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Magh Mela : मेले में बाइक से श्रद्धालुओं की नि:शुल्क सेवा कर रहे सिद्धार्थ, बदले में बोलवाते हैं जय जय सीताराम

Sun, 18 Jan 2026 02:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 18 Jan 2026 02:53 PM IST
सार

Prayagraj Mafg Mela : करछना के डीहा गांव के रहने वाले सिद्धार्थ द्विवेदी मौनी अमावस्या पर अपनी बाइक से श्रद्धालुओं की नि:शुल्क सेवा कर रहे हैं। वह अपने पैसे से पेट्रोल भरवाकर त्रिवेणी मार्ग से संगम घाट तक वृद्ध, असहायक और लाचार लोगों को पहुंचा रहे हैं। एक तरह बाइकर्स और सगड़ी वाले मनमानी वसूली कर रहे हैं वह दिल्ली में प्राइवेट जॉब करने वाले सिद्धार्थ श्रद्धालुओं की सेवा करने के लिए छुट्टी लेकर घर आए हैं। 

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Magh Mela: Siddhartha bikes to devotees for free at the fair, earning them chants of Jai Jai Sitaram"in retu
माघ मेले में श्रद्धालुओं की बाइक से नि:शुल्क सेवा करने वाले सिद्धार्थ द्विवेदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघ मेले में एक ओर जहां तमाम पेशेवर बाइकर्स देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाकर धन उगाही कर रहे हैं वही एक ऐसे शख्स भी मेले में मिले जो अपनी बाइक से श्रद्धालुओं की नि:शुल्क सेवा कर रहे हैं। करछना इलाके के डीहा गांव निवासी सिद्धार्थ दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते थे। माघ मेले में वह कंपनी से छुट्टी लेकर श्रद्धालुओं की सेवा करने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने अपनी बाइक पर बाकायदा पोस्टर लगाया है कि नि:शुल्क मोटर साइकिल सेवा। जय जय सीताराम
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सिद्धार्थ परेड मैदान में काली मार्ग पर बाइक लेकर खड़े रहते हैं। मेले में जाने वाले बुजुर्ग, असहाय और लाचार लोगों को बैठाकर संगम घाट तक पहुंचाते हैं। कभी कभी पुलिस वाले उन्हें जहां रोक देते हैं वहीं श्रद्धालु को छोड़कर फिर त्रिवेणी रोड पर काली मार्ग तिराहे पर खड़े हो जाते हैं। मेले में तैनात पुलिस कर्मी भी उन्हें पहचानने लगे हैं और किसी असहाय और लाचार या वृद्ध को देखते हैं तो उनके पास भेज देते हैं। सिद्धार्थ उसको अपने वाहन पर बैठाते हैं और संगम पर छोड़कर आते हैं। बदले में वह श्रद्धालुओं से जय जय सीताराम कहने का आग्रह करते हैं और श्रद्धालु रास्ते भर जय जय सीताराम का जाप करते हुए चलते हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में  सिद्धार्थ कहते हैं कि पैसे की कोई चिंता नहीं है। वह किसी से एक रुपया नहीं लेते हैं। 400 से 500 रुपये का पेट्रोल अपने जेब से गाड़ी में डलवाते हैं और हर स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए चले आते हैं। वह कहते हैं कि इसकी प्रेरणा उन्हें अपनी पत्नी से मिली। पिछले महाकुंभ में जब वह स्नान करने आ रहे थे पत्नी ने कहा कि मेले में सेवा करने से पाप कटता है। इसके बाद उन्होने अपनी बाइक से लोगों की सेवा शुरू कर दी। मौनी अमावस्या पर दोपहर एक बजे तक 100 से अधिक लोगों को संगम स्नान घाट तक पहुंचा चुके थे। बातचीत के दौरान ही एक वृद्ध दंपती आ गए और सिद्धार्थ उन्हें बैठाकर मुस्कराते हुए संगम की ओर रवाना हो गए। 
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