{"_id":"da64502c3d878d91258427c6a5b69179","slug":"magh-mela-hindi-news-3","type":"story","status":"publish","title_hn":"दावे तमाम, नहीं दिख रहा काम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दावे तमाम, नहीं दिख रहा काम
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Fri, 19 Dec 2014 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माघ मेले का काम भले ही कछुआ गति से चल रहा हो, लेकिन इस बार मेले में आने वाले स्नानार्थियों को भरपूर गंगाजल मिलेगा। जल के जिउ अफसरों ने शासन स्तर पर बात कर ली है और तय हुआ है कि मेले के दौरान टिहरी डैम से प्रतिदिन एक हजार और नरौरा से ढाई हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। हालांकि, पर्याप्त गंगाजल मिलने का अफसर अभी दावा कर रहे हैं और मेले में समय से काम पूरा कर लेने के दावे की पहले ही हवा निकल चुकी है।
मेला क्षेत्र के वीआईपी शिविर में बृहस्पतिवार को कमिश्नर बीके सिंह, एसएसपी दीपक कुमार और डीएम भवनाथ की मौजूदगी में विभिन्न विभागों के अफसरों ने अपने-अपने हिस्से के काम की प्रगति रिपोर्ट संवाददाताओं को बताई। हालांकि, सभी विभागों में काम की गति काफी पिछड़ी हुई है, लेकिन अफसर दावा कर रहे हैं कि कमिश्नर की ओर से निर्धारित समय सीमा में काम पूरा कर लिया जाएगा। कमिश्नर ने काम पूरा करने के लिए 22 दिसंबर तक समय दे रखा है। चार दिन बाकी रह गए हैं और तमाम विभाग अब तक पचास फीसदी काम भी पूरा नहीं कर सके हैं।
दस हजार स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी हैं, जिनमें से अब तक 1500 लगी हैं। 11 केवी की लाइन के लिए आठ हजार पोल में से सात हजार लग चुके हैं। 18 किमी एचटी और 315 किमी एलटी लाइन लगाई जानी है, जिनमें 50 से 70 फीसदी काम हुआ है। 17 में से आठ बिजली घर बने हैं। मुख्य अभियंता एके सिंह का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। बिजली की बर्बादी रोकने के लिए स्ट्रीट लाइटें कम लगाई गई हैं। आवश्यकतानुसार लाइटें लगाई जाएंगी।
विज्ञापन
मेला क्षेत्र में चकर्ड प्लेट वाली कुल 71 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है। अब तक महज 40 फीसदी काम ही पूरा किया जा सका है। पांच पांटूल पुल बनाए जाने हैं। अफसरों का दावा है कि चार पुलों पर यातायात संचालित हो रहा है, जबकि काली मार्ग वाले पुल का काम कटान के कारण बढ़ गया है। इसका निर्माण 22 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, अफसर जिन पुलों पर यातायात संचालित होने का दावा कर रहे हैं, वहां छोटे चार पहिया वाहन भी नहीं निकल पा रहे। बुधवार को एसएसपी दीपक कुमार को पुल से गंगापार जाना था, लेकिन आधे-अधूरे काम के कारण उनकी कार पुल पर नहीं चल सकी। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल का दावा है कि काम तेजी से चल रहा है। कमिश्नर के निर्देशानुसार 22 दिसंबर तक सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे।
मेले में 110.5 किमी मुख्य पाइप लाइन बिछाई जानी है। 104 किमी का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा 108.5 किमी संपर्क पाइप लाइन बिछनी है, जो महज डेढ़ किमी तक बनी है। ड्रेनेज के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तक काम होना है, जो 6.8 किमी तक पूरा हुआ है। डिवाटरिंग के लिए प्रस्तावित 50 पंपों में अब तक दो का संचालन शुरू हुआ है। 6500 घन मीटर में पांड बनाए जाने हैं, जिस पर काम अभी शुरू भी नहीं हुआ। 120 प्रस्तावित फायर हाइड्रेंट में 550 लगाए गए हैं। 1900 प्रस्तावित स्लूज वॉल्व में 1050 लगाए गए हैं। 16 नलकूपों में आठ बनकर तैयार है। बिजली न होने की स्थिति में वाटर सप्लाई के लिए आठ जेनरेटर सेट मंगा लिए गए हैं। जल निगम के मुख्य अभियंता ओपी श्रीवास्तव का दावा है कि काम निर्धारित समय सीमा में पूरा होगा। संस्थाओं और कल्पवासियों के बसने पर संपर्क पाइप लाइन बिछाने एवं कनेक्शन जरी करने का काम आवश्यकतानुसार पूरा किया जाएगा।
000
स्वास्थ्य विभाग : मेला क्षेत्र में दस से पंद्रह हजार लोकर आकर बस चुके हैं और विभाग अब तक 850 में महज 38 शौचालयों का निर्माण पूरा करा सका है। ये शौचालय भी अफसरों के कैंप में बनाए गए हैं। ऐसे में मेला क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है और विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। विभाग को मेले में 20-20 बेड वाले दो अस्पताल, 12 प्राथमिक चिकित्सालय, तीन आयुर्वेद और चार होम्योपैथिक अस्पताल बनाने हैं। इनका काम भी धीमा है। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आभा श्रीवास्तव का दावा है कि शौचालयों के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी काम निर्धारित समय सीमा में ही पूरे होंगे।
00000000000
अफसरों का दावा, यमुना में दूषित पानी
जल निगम के अफसरों ने दावा किया है कि पुराने यमुनापुल के समानांतर निकल रही सीवर लाइन से लीकेज के कारण जो गंदा एवं दूषित पानी यमुना में गिर रहा है, उसकी रोकथाम के वैकल्पिक इंतजाम कर लिए गए हैं। मेले के दौरान गंदा पानी यमुना में नहीं गिरेगा। जल निगम के मुख्य अभियंता ने बताया कि दोनों तरफ की सीवर लाइन को बदला जा रहा है। इस काम को पूरा होने में वक्त लगेगा। निर्माण पूरा होने के साथ ही गंदे पानी को यमुना में गिरने से रोकने के लिए स्थायी इंतजाम हो जाएगा।
00000
कटान ने बढ़ाई चुनौती
गंगा में हो रही कटान के कारण अफसरों के लिए चुनौती बढ़ गई है। कटान के कारण पुलिस विभाग के लिए तय करना पाना मुश्किल हो गया है कि वाच टॉवर कहां बनाया जाए। इसके लिए सिंचाई विभाग से राय मांगी गई है। गंगा के दाहिने तट और खाक चौक पर कटान की समस्या अधिक है। प्रशासन ने 12 जगह अस्थायी स्नानघाट बनाने की तैयारी की है लेकिन कटान के कारण इसका काम भी रुका हुआ है। दो जगह जेटी भी बनाई जा रही है। एक जगह सिंचाई विभाग ने काम पूरा कर लिया है जबकि दूसरी जगह जेटी का काम शुरू नहीं हो सका है।
विज्ञापन
मेला क्षेत्र के वीआईपी शिविर में बृहस्पतिवार को कमिश्नर बीके सिंह, एसएसपी दीपक कुमार और डीएम भवनाथ की मौजूदगी में विभिन्न विभागों के अफसरों ने अपने-अपने हिस्से के काम की प्रगति रिपोर्ट संवाददाताओं को बताई। हालांकि, सभी विभागों में काम की गति काफी पिछड़ी हुई है, लेकिन अफसर दावा कर रहे हैं कि कमिश्नर की ओर से निर्धारित समय सीमा में काम पूरा कर लिया जाएगा। कमिश्नर ने काम पूरा करने के लिए 22 दिसंबर तक समय दे रखा है। चार दिन बाकी रह गए हैं और तमाम विभाग अब तक पचास फीसदी काम भी पूरा नहीं कर सके हैं।
विज्ञापन
दस हजार स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी हैं, जिनमें से अब तक 1500 लगी हैं। 11 केवी की लाइन के लिए आठ हजार पोल में से सात हजार लग चुके हैं। 18 किमी एचटी और 315 किमी एलटी लाइन लगाई जानी है, जिनमें 50 से 70 फीसदी काम हुआ है। 17 में से आठ बिजली घर बने हैं। मुख्य अभियंता एके सिंह का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। बिजली की बर्बादी रोकने के लिए स्ट्रीट लाइटें कम लगाई गई हैं। आवश्यकतानुसार लाइटें लगाई जाएंगी।
विज्ञापन
मेला क्षेत्र में चकर्ड प्लेट वाली कुल 71 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है। अब तक महज 40 फीसदी काम ही पूरा किया जा सका है। पांच पांटूल पुल बनाए जाने हैं। अफसरों का दावा है कि चार पुलों पर यातायात संचालित हो रहा है, जबकि काली मार्ग वाले पुल का काम कटान के कारण बढ़ गया है। इसका निर्माण 22 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, अफसर जिन पुलों पर यातायात संचालित होने का दावा कर रहे हैं, वहां छोटे चार पहिया वाहन भी नहीं निकल पा रहे। बुधवार को एसएसपी दीपक कुमार को पुल से गंगापार जाना था, लेकिन आधे-अधूरे काम के कारण उनकी कार पुल पर नहीं चल सकी। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल का दावा है कि काम तेजी से चल रहा है। कमिश्नर के निर्देशानुसार 22 दिसंबर तक सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे।
मेले में 110.5 किमी मुख्य पाइप लाइन बिछाई जानी है। 104 किमी का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा 108.5 किमी संपर्क पाइप लाइन बिछनी है, जो महज डेढ़ किमी तक बनी है। ड्रेनेज के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तक काम होना है, जो 6.8 किमी तक पूरा हुआ है। डिवाटरिंग के लिए प्रस्तावित 50 पंपों में अब तक दो का संचालन शुरू हुआ है। 6500 घन मीटर में पांड बनाए जाने हैं, जिस पर काम अभी शुरू भी नहीं हुआ। 120 प्रस्तावित फायर हाइड्रेंट में 550 लगाए गए हैं। 1900 प्रस्तावित स्लूज वॉल्व में 1050 लगाए गए हैं। 16 नलकूपों में आठ बनकर तैयार है। बिजली न होने की स्थिति में वाटर सप्लाई के लिए आठ जेनरेटर सेट मंगा लिए गए हैं। जल निगम के मुख्य अभियंता ओपी श्रीवास्तव का दावा है कि काम निर्धारित समय सीमा में पूरा होगा। संस्थाओं और कल्पवासियों के बसने पर संपर्क पाइप लाइन बिछाने एवं कनेक्शन जरी करने का काम आवश्यकतानुसार पूरा किया जाएगा।
000
स्वास्थ्य विभाग : मेला क्षेत्र में दस से पंद्रह हजार लोकर आकर बस चुके हैं और विभाग अब तक 850 में महज 38 शौचालयों का निर्माण पूरा करा सका है। ये शौचालय भी अफसरों के कैंप में बनाए गए हैं। ऐसे में मेला क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है और विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। विभाग को मेले में 20-20 बेड वाले दो अस्पताल, 12 प्राथमिक चिकित्सालय, तीन आयुर्वेद और चार होम्योपैथिक अस्पताल बनाने हैं। इनका काम भी धीमा है। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आभा श्रीवास्तव का दावा है कि शौचालयों के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी काम निर्धारित समय सीमा में ही पूरे होंगे।
00000000000
अफसरों का दावा, यमुना में दूषित पानी
जल निगम के अफसरों ने दावा किया है कि पुराने यमुनापुल के समानांतर निकल रही सीवर लाइन से लीकेज के कारण जो गंदा एवं दूषित पानी यमुना में गिर रहा है, उसकी रोकथाम के वैकल्पिक इंतजाम कर लिए गए हैं। मेले के दौरान गंदा पानी यमुना में नहीं गिरेगा। जल निगम के मुख्य अभियंता ने बताया कि दोनों तरफ की सीवर लाइन को बदला जा रहा है। इस काम को पूरा होने में वक्त लगेगा। निर्माण पूरा होने के साथ ही गंदे पानी को यमुना में गिरने से रोकने के लिए स्थायी इंतजाम हो जाएगा।
00000
कटान ने बढ़ाई चुनौती
गंगा में हो रही कटान के कारण अफसरों के लिए चुनौती बढ़ गई है। कटान के कारण पुलिस विभाग के लिए तय करना पाना मुश्किल हो गया है कि वाच टॉवर कहां बनाया जाए। इसके लिए सिंचाई विभाग से राय मांगी गई है। गंगा के दाहिने तट और खाक चौक पर कटान की समस्या अधिक है। प्रशासन ने 12 जगह अस्थायी स्नानघाट बनाने की तैयारी की है लेकिन कटान के कारण इसका काम भी रुका हुआ है। दो जगह जेटी भी बनाई जा रही है। एक जगह सिंचाई विभाग ने काम पूरा कर लिया है जबकि दूसरी जगह जेटी का काम शुरू नहीं हो सका है।