Mahakumbh 2025: कुंभ की गलियों में गूगल भी रास्ता भूला, सेक्टर का गणित समझिए ताकि न हो परेशानी
एक हाथ में मोबाइल और सवाल..भैया ये रास्ता कहां जाता है? भैया स्नान के लिए जाना है, कहां से जाएं? जब आप महाकुंभ की गलियों में चलते हैं तो इन दो सवालों को सामना आपको बहुत ज्यादा करना पड़ रहा है। इसी को लेकर मन में विचार आया कि क्यों न ये देखा जाए कि गूगल मैप लोगों की कैसे और किस हद तक मदद कर रहा है...
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मौनी अमावस्या के स्नान की तारीख करीब है और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में पुलिस प्रशासन प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या में बदलाव के आधार पर मार्ग को खोलने और बंद करने का काम कर रहा है। इससे हो यह रहा है कि जिन लागों को जानकारी नहीं है वो गूगल मैप का प्रयोग कर रहे हैं और रास्तों के जाल में उलझ जा रहे हैं। इसके साथ ही उन लोगों को भी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है जो लोग पांटून पुल पर होते हैं। वहां से लोकेशन में मैप का प्रयोग करने पर कई बार दिखाता है कि आप नदी में है।
मैप खोलने के बाद भी सुरक्षाकर्मियों से मदद लेनी पड़ी
ऐसा ही एक अनुभव त्रिवेणी संकुल, मेला सर्किट हाउस को लेकर हुआ। रास्ता जहां का गूगल मैप में आ रहा था उससे आधा किलोमीटर पहले दूसरी दिशा में यह स्थित था। मैप खोलने के बाद भी हमें वहां पहुंचने के लिए सुरक्षाकर्मियों की सहायता लेनी पड़ी।
इतना ही नहीं इस बार 2750 AI आधारित सीसीटीवी कैमरों का प्रयोग किया गया है। इन कैमरों के माध्यम से पुलिस को इस बात की भी जानकारी लग जाती है कि किस ओर भीड़ ज्यादा है और यह पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं। जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। लेकिन इन सब के बीच में एक आम श्रद्धालुओं को काफी परेशान हो रही है। कई बार गूगल मैप भी सही राहों की जानकारी नहीं दे पा रहा है। इस वजह से कई किलोमीटर पैदल चलने वालों को एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। गूगन ने पहली बार किसी अस्थायी नगर के लिए नेविगेशन सुविधा देने का निर्णय लिया है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्कता है। यह सुविधा 4000 हेक्टेयर में फैले महाकुंभ मेले में उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक करीब 9 करोड़ लोग महाकुंभ में स्नान का लाभ उठा चुके हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि मौनी अमावस्या पर 8 से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में रास्तों की सही जानकारी लोगों को काफी परेशानियों से बचा सकती है। अभी जो व्यवस्था लागू है उसके अनुसार संगम मेला क्षेत्र के लिए जवाहरलाल नेहरू मार्ग (जिसे काली सड़क के नाम से जाना जाता है) का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं निकास के लिए त्रिवेणी मार्ग का प्रयोग किया जा रहा है।
सेक्टर 1, 2- परेड ग्राउंड में
सेक्टर 3- हनुमान मंदिर के पास संगम क्षेत्र
सेक्टर 4- शास्त्री ब्रिज के नीचे दारागंज की ओर
सेक्टर 11 से 20- गंगा पार झूंसी के इलाके में
सेक्टर 18 और 19- में सभी अखाड़े बसाए गए हैं
सेक्टर 5- गंगा नदी के पार झूंसी के इलाके में ( शंकराचार्य का शिविर)
सेक्टर 6 से 10 - नागवासुकी मंदिर से शिवकुटी कछार में।
सेक्टर 8- में श्री श्री रविशंकर जी का शिविर
सेक्टर 9- सलोरी में लगे हुए गंगेश्वर महादेव के पास गंगा के कछार में
सेक्टर 10- शिवकुटी के पास कोटेश्वर महादेव मंदिर के नजदीक आखिरी
सेक्टर 22- झूंसी के छतनाग में गंगा नदी के किनारे-किनारे नागेश्वर मंदिर तक आखिरी सेक्टर
सेक्टर 23, 24 और 25 पुराने नैनी पुल से अरैल का कछार इलाका सोमेश्वर महादेव से आगे तक
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