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माघ मेला : फिर मिलने का वादा कर रेती से विदा हुए कल्पवासी, दिन भर रेती पर गूंजते रहे भजन-प्रवचन

Mon, 06 Feb 2023 12:21 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 Feb 2023 12:21 AM IST
सार

माघी पूर्णिमा पर आखिरी डुबकी के साथ ही संगम की रेती पर मास पर्यंत अनुष्ठान पूरे हो गए। छोलदारियों, स्विस कॉटेजों के द्वार पर कनकनाते तुलसी के बिरवा और लहलहाते जौ के चौरा में कठिन तपस्या के भावों को प्रगट किया जाता रहा।

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Magh Mela Kalpavasi left the sand after promising to meet again
Magh Mela 2023 : एक माह की साधना के बाद विदा होते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघी पूर्णिमा पर आखिरी डुबकी के साथ ही संगम की रेती पर मास पर्यंत अनुष्ठान पूरे हो गए। छोलदारियों, स्विस कॉटेजों के द्वार पर कनकनाते तुलसी के बिरवा और लहलहाते जौ के चौरा में कठिन तपस्या के भावों को प्रगट किया जाता रहा। कोई अपनी तुलसी महारानी का बखान करता रहा तो कोई समृद्धि के प्रतीक जौ का। इसी तरह अपने-अपने मन के संकल्पों की पूर्णता संजोए कल्पवासी एक-दूसरे से फिर मिलने का वादा लेकर रेती से विदा हो गए।

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कल्पवास के अनुष्ठानों के प्रतीक के तौर पर शिविरों में लगाए गए तुलसी के पौधे और वेदियों पर बोए गए जौ का आखिरी डुबकी के साथ विसर्जन किया गया। गोरखपुर के खजनी से आए भोलानाथ तिवारी और मध्यप्रदेश के रीवा निवासी ओम प्रकाश मिश्र एक ही शिविर में रह रहे थे। कल्पवास की पूर्णाहुति के बाद उनके शिविरों में कढ़ी-चावल का भोग लगा। इसके बाद अगले वर्ष फिर आने का वादा कर वह विदा हुए।
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इसी तरह तीर्थपुरोहितों के शिविरों में आखिरी दिन एक-दूसरे से मिलने और विदा होने का सिलसिला चलता रहहा। इससे पहले रात भर में शिविरों में जागरण भी हुए। कहीं अखंड कीर्तन तो कहीं भजन होता रहा। मां गंगा की गोद में कल्पवास की पूर्णता का उल्लास हर तरफ ऐसे ही भावों के साथ प्रगट होता रहा। देर शाम तक पांचवें स्नान पर्व की डुबकी के साथ ही महीने भर के कल्पवास की पूर्णाहुति होती रही।
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मां गंगा के साथ ही भगवान विष्णु की आराधना की गई। शैय्या दान, गो दान के साथ ही अन्न-वस्त्र दान के साथ ही शिविरों में कथाएं हुईं। भोग-भंडारे किए गए। इसी के साथ कल्पवास के समापन के बाद लोग अपने अपने घरों के लिए रवानगी करने लगे। कल्पवासियों की विदाई के साथ ही शिविर उखड़ने लगे हैं।

माघी पूर्णिमा पर्व पर रोडवेज ने किया 1200 बसों का संचालन
 माघ मेले के पांचवें प्रमुख स्नान पर्व माघी पूर्णिमा के अवसर पर रोडवेज द्वारा विभिन्न स्थानों के लिए तकरीबन 1200 बसों का संचालन किया गया। इस दौरान प्रयागराज रामबाग से बनारस के लिए दो मेला स्पेशल ट्रेन भी चलाई गई। हालांकि प्रयागराज जंक्शन और प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन से स्पेशल ट्रेन चलाने की नौबत नहीं आई।

प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज संगम, छिवकी आदि रेलवे स्टेशनों पर सामान्य दिनों जैसी ही यात्रियों की चहल पहल रही। रेलवे अफसरों ने यहां स्पेशल ट्रेन के रेक रिजर्व में रखे थे, लेकिन भीड़ न होने की वजह से उनका इस्तेमाल नहीं हुआ। उधर रोडवेज बस स्टेशन पर चहल पहल रही।कल्पवास खत्म हो जाने की वजह से बहुत से लोग सिविल लाइंस बस स्टेशन पहुंच गए। इस दौरान यहां से गोरखपुर, अयोध्या, आजमगढ़ एवं जौनपुर रूट की तरफ जाने वाली बसों में ज्यादा भीड़ गई। सिविल लाइंस डिपो के एआरएम सीबी राम ने बताया कि माघी पूर्णिमा के अवसर पर तकरीबन 1200 बसों का संचालन हुआ।

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