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मैग्सेसे अवार्डी संदीप पांडेय की बर्खास्तगी रद

Sat, 23 Apr 2016 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 23 Apr 2016 02:41 AM IST
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Magsaysay Awardee Sandeep Pandey's dismissal annulled
बीएचयू
आईआईटी बीएचयू के विजिटिंग प्रोफेसर और मैग्सेसे अवार्ड विजेता संदीप पांडेय की बर्खास्तगी हाईकोर्ट ने रद कर दी है। उनको सभी परिणामी लाभों के साथ बहाल करने का बीएचयू को निर्देश दिया है। संदीप पांडेय को बीएचयू प्रशासन ने कैंपस में राष्ट्रविरोध गतिविधियों और एक विशेष विचारधारा का प्रचार प्रसार करने के आरोप में उनकी संविदा समाप्त करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया था। संदीप पांडेय ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनकी याचिका पर जस्टिस वीके शुक्ल और जस्टिस एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की।
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कोर्ट ने बीएचयू प्रशासन की कार्रवाई को नैसर्गिंग न्याय के विपरीत करार देते हुए रद कर दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि लोकतंत्र के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखना आश्वयक है, मगर जब कोई लोक सेवा में है तो उसे यह भी ध्यान रखना होगा कि विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्था द्वारा बनाए गए नियम-कानून को न तोड़ा जाए। बीएचयू ने भी परिसर में शैक्षणिक वातावरण की शुचिता को बनाए रखने के लिए ऐसे नियम-कानून बनाए गए हैं और इनको तोड़ना कदाचरण माना जाएगा।
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संदीप पांडेय ने याचिका दाखिल कर छह जनवरी 2016 के बर्खास्तगी आदेश और 21 दिसंबर 2015 को हुई मीटिंग में लिए निर्णय को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि याची आईआईटी बीएचयू का पुराछात्र रहा है। पूर्व में वह आईआईटी कानपुर में पढ़ाता था। वर्ष 12-13 के सत्र से उसने आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में पढ़ाना शुरू किया।
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बीएचयू के कुलपति और आईआईटी के बोर्ड ऑफ गर्वनेंस के चेयरमैन को राजनीतिशास्त्र के छात्र अविनाश कुमार पांडेय का 15 अक्तूबर 2015 का पत्र मिला, जिसमें याची पर परिसर में राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने, धरना प्रदर्शन में शामिल होने और नक्सली विचाधारा का समर्थक होने का आरोप लगाया गया। इस पत्र के आधार पर बीएचयू प्रशासन ने संदीप पांडेय की संबद्धता समाप्त कर दी। संदीप पांडेय का कहना था कि बीएचयू प्रशासन के इस निर्णय से उसे मानसिक सदमा लगा है और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। 
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