प्रयागराज : माता धारी देवी की डोली ने पहली बार संगम में लगाई डुबकी
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प्रयाराज में माघ मेले को देखते हुए बेहतर व्यवस्था का आयोजन किया है। देशभर से संगम में डुबकी लगाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, शुक्रवार को उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठित माता धारी देवी की डोली ने पहली बार संगम में डुबकी लगाई।
इसके बाद मंदिर के पुरोहित सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि धारी देवी श्रीकेदारनाथजी की बहन हैं। मां धारी देवी की मूर्ति जाग्रत और साक्षात है। मां धारी देवी उत्तराखंड के चारों धाम और तीर्थयात्रियों की रक्षक मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि मां की डोली कर्नलगंज के पार्षद आनंद घिल्डियाल का आवास प्रभाकुंज, कर्नलगंज में शाम सात बजे पंहुंचीं। जाग्रत रूप में मां का आशीष सबको प्राप्त हुआ। सान्ध्य आरती के समय दिनेश रावत, समीर चंदोला, अमित, उत्कर्ष, रामजी, डॉ शांति चौधरी, सुरेश यादव समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
वहीं, सुबह पांच बजे कर्नलगंज से मां डोली ने संगम के लिए प्रस्थान किया और गंगा स्नान के बाद कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल के लिए यात्रा प्रारंभ हुई।
वसंत पंचमी पर लाखों लोगों ने लगाई डुबकी
वसंत पंचमी पर गुरुवार को संगम पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। आधी रात के बाद से ही संगम जाने वाले मार्गों पर आस्था-भक्ति की लहरें हिलोरें मारने लगीं। एक तरफ संगम स्नान, दूसरी ओर सर्कुलेटिंग एरिया में अदृश्य सरस्वती के नाम पर दीपदान और त्रिवेणी में दूध की धार अर्पित कर अभिषेक करने की दिन भर होड़ मची रही। मेला प्रशासन ने देर शाम तक 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के संगम स्नान का अनुमान व्यक्त किया।
संगम नोज समेत माघ मेला के आठ किमी लंबे गंगातट बृहस्पतिवार भोर में स्नानार्थियों की भीड़ से खचाखच भर गए। वसंत पंचमी भले ही एक दिन पहले लग गई थी, लेकिन उदया तिथि में स्नान के लिए हर किसी को सूर्योदय का इंतजार था। पौ फटने के साथ ही अरैल से नागवासुकि के बीच मेला के छह सेक्टर में बने 20 घाटों पर गंगा-यमुना, सरस्वती के जयघोष के साथ डुबकी लगने लगी।
सुबह सीएम समेत कई मंत्रियों के संगम स्नान के लिए पहुंचने के बावजूद आम श्रद्धालुओं को कहीं व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ा। पुण्य की डुबकी लगाने के लिए संगम पर श्रद्धालुओं का तांता संगम जाने वाले हर मार्ग पर लगा रहा। संगम जाने वाले मार्गों पर दूर-दराज से आए लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर चल रहे थे। रास्ते भर ढोल, झांझ, हारमोनियम के साथ रामनाम संकीर्तन करने वाली भजन मंडलियां श्रद्धालुओं में भक्ति भाव का और भी संचार करती रहीं। संगम में डुबकी के साथ दान और ध्यान में रमे लोग रेती पर जम गए। कहीं तिल रखने की जगह नहीं थी।