकल है, लेकिन इसे कराने की जिम्मेदारी भवन निर्माण की विशेषज्ञता रखने वाली कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को दे दी गई है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत से की गई है।
विस्तार
महाकुंभ को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की योजना के तहत पर्यटन विभाग की फसाड लाइटिंग योजना विवादों में घिर गई है। प्रस्तावित काम के लिए पिछले कुंभ की तुलना में दो गुना अधिक बजट तो बढ़ाया ही गया है, टेंडर के नियमों में बड़ा खेल किया गया है।
फसाड लाइटिंग का काम इलेक्ट्रिकल है, लेकिन इसे कराने की जिम्मेदारी भवन निर्माण की विशेषज्ञता रखने वाली कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को दे दी गई है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत से की गई है।
उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन ने इसके लिए 30 सितंबर को टेंडर कराया। इसे 16 अक्तूबर को खोला जाना था, लेकिन 19 अक्तूबर को टेंडर खोला गया तो इसमें सिर्फ एक ही फर्म ने हिस्सा लिया था। इसके बाद दोबारा 24 अक्तूबर को इसके लिए निविदा की तिथि 29 अक्तूबर तय की गई। 29 अक्तूबर को सिर्फ दो फर्मों ने टेंडर डाला।
इसमें शिवम इंटर प्राइजेज और यूनिवर्सल इंटर प्राइजेज ने भाग लिया। 8.38 करोड़, 81 हजार, 138 रुपये में यह टेंडर शिवम इंटर प्राइजेज को दिया गया। इस मामले में दिल्ली के मधु विहार की कंपनी वालोआ टेक्नालॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अंशुल नासा की ओर से सीएम और मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में नैनी यमुना सेतु पर महाकुंभ के तहत कराई जाने वाली फसाड लाइटिंग के टेंडर में हर कदम पर खामियां गिनाई गई हैं।
कहा गया है कि निविदा में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के मानकों का खुलकर उल्लंघन किया गया है। आरोप है कि प्रोजेक्ट कारपोरेशन ने टेंडर की शर्तों में खेलकर इसे सिविल श्रेणी का काम बना दिया। इससे सिविल श्रेणी के ठेकेदारों को इस निविदा में हिस्सा लेने की छूट दे दी गई।
10 करोड़ रुपये तक के काम के लिए इस निविदा में 20 करोड़ रुपये तक का टर्न ओवर अनिवार्य कर दिया गया। साथ ही सबसे गंभीर आरोप यह है कि विज ऑफ क्वालिटी एक विशेष कंपनी के पक्ष में बनाई गई, ताकि दूसरी कंपनियां इसमें प्रतिभाग न कर सकें। इस टेंडर में 150 वाट फिटिंग क्षमता की लाइटें लगाने की बात कही गई है।
फसाड लाइटिंग के टेंडर को ओपेन फॉर ऑल किया गया था। जो फर्में नियम और शर्तों को पूरा नहीं कर पाईं, वह प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई हैं और अब आरोप लगा रही हैं। रही बात बजट की तो इस बजट का निर्धारण मेरे कार्यभार ग्रहण करने के पहले ही तय किया जा चुका था। - सुरेश यादव, महाप्रबंधक- उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन।
10 लाख रुपये महीना नैनी सेतु की फसाड लाइटिंग का बिल आने का अनुमान
नैनी पुल पर फसाड लाइटिंग पर्यटन विभाग या इसका रखरखाव करने वाली संस्था के लिए भारी पड़ सकता है। पिछले कुंभ में इस सेतु पर कराई गई फसाड लाइटिंग का भार 32 किलोवाट था। इस बार यह बढ़कर 150 किलोवाट तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस फसाड लाइटिंग का महीने का बिल ही 10 लाख रुपये तक आने का अनुमान है। ऐसे में बिल की रकम किस मद से दी जाएगी, इसे लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
टेंडर के बाद भी नहीं शुरू हो सका काम
शहर में सात और स्थानों पर फसाड लाइटिंग कराई जानी है। इसमें से ज्यादातर स्थानों का टेंडर छह महीने पहले होने के बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। इसमें अभी तक सिर्फ बड़े हनुमान मंदिर पर ही फसाड लाइटिंग कराई जा सकी है। जबकि ओडी फोर्ट, अलोपीदेवी मंदिर, नाग वासुकि, शंकर विमान मंडपम, शृंग्वेरपुर धाम और शास्त्री सेतु पर अभी तक फसाड लाइटिंग का काम शुरू नहीं हो सका है।