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68500 सहायक अध्यापक भर्ती मामला: अधिकारियों की बढ़ेंगी मुश्किल, कोर्ट के आदेश पर मचा हड़कंप

Fri, 02 Nov 2018 03:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Fri, 02 Nov 2018 03:41 AM IST
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Lucknow bench of high court recommends CBI inquiry of assistant teacher recruitment
प्रतीकात्मक तस्वीर
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा की सीबीआई जांच का आदेश देने के बाद यहां के शिक्षा अधिकारियों में हड़कंप मचा है। दरअसल, भर्ती परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन में जमकर अनियमितता की गई थी। 
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परिणाम जारी होने पर जब अभ्यर्थियों ने हल्ला मचाया तो अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। सही सवाल पर अंक न देने या कम अंक देने की शिकायत पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जब परीक्षार्थी सोनिका देवी की कॉपी तलब की तब अफसरों की कलई खुली और दो अफसरों पर गाज गिर गई। 
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ऐसे में सीबीआई जांच की सिफारिश होने के बाद अब शिक्षा अधिकारियों में हड़कंप है। वहीं हाईकोर्ट के इस आदेश पर परीक्षार्थियों ने खुशी जताई है।  13 अगस्त को परीक्षा परिणाम आने के बाद से गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थी शिकायत करने परीक्षा नियामक कार्यालय पहुंचने लगे थे। इसी क्रम में माह के अंत तक हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सोनिका देवी का मामला पहुंचा। 
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सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने प्रस्तुत की गई सोनिका देवी की उत्तरपुस्तिका और कार्बन कॉपी अलग-अलग पाई गई। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ.सुत्ता सिंह और रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी को निलंबित कर दिया।

साथ ही कोर्ट ने परीक्षार्थियों को स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने का विभाग को निर्देश दिया। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने शिक्षक भर्ती की उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी हासिल की और पाया कि उनकी कापियों में भी छेड़छाड़ की गई है। 

इसके बाद तो शिकायत करने वालों की लाइन लग गई। बाद में सचिव परीक्षा नियामक ने 45 नए अभ्यर्थियों को नौकरी देने के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से सिफारिश की। 

ये ऐसे परीक्षार्थी थे जो उत्तरपुस्तिका में पास थे, लेकिन परिणाम में फेल दिखाए गए थे। परीक्षार्थियों की ओर से कॉपी में काट-छांट और उत्तर बदले जाने की शिकायत सही पाए जाने के बाद अंत में कोर्ट ने 68500 शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। वहीं परीक्षार्थियों ने कोर्ट इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। 

नियुक्तियों में भी की गई गड़बड़ी

परिषदीय विद्यालयों के लिए 68500 शिक्षकों की भर्ती के परिणाम की घोषणा के बाद 41556 परीक्षार्थी सफल हुए, जबकि सीट होने के बाद भी परीक्षा में सफल नहीं होने से 26944 पद खाली रह गए। 

सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से आरक्षण लगाकर परीक्षा में सफल 41556 परीक्षार्थियों में से 6127 को चयन से बाहर कर दिया। परीक्षार्थियों का दबाव जब सरकार पर बना तो दो दिन के भीतर ही चयन से बाहर अभ्यर्थियों को नौकरी दे दी गई।

शिक्षक भर्ती के परिणाम में 68500 पदों के सापेक्ष मात्र 41556 अभ्यर्थी सफल हुए थे, नियुक्ति के लिए काउंसलिंग के लिए आवेदन के समय मात्र 40669 अभ्यर्थियों ने ही आवेदन किया। 

इस प्रकार परीक्षा में सफल 887 अभ्यर्थी चयन से पहले ही बाहर हो गए। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जिला आवंटन से पहले 6009 अभ्यर्थियों को आरक्षण के नियमों का शिकार बनना पड़ा। 

परिषद की ओर से मात्र 34660 अभ्यर्थियों का जिला आवंटन किया गया। इस बात को लेकर शिक्षक भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों ने तत्कालीन सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा और उनके साथ के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया था।

जिले के आवंटन में गड़बड़ी, एक अभ्यर्थी को दो जिले में नियुक्ति
शिक्षक भर्ती में चयन से पहले सिर्फ पद ही नहीं घटाए गए, बल्कि अभ्यर्थियों को जिला आवंटन करने में भी मनमानी की गई है। अधिक मेरिट वालों को दूर के जिलों में जाना पड़ा। इसमें कई महिला अभ्यर्थी भी शामिल हैं। अभ्यर्थियों की मानें तो सामान्य वर्ग के गिने-चुने अभ्यर्थियों को ही अपना जिला आवंटित हो सका है, अधिकांश को दूसरे जिलों में ही जाना पड़ा है। बड़ी संख्या में छात्रों को एक से अधिक जिले आवंटित कर दिए गए।

शिक्षक भर्ती में प्रतिदिन बदलते रहे नियम
शिक्षक भर्ती में सरकार के स्तर पर प्रतिदिन गलती छिपाने की कोशिश की गई। कोर्ट के आदेश पर कॉपी उपलब्ध कराने के बाद पता चला कि कॉपी जांचने में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई। जब तक कोर्ट में यह साबित नहीं हुआ कि परीक्षार्थियों की कॉपी से छेड़छाड़ की गई है, किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक मूल्यांकन की गड़बड़ी सरकार पर थोपती रहीं, उनका कहना था कि सरकार की ओर से रिजल्ट घोषित करने के दबाव के चलते गड़बड़ी हुई। कॉपी दिखाने के आदेश के बाद भी परीक्षार्थियों को परेशान किया गया।
 
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