फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Maha Kumbh 2025 Peace of mind through yoga meditation and satsang on shore of Ganges

MahaKumbh 2025: आस्था की बयार, पग-पग जय जयकार... गंगा किनारे योग, ध्यान और सत्संग से आत्मशांति

Tue, 14 Jan 2025 11:40 AM IST
शाहरुख खान नीरज मिश्रा, अमर उजाला, प्रयागराज
नीरज मिश्रा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 14 Jan 2025 11:40 AM IST
सार

मेले में आए विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के विभिन्न देशों से आए श्रद्धालु भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता से अभिभूत हो रहे हैं। 

विज्ञापन
Maha Kumbh 2025 Peace of mind through yoga meditation and satsang on shore of Ganges
Maha Kumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

144 वर्षों की प्रतीक्षा, अनन्य आस्था, अगाध भक्ति, हर्ष-उमंग और भावनाओं के उमड़ते ज्वार के बीच महाकुंभ लाखों श्रद्धालुओं के जप-तप और पुण्य-मोक्ष का मार्ग बनने के साथ ही एकता के सूत्र में पिरोने वाला माध्यम बन गया। 
विज्ञापन


मानवता के इस अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का साक्षी बनने, पुण्यों को साकार करने और मानव सभ्यता के सबसे बड़े विलक्षण क्षण का साक्षी बनने की होड़ नजर आई। सियाराम जय राम, जय जय राम। गंगा मैया की जय। बोलो बजरंग बली की जय। 
विज्ञापन


ऐसे जयकारे महाकुंभ के मेला क्षेत्र में हर तरफ गूंज रहे हैं। अपनी आस्था के अनुसार जय-जयकार कर रहे हैं। कहीं साधुओं की टोली ढोलक की थाप पर रामधुन गा रही है, तो कहीं मंजीरे के साथ साधुओं की टोली भजन सुना रही है। लोग इन्हें अपनी आस्था के अनुसार दान भी कर रहे थे। संगम के तट पर सजे महाकुंभ में आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अद्वितीय संगम दिख रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विदेशियों की भागीदारी भी विशेष
मेले में आए विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के विभिन्न देशों से आए श्रद्धालु भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता से अभिभूत हो रहे हैं। गंगा किनारे योग, ध्यान और सत्संग में शामिल होकर वे अपने में आत्मशांति महसूस कर रहे हैं।

महाकुंभ में केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हो रहा है। नृत्य, संगीत, नाटक और कला प्रदर्शनियां महाकुंभ को और भी खूबसूरत बना रही हैं। गंगा आरती भी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है।

अमेरिका के फौजी माइकल बन गए बाबा मोक्षपुरी
महाकुंभ ने भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के संतों और आध्यात्मिक गुरुओं के साथ ही अन्य लोगों को भी आकर्षित किया है। इनमें से एक नाम है अमेरिका के न्यू मैक्सिको में जन्मे और कभी अमेरिकी सैनिक रहे माइकल का। माइकल अब बाबा मोक्षपुरी बन गए हैं। बेटे की मौत ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। 
 

उन्होंने बंदूक थामने वाले हाथों में कमंडल धारण कर लिया। आज वे जूना अखाड़े से जुड़े हैं और अपना पूरा जीवन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर चुके हैं। त्रिवेणी के संगम पर कल्पवास कर रहे बाबा मोक्षपुरी ने कहा, मैं भी कभी साधारण व्यक्ति था।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed