प्रयागराज : माफिया अतीक अहमद मीडिया की वजह से खुद को बताया था महफूज, वही बना मौत का बहाना
जिस मीडिया की वजह से अतीक अहमद खुद को महफूज बताता रहा, वही मीडिया उसकी मौत का बहाना बन गया। शूटरों ने इसी को हथियार बनाया और फिर उसके करीब पहुंचकर उसकी जान ले ली। सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान लोगाें में इसी बात की चर्चा रही।
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जिस मीडिया की वजह से अतीक अहमद खुद को महफूज बताता रहा, वही मीडिया उसकी मौत का बहाना बन गया। शूटरों ने इसी को हथियार बनाया और फिर उसके करीब पहुंचकर उसकी जान ले ली। सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान लोगाें में इसी बात की चर्चा रही।
उमेश पाल हत्याकांड में बी वारंट पर साबरमती जेल से लाए जाने के दौरान 12 अप्रैल को अतीक ने झांसी में यह बात कही थी। झांसी में पुलिस का काफिला रुकने पर मीडियाकर्मियाें के सवाल पर उसने कहा था कि आपकी बड़ी मेहरबानी है, आपकी वजह से ही महफूज हूं। हालांकि शूटरों ने इसी मीडिया को उसकी मौत का बहाना बना लिया। मीडियाकर्मी बनकर उसके करीब पहुंचे और उसे भाई अशरफ समेत मौत के घाट उतार दिया।
जानकारों का कहना है कि शूटर जानते थे कि मीडियाकर्मी बनकर जाने पर उसे पुलिसकर्मी नहीं टोकेंगे। यही नहीं अगर अतीक के गुर्गे भी आसपास रहकर नजर रख रहे होंगे तो वह भी किसी तरह का खलल नहीं पैदा करेंगे। इस तरह से जिस मीडिया को अतीक ने अपने महफूज रहने की वजह बताता रहा, शूटरों ने उसी मीडिया को उसकी मौत का बहाना बना लिया।
कैमरे में सही-सलामत दिखे, पुलिस बोली-तबियत बिगड़ने पर ले गए थे अस्पताल
माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के मामले में धूमनगंज पुलिस के दावे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल अस्पताल ले जाए जाते वक्त कैमरे के सामने अतीक व अशरफ सही सलामत नजर आते हैं। हालांकि धूमनगंज पुलिस का दावा है कि तबियत ठीक नहीं होने की शिकायत पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। मामले में धूमनगंज इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौर्य की ओर से तहरीर दी गई है। इसमें लिखा है कि 15 अप्रैल की शाम अतीक व अशरफ ने बेचैनी होने की बात बताई।
इस पर उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए रात 10.19 मिनट पर पुलिस टीम दोनों को लेकर कॉल्विन अस्पताल के लिए निकली। बड़ी बात यह है कि घटना से कुछ देर पहले कॉल्विन अस्पताल के गेट पर पहुंचने के दौरान दोनों न सिर्फ सही सलामत नजर आए थे बल्कि मीडिया से बातें भी की थीं। चर्चा इस बात की भी है कि पुलिस खुद के बचाव के लिए यह तर्क दे रही है।
रिमांड अवधि पूरी होने पर मेडिकल का है आदेश
दअरसल कोर्ट ने अतीक व अशरफ को कस्टडी रिमांड पर देने के लिए जो शर्तें तय की हैं, उनमें कहीं भी रोजाना मेडिकल कराए जाने का जिक्र नहीं है। इसमें आदेशित किया गया है अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा से पुलिस अभिरक्षा में लेने से पहले उनका मेडिकल परीक्षण कराया जाए। इसके बाद पुन: पुलिस अभिरक्षा से न्यायिक अभिरक्षा में दिए जाते समय उनका चिकित्सीय परीक्षण व कोरोना की जांच कराई जाएगी।
जेल में नहीं बांटा गया अखबार, कैंटीन में पहुंचने से पहले हटाया
माफिया अतीक व अशरफ की हत्या के बाद जहां जेल की बैरकों में लगी टीवी को बंद करा दिया गया। रविवार सुबह अखबार भी नहीं बांटा गया। रोजना की तरह सुबह छह बजे अखबार जेल पहुंचे तो गेट पर मौजूद बंदी रक्षकों ने उसे रिसीव किया, लेकिन कैंटीन व बैरक में पहुंचने से पहले ही उसे हटा दिया गया। जेल में हिंदी के सौ से अधिक व अंग्रेजी के एक दर्जन अखबार प्रतिदिन मंगाए जाते हैं। उन्हें जेल की कैंटीन में रखा जाता है। नियमित अखबार पढ़ने वाले बंदियों को उनकी बैरक में अखबार दिया जाता है। कुछ वीआईपी बंदियों तक अखबार पहुंचा। उसमें भी अतीक व अशरफ से जुड़ी खबरों के पन्नों को हटा दिया गया था।