फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Maha kumbh 2025 Divine Kumbh Establishment of separate shrines in the Akharas of Naga ascetics

Maha kumbh: शक्तिपीठों के आधार पर अखाड़ों में नागा संन्यासियों की मढ़ियां, हर मढ़ी के होते हैं श्रीमहंत

Tue, 24 Dec 2024 02:26 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 24 Dec 2024 02:26 PM IST
सार

शक्तिपीठों के आधार पर अखाड़ों में नागा संन्यासियों की मढ़ियां होती हैं। तिब्बत में लामा मढ़ी को लेकर 52 मढ़ियों के रूप में नागाओं के शक्ति केंद्र हैं।

विज्ञापन
Maha kumbh 2025 Divine Kumbh Establishment of separate shrines in the Akharas of Naga ascetics
नागा साधु - फोटो : ANI

विस्तार

सनातन संस्कृति का सुंदर-सलोना स्वरूप देखना हो तो नागा संन्यासियों की दुनिया देखिए। बाहर से इनका दिगंबर वेश जहां लोगों को असहज करता है तो भीतर से इनकी मढि़यां शक्ति केंद्रों के रूप में काम करती हैं।
विज्ञापन


दशनामी परंपरा के नागा संन्यासियों के अखाड़ों में अलग-अलग मढि़यों की स्थापना की गई हैं। इन मढि़यों के मायने भी सनातन परंपरा में ऊंचे मानकों पर स्थापित हैं। हर मढ़ी के श्रीमहंत होते हैं। 
विज्ञापन


दूधेश्वर नाथ मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़े के प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि बताते हैं आदि शंकराचार्य के सनातन धर्म के संदेशों को प्रचारित करने के लिए प्राचीन काल में मठों के रूप में केंद्र स्थापित किए गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन केंद्रों को मठिका कहा जाता था। बाद में मठिका का यही रूप परिवर्तित होकर मढ़ी के रूप में प्रचलित हो गया। आवाहन अखाड़े के पूर्व सचिव श्रीमहंत समुद्र गिरि के अनुसार अखाड़ों की मढ़ियां ही आंतरिक ढांचे में शक्ति केंद्र के रूप में मानी जाती हैं। इन मढि़यों की स्थापना देश भर में 51 देवी शक्तिपीठों के रूप में की गई है।
 
Trending Videos

इन मढ़ियों को देवी की मढ़ी भी कहा जाता रहा है। महंत समुद्र गिरि बताते हैं कि कई देवी मंदिरों को भी मढ़ी के रूप में जाना जाता है। दशनामी परंपरा के नागा संन्यासियों में पर्वत, सागर, वन, भारती, पुरी, गिरि, सरस्वतियों के अलावा सभी संन्यासियों की कोई न कोई मढ़ी जरूर होती है।

 

मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर रहते थे। आदि शक्ति माता पार्वती की उपस्थिति मानकर पद्म संभव संन्यासियों ने तिब्बत में एक केंद्र स्थापित किया। इसे लामा मढ़ी के नाम से जाना जाता है।
 

इस तरह नागा संन्यासियों की 52 मढि़यों में 27 मढि़यां गिरि पद धारियों की, 17 मढि़यां पुरी पद धारण करने वाले नागाओं की और चार-चार मढि़यां भारती, वन पद धारियों की और एक मढ़ी लामाओं की ओर से स्थापित की गई है। तीर्थों, आश्रमों, अरण्यों की भी मढि़यां शक्ति केंद्रों के रूप में काम कर रही हैं।

दशनामी संन्यासी परंपरा आदि शंकराचार्य की देन
आचार्य परंपरा आदि गुरु शंकराचार्य की देन मानी जाती है। तीर्थ और आश्रम हों या गिरि, पुरी, अरण्य, वन, सरस्वती, भारती संन्यासियों का यह नामकरण शंकराचार्य की आतार्य परंपरा से आरंभ हुआ है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed