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माघ मेले में धड़ल्ले से पालीथिन का इस्तेमाल
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Jan 2015 01:50 AM IST
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने शहर में पॉलीथिन की बिक्री और इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश माघ मेला क्षेत्र भी लागू होता है। पिछले वर्ष माघ मेला और उसके पहले महाकुंभ के दौरान मेला क्षेत्र में इसका कड़ाई से पालन भी हुआ लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। मेला प्रशासन और नगर निगम इसे लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। नतीजा है कि मेले की हर छोटी-बड़ी दुकानों पर पालीथिन का प्रयोग बिना रोक टोक हो रहा है।
मेला क्षेत्र में चाय की दुकानों में ग्राहकों को प्लास्टिक और थर्माकोल के गिलासों में चाय दी रही है। सब्जी, फल सहित खाने-पीने के अन्य सामान भी दुकानों पर पॉलीथिन में ही दिए जा रहे हैं। कल्पवासी और श्रद्धालु इस्तेमाल के बाद पॉलीथिन को मेले क्षेत्र में ही इधर-उधर फेंक दे रहे हैं। सब कुछ जानते समझते हुए भी मेला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। आधा माघ मेला बीतने को हैं लेकिन अभी तक माघ मेला क्षेत्र में एक बार भी पॉलीथिन के खिलाफ अभियान नहीं चलाया गया है।
पिछले दो वर्षों तक पालीथिन के प्रयोग को रोकने के लिए सबसे ज्यादा हो हल्ला करने वाले सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी मेला क्षेत्र में पॉलीथिन के खिलाफ लोगों को जागरूक करने नहीं पहुंचे। महाकुंभ-2013 में संगम क्षेत्र में पालीथिन का प्रयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए थे। उस दौरान लगातार छापेमारी होती थी। मेला के साथ आसपास के इलाकों दारागंज, सोहबतिाबाग, अलोपीबाग, बाई का बाग, अल्लापुर, बैरहना आदि में भी दुकानों से पॉलीथिन जब्त की गई। उस दौरान कुल्हड़ और कागज के थैलों का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया। इससे मेला क्षेत्र में काफी हद तक पालीथिन का प्रयोग कम हुआ। इससे मेला क्षेत्र में प्रदूषण कम होने के साथ कुम्हारों और कागज के थैले बनाने वालों को रोजगार कई गुना बढ़ गया। पिछले माघ मेले में भी काफी हद तक पालीथिन के प्रयोग को रोका गया था। मेला क्षेत्र में दुकानें लगाने वालों के दिलों में भी यह डर था कि पॉलीथिन का प्रयोग करने पर उन्हें जुर्माना देना होगा। हाईकोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर धड़ल्ले से पालीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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मेला क्षेत्र में चाय की दुकानों में ग्राहकों को प्लास्टिक और थर्माकोल के गिलासों में चाय दी रही है। सब्जी, फल सहित खाने-पीने के अन्य सामान भी दुकानों पर पॉलीथिन में ही दिए जा रहे हैं। कल्पवासी और श्रद्धालु इस्तेमाल के बाद पॉलीथिन को मेले क्षेत्र में ही इधर-उधर फेंक दे रहे हैं। सब कुछ जानते समझते हुए भी मेला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। आधा माघ मेला बीतने को हैं लेकिन अभी तक माघ मेला क्षेत्र में एक बार भी पॉलीथिन के खिलाफ अभियान नहीं चलाया गया है।
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पिछले दो वर्षों तक पालीथिन के प्रयोग को रोकने के लिए सबसे ज्यादा हो हल्ला करने वाले सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी मेला क्षेत्र में पॉलीथिन के खिलाफ लोगों को जागरूक करने नहीं पहुंचे। महाकुंभ-2013 में संगम क्षेत्र में पालीथिन का प्रयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए थे। उस दौरान लगातार छापेमारी होती थी। मेला के साथ आसपास के इलाकों दारागंज, सोहबतिाबाग, अलोपीबाग, बाई का बाग, अल्लापुर, बैरहना आदि में भी दुकानों से पॉलीथिन जब्त की गई। उस दौरान कुल्हड़ और कागज के थैलों का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया। इससे मेला क्षेत्र में काफी हद तक पालीथिन का प्रयोग कम हुआ। इससे मेला क्षेत्र में प्रदूषण कम होने के साथ कुम्हारों और कागज के थैले बनाने वालों को रोजगार कई गुना बढ़ गया। पिछले माघ मेले में भी काफी हद तक पालीथिन के प्रयोग को रोका गया था। मेला क्षेत्र में दुकानें लगाने वालों के दिलों में भी यह डर था कि पॉलीथिन का प्रयोग करने पर उन्हें जुर्माना देना होगा। हाईकोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर धड़ल्ले से पालीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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