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हजारों लीटर संगम का पवित्र जल ले गए श्रद्धालु
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 21 Jan 2015 12:09 AM IST
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मंगलवार भोर में शुरू हुए मौनी अमावस्या स्नान को श्रद्धालुओं का तांता देर शाम तक लगा रहा। इलाहाबाद जंक्शन, प्रयाग स्टेशन, बस अड्डो से निकलने वाले हर कदम संगम की ओर बढ़ते नजर आए। संगम पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु डिब्बों में पवित्र गंगा जल भरना नहीं भूले। फिर तो वापसी में हर किसी के हाथ में गंगा जल भरा डिब्बा नजर आया। मौनी अमावस्या के स्नान को पहुंचे श्रद्धालु इहलोक और परलोक के कल्याण, परिवार एवं सगे-संबंधियों के लिए भी संगम का पवित्र जल ले गए।
संगम पर गंगा जल कम होने और प्रदूषित गंगा जल के लिए हो-हल्ला के बीच देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंगलवार को संगम में डुबकी लगाई। फिर वहीं सजी दुकानों से प्लास्टिक के डिब्बे खरीदे और संगम से पवित्र गंगा जल भरकर ले गए। तमाम ऐसे श्रद्धालु भी रहे जिनके पास डिब्बे नहीं थे सो पॉलीथिन में ही गंगा मइया को बटोर लिया। मेला क्षेत्र में त्रिवेणी रोड पर डिब्बे बेचने वाले रमेश तिवारी ने बताया कि सोमवार शाम से मंगलवार तक करीब 1300 डिब्बे बेच डाले। एक साथ इतने डिब्बे यहां रखना संभव नहीं था सो दारागंज स्थित घर से डिब्बे लाने के लिए कई बार चक्कल लगाना पड़ा। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि संगम में जल को लेकर यजमानों में बेहद श्रद्धा है। मौनी अमावस्या पर आने वाले स्नानार्थी अपने घर के लोगों के साथ रिश्तेदारों को पुण्य का भागीदार बनाने के लिए जल लेकर जाते हैं।
मौनी अमावस्या पर वर्ष 2013 के महाकुंभ की याद ताजा हो गई, जब शहरियों ने सड़क से गुजरते श्रद्धालुओं के लिए दिल के दरवाजे खोल दिए। इलाहाबाद जंक्शन से लेकर रामबाग, सोहबतियाबाग, बैरहना आदि में हर मोड़, चौराहों पर भंडारा और चाय का इंतजाम किया गया। मेडिकल चौराहा से सीएमपी डिग्री कॉलेज और वहां से बैरहना सब्जी मंडी तक कई जगह सड़क के दोनों ओर भंडारे का आयोजन किया गया। कई संस्थाओं, व्यापारियों की ओर से पूड़ी-सब्जी, हलुआ का वितरण कराया गया। बालसन चौराहा से अपोलीबाग तक करीब आधा दर्जन स्थानों पर खाने-पीने की व्यवस्था की गई। सिविल लाइंस में हाईकोर्ट चौराहा के पहले भी उधर से गुजरने वाले श्रद्धालुओं बुला-बुलाकर भोजन खिलाया गया। जगह-जगह स्टॉलों पर चाय और पानी की व्यवस्था की गई। कई किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुंचे और स्नान के बाद लौटकर थक चुके श्रद्धालुओं ने भंडारों में आराम से बैठकर भोजन किया।
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संगम पर गंगा जल कम होने और प्रदूषित गंगा जल के लिए हो-हल्ला के बीच देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंगलवार को संगम में डुबकी लगाई। फिर वहीं सजी दुकानों से प्लास्टिक के डिब्बे खरीदे और संगम से पवित्र गंगा जल भरकर ले गए। तमाम ऐसे श्रद्धालु भी रहे जिनके पास डिब्बे नहीं थे सो पॉलीथिन में ही गंगा मइया को बटोर लिया। मेला क्षेत्र में त्रिवेणी रोड पर डिब्बे बेचने वाले रमेश तिवारी ने बताया कि सोमवार शाम से मंगलवार तक करीब 1300 डिब्बे बेच डाले। एक साथ इतने डिब्बे यहां रखना संभव नहीं था सो दारागंज स्थित घर से डिब्बे लाने के लिए कई बार चक्कल लगाना पड़ा। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि संगम में जल को लेकर यजमानों में बेहद श्रद्धा है। मौनी अमावस्या पर आने वाले स्नानार्थी अपने घर के लोगों के साथ रिश्तेदारों को पुण्य का भागीदार बनाने के लिए जल लेकर जाते हैं।
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मौनी अमावस्या पर वर्ष 2013 के महाकुंभ की याद ताजा हो गई, जब शहरियों ने सड़क से गुजरते श्रद्धालुओं के लिए दिल के दरवाजे खोल दिए। इलाहाबाद जंक्शन से लेकर रामबाग, सोहबतियाबाग, बैरहना आदि में हर मोड़, चौराहों पर भंडारा और चाय का इंतजाम किया गया। मेडिकल चौराहा से सीएमपी डिग्री कॉलेज और वहां से बैरहना सब्जी मंडी तक कई जगह सड़क के दोनों ओर भंडारे का आयोजन किया गया। कई संस्थाओं, व्यापारियों की ओर से पूड़ी-सब्जी, हलुआ का वितरण कराया गया। बालसन चौराहा से अपोलीबाग तक करीब आधा दर्जन स्थानों पर खाने-पीने की व्यवस्था की गई। सिविल लाइंस में हाईकोर्ट चौराहा के पहले भी उधर से गुजरने वाले श्रद्धालुओं बुला-बुलाकर भोजन खिलाया गया। जगह-जगह स्टॉलों पर चाय और पानी की व्यवस्था की गई। कई किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुंचे और स्नान के बाद लौटकर थक चुके श्रद्धालुओं ने भंडारों में आराम से बैठकर भोजन किया।
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