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वकीलों की हड़ताल से करोड़ों का नुकसान
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Loss of crores due to lawyers strike
- फोटो : CITY DESK
वकील कार्य से विरत, करोड़ों का नुकसान
0 हाईकोर्ट के आसपास दुकानों पर सन्नाटा, हजारों मुकदमों में लगी डेट
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। पिछले चार दिन से हाईकोर्ट के वकीलों द्वारा काम ठप करने से न सिर्फ न्यायिक कार्य बाधित हुआ, बल्कि सरकार और व्यापारियों को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिक्षा अधिकरण पर अधिवक्ताओं के विरोध के चलते हाईकोर्ट प्रशासन, प्रदेश सरकार के साथ-साथ फुटकर व्यापारी और कोर्ट के आसपास के खोमचे वाले तक प्रभावित हैं।
हाईकोर्ट में हर दिन दो हजार नए मुकदमे दाखिल होते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन छह हजार मुकदमे सूचीबद्ध रहते हैं। इस लिहाज से हर दिन लगभग आठ हजार मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। हाईकोर्ट पर पहले से ही सवा नौ लाख मुकदमों का बोझ है। इन मुकदमों से हाईकोर्ट प्रशासन को हर दिन लाखों रुपये की क्षति उठानी पड़ रही है। प्रदेश सरकार को भी मुकदमों की पैरवी में प्रतिदिन कई लाख रुपये सरकारी वकीलों की फीस और कर्मचारियों के वेतन आदि पर खर्च करने पड़ते हैं।
काम ठप होने के कारण मुकदमों का दाखिला लगभग बंद है। जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की जमानत अर्जियों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। साथ ही सजा काट रहे कैदी अपनी रिहाई को लेकर परेशान हैं तो तमाम ऐसे पीड़ित जिनको तत्काल न्यायिक राहत की जरूरत है, वह अपने अधिकार से वंचित रह जा रहे हैं। हाईकोर्ट के पास चाय की छोटी दुकान चलाने वाले श्याम, लाई चना बेचने वाले मानू और पान का ठेला लगाने वाले कुलदीप, फोटोस्टेट की दुकान चलाने वाले धीरज का कहना है कि विरोध के चलते उनकी कमाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। दिन भर में जहां से पांच सौ से लेकर हजार रुपये तक की कमाई होती थी, वहीं इन दिनों सौ-दो सौ रुपये भी कमाना मुश्किल हो गया है।
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0 हाईकोर्ट के आसपास दुकानों पर सन्नाटा, हजारों मुकदमों में लगी डेट
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। पिछले चार दिन से हाईकोर्ट के वकीलों द्वारा काम ठप करने से न सिर्फ न्यायिक कार्य बाधित हुआ, बल्कि सरकार और व्यापारियों को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। शिक्षा अधिकरण पर अधिवक्ताओं के विरोध के चलते हाईकोर्ट प्रशासन, प्रदेश सरकार के साथ-साथ फुटकर व्यापारी और कोर्ट के आसपास के खोमचे वाले तक प्रभावित हैं।
हाईकोर्ट में हर दिन दो हजार नए मुकदमे दाखिल होते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन छह हजार मुकदमे सूचीबद्ध रहते हैं। इस लिहाज से हर दिन लगभग आठ हजार मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। हाईकोर्ट पर पहले से ही सवा नौ लाख मुकदमों का बोझ है। इन मुकदमों से हाईकोर्ट प्रशासन को हर दिन लाखों रुपये की क्षति उठानी पड़ रही है। प्रदेश सरकार को भी मुकदमों की पैरवी में प्रतिदिन कई लाख रुपये सरकारी वकीलों की फीस और कर्मचारियों के वेतन आदि पर खर्च करने पड़ते हैं।
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काम ठप होने के कारण मुकदमों का दाखिला लगभग बंद है। जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की जमानत अर्जियों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। साथ ही सजा काट रहे कैदी अपनी रिहाई को लेकर परेशान हैं तो तमाम ऐसे पीड़ित जिनको तत्काल न्यायिक राहत की जरूरत है, वह अपने अधिकार से वंचित रह जा रहे हैं। हाईकोर्ट के पास चाय की छोटी दुकान चलाने वाले श्याम, लाई चना बेचने वाले मानू और पान का ठेला लगाने वाले कुलदीप, फोटोस्टेट की दुकान चलाने वाले धीरज का कहना है कि विरोध के चलते उनकी कमाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। दिन भर में जहां से पांच सौ से लेकर हजार रुपये तक की कमाई होती थी, वहीं इन दिनों सौ-दो सौ रुपये भी कमाना मुश्किल हो गया है।
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