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UP : हत्या के 43 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा रद्द, हाईकोर्ट ने रिहा करने का दिया आदेश
Wed, 12 Aug 2026 07:05 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 12 Aug 2026 07:05 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन गवाहों के विरोधाभासी बयानों और आचरण के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने करीब 43 साल पहले हुई हत्या में मिली उम्रकैद की सजा रद्द कर दी।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन गवाहों के विरोधाभासी बयानों और आचरण के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने करीब 43 साल पहले हुई हत्या में मिली उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि के फैसले को पलटते हुए कोर्ट ने रमाकांत को बेगुनाह बताते हुए बरी करने का आदेश दिया है।
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मामला आगरा के फिरोजाबाद थानाक्षेत्र का है। 11 नवंबर 1983 को नेकसे उर्फ विनोद की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने अनिल कुमार और रमाकांत को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने 1989 में अनिल और रामाकांत को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
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अपील लंबित रहने दौरान अनिल की मृत्यु हो गई। इसके बाद कोर्ट ने जीवित बचे आरोपी रामाकांत की अपील पर सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन के मुख्य गवाह रामनाथ और प्रवीण कुमार की मौके पर मौजूदगी संदिग्ध है। दोनों ने पान की दुकान खुली होने और बिजली की रोशनी के संबंध में परस्पर विरोधी बयान दिए।
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बचाव पक्ष के गवाह मोहनलाल ने घटना की रात बिजली न होने और अपनी दुकान खुली होने की बात कही थी। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के आचरण और बयानों में विरोधाभास के कारण उनकी गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है। अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों में घटनास्थल, रोशनी, पान की दुकान और रिक्शे को लेकर गंभीर विरोधाभास है। लिहाजा, कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए रामाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया।