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बच्चों को खेलने दें, बुढ़ापे में नहीं झुकेगी कमर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:21 AM IST
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Walking Stairs
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बीमारी रहित जीवन के लिए हड्डी का स्वस्थ होना जरूरी है। बोन बैलेंस बढ़ाकर बुढ़ापे में कमर झुकने से बचाई जा सकती है। अगली पीढ़ी सही रहे इसलिए बच्चों को संपूर्ण आहार देने के साथ प्रतिदिन एक घंटा खेलने की आजादी भी देनी होगी। बच्चियों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देना होगा। ऑर्थोकॉन में शनिवार को दिल्ली से आए बोन टीबी विशेषज्ञ डॉ. अनिल जैन ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान ये बातें बताईं।
डॉ. जैन ने कहा कि बोन टीबी हड्डियों के क्षरण के कारण पनपती है। हमें आहार और व्यायाम पर ध्यान देना होगा। बताया कि 25 वर्ष की उम्र तक हड्डियां मजबूत होकर शरीर के गठन में सहायक होती हैं। 25 से 35 की उम्र हमें सावधान करने वाली होती हैं। इसके बाद 45 की उम्र तक पुरुष की हड्डियों में क्षरण एक प्रतिशत जबकि महिलाओं में हड्डियों का यह नुकसान तीन फीसदी होता है।
डॉ. जैन के मुताबिक उनके पास आने वाले मरीजों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बालकाल में सही पोषण न किए जाने से 45 वर्ष की आयु तक वे ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो गए। इस बीमारी में उम्र के साथ हड्डियां पतली होती जाती हैं। पीड़ितों में महिलाओं का प्रतिशत अधिक होता है। प्रसव के बाद परिवार और बच्चों की देखभाल में व्यस्त महिलाएं खुद पर ध्यान नहीं दे पातीं। अनियमित दिनचर्या से मोटापा, हड्डियों के गलने, घुटने और पैर की एड़ी में दर्द-सूजन की शिकायत बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि बच्चों की खुराक सही रहेगी तो बोन बैलेंस दुरुस्त होगा। बुढ़ापे में कमर नहीं झुकेगी। वहीं 30 से 45 वर्ष की उम्र पार महिलाओं और पुरुषों को 40 मिनट की नियमित वॉक और इतनी ही देर धूप सेंकना हड्डियों को मजबूत कर क्षरण रोकेगा। उन्होंने हड्डी संबंधी रोगों से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर विटामिन डी का निर्धारित डोज, दूध या कैल्शियम आदि की खुराक जरूर लेनी चाहिए। बोन टीबी पर अपने अनुभव उन्होंने स्लाइड शो के माध्यम से प्रस्तुत किए।
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ऑर्थोकॉन के तकनीकी सत्र में शनिवार को चेयरमैन डॉ. केडी त्रिपाठी, ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. मनोज गुप्ता, आयोजन सचिव डॉ. अनुज गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. त्रिभुवन सिंह, डॉ.कपिल कुलश्रेष्ठ, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. निकुंज अग्रवाल, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. सुरेश मौर्या, डॉ. शरद जैन समेत बड़ी संख्या में हड्डी रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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डॉ. जैन ने कहा कि बोन टीबी हड्डियों के क्षरण के कारण पनपती है। हमें आहार और व्यायाम पर ध्यान देना होगा। बताया कि 25 वर्ष की उम्र तक हड्डियां मजबूत होकर शरीर के गठन में सहायक होती हैं। 25 से 35 की उम्र हमें सावधान करने वाली होती हैं। इसके बाद 45 की उम्र तक पुरुष की हड्डियों में क्षरण एक प्रतिशत जबकि महिलाओं में हड्डियों का यह नुकसान तीन फीसदी होता है।
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डॉ. जैन के मुताबिक उनके पास आने वाले मरीजों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बालकाल में सही पोषण न किए जाने से 45 वर्ष की आयु तक वे ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो गए। इस बीमारी में उम्र के साथ हड्डियां पतली होती जाती हैं। पीड़ितों में महिलाओं का प्रतिशत अधिक होता है। प्रसव के बाद परिवार और बच्चों की देखभाल में व्यस्त महिलाएं खुद पर ध्यान नहीं दे पातीं। अनियमित दिनचर्या से मोटापा, हड्डियों के गलने, घुटने और पैर की एड़ी में दर्द-सूजन की शिकायत बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि बच्चों की खुराक सही रहेगी तो बोन बैलेंस दुरुस्त होगा। बुढ़ापे में कमर नहीं झुकेगी। वहीं 30 से 45 वर्ष की उम्र पार महिलाओं और पुरुषों को 40 मिनट की नियमित वॉक और इतनी ही देर धूप सेंकना हड्डियों को मजबूत कर क्षरण रोकेगा। उन्होंने हड्डी संबंधी रोगों से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर विटामिन डी का निर्धारित डोज, दूध या कैल्शियम आदि की खुराक जरूर लेनी चाहिए। बोन टीबी पर अपने अनुभव उन्होंने स्लाइड शो के माध्यम से प्रस्तुत किए।
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ऑर्थोकॉन के तकनीकी सत्र में शनिवार को चेयरमैन डॉ. केडी त्रिपाठी, ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. मनोज गुप्ता, आयोजन सचिव डॉ. अनुज गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. त्रिभुवन सिंह, डॉ.कपिल कुलश्रेष्ठ, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. निकुंज अग्रवाल, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. सुरेश मौर्या, डॉ. शरद जैन समेत बड़ी संख्या में हड्डी रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे।