फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh 2025 Digambar Ani Akhara Holds Elections After 550 Years Forms New Executive Body

Mahakumbh 2025: 550 साल बाद दिगंबर अनि अखाड़े में हुए चुनाव... पहली बार चुनी नई कार्यकारिणी; अब कार्यकाल तय

Thu, 06 Feb 2025 10:55 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 06 Feb 2025 10:55 AM IST
सार

Mahakumbh Mela: दिगंबर अनि अखाड़े में 550 साल बाद चुनाव हुए। अखाड़े ने पहली बार नई कार्यकारिणी चुनी। पदाधिकारियों का कार्यकाल तय हो गया है। 

विज्ञापन
Mahakumbh 2025 Digambar Ani Akhara Holds Elections After 550 Years Forms New Executive Body
अखाड़े ने पहली बार नई कार्यकारिणी चुनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Kumbh mela: महाकुंभ के दौरान वैष्णवों के सबसे बड़े दिगंबर अनि अखाड़े ने करीब 550 साल पुरानी परंपरा को छोड़कर लोकतांत्रिक ढांचे की ओर कदम बढ़ाया है। अनि अखाड़े में भी अब न सिर्फ सभी पदों के लिए चुनाव होगा बल्कि उनका कार्यकाल भी 12 साल के लिए तय कर दिया।
विज्ञापन


अब तक अखाड़े के पदाधिकारियों का कोई कार्यकाल तय नहीं रहता था। अखाड़े के अध्यक्ष, महामंत्री समेत अन्य पदाधिकारी आजीवन इस पद पर बने रहते थे। 

अखिल भारतीय श्रीपंच दिगंबर अनि अखाड़े को छोड़कर अनि निर्वाणी एवं निर्मोही अखाड़े में व्यवस्था संचालन के लिए हर 12 साल में पदाधिकारियों का चुनाव होता है, लेकिन दिगंबर अनि अखाड़ा में यह व्यवस्था लागू नहीं थी। 
विज्ञापन


अखाड़े के पदाधिकारी आजीवन पद पर बने रहते थे। उनके निधन या किसी अन्य वजह से स्थान खाली होने पर ही नए सदस्य को कार्यकारिणी में जगह मिलती थी। करीब 550 साल से अखाड़े में यही परंपरा काम कर रही थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत माधव दास मौनी बाबा बताते हैं कि अखाड़े ने पहली बार सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल 12 साल के लिए तय करते हुए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, दो मंत्री, कोषाध्यक्ष समेत महंत पद के लिए चुनाव कराए गए। 

 

इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष वैष्णव दास (अयोध्या), महामंत्री बलराम दास (उज्जैन), मंत्री जानकी दास (फरीदाबाद) पुजारी सीताराम दास (छत्तीसगढ़) बनाए गए। आम सहमति से इनका चुनाव हुआ। अब अगले 12 साल तक यह पदाधिकारी अखाड़े की बागडोर संभालेंगे। अगले प्रयागराज कुंभ के दौरान फिर से चुनाव होगा।

अखाड़े की अनूठी परंपरा
अखाड़ा पदाधिकारियों के मुताबिक वर्ष 1475 में दिगंबर अनि अखाड़े की स्थापना स्वामी बालानंदाचार्य ने की थी। अखाड़े की धर्मध्वजा में पांच रंग (लाल, पीला हरा, सफेद एवं काला) अलग-अलग समूहों को स्थान देने के लिए शामिल किए गए। साधु-महंत राम एवं कृष्ण की उपासना करते हैं। अखाड़े के ईष्टदेव हनुमानजी महाराज हैं। संत सफेद वस्त्र धारण करने के साथ ही त्रिपुंड लगाते हैं।

 

अखाड़े के पास अरबों की संपत्ति

दिगंबर अनि अखाड़ा अन्य दोनों अनि अखाड़ों के मुकाबले सबसे बड़ा माना जाता है। अखाड़े की देश में छह बैठक-अयोध्या, पुरी, नासिक, चित्रकूट, उज्जैन एवं वृंदावन में है। अखाड़ा के पदाधिकारियों का कहना है कि देश में इससे जुड़े लाखों साधु-महात्मा हैं। अखाड़ों से जुड़े श्रद्धालुओं की संख्या भी करोड़ों में है। अखाड़े के नियंत्रण में देश के तमाम मठ-मंदिर हैं। खेती योग्य जमीन के साथ अरबों की संपत्ति है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed