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कोरोना के खौफ को पीछे छोड़ होली के रंगों से संगमनगरी हुई लाल
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Leaving behind the fear of Corona, the colors of Holi are red
- फोटो : ALDCOMPACT
प्रयागराज। लॉकडाउन के वर्ष भर बाद कोरोना संक्रमण की वापसी के साथ पहली होली महामारी के डर के बावजूद रंगों की बौछार से सराबोर रही। आशंकाओं को दर किनार कर लोग होली खेलने निकले। पुराने शहर चौक, कटरा, मुट्ठीगंज से लेकर सिविल लाइंस तक होली के रंगों की खुमारी छाई रही। छतों, बारजों से पिचकारी तो चली ही, लोकनाथ में पाइप लगाकर भी रंग बरसाए गए। चेहरे पर रंग, मुखौटे और नकली बाल लगाए युवकों की टोलियां गलियों के बीच से निकल कर होली के रंगों के साथ हरे, पीले, गुलाबी और बैगनी अबीर-गुलालों से प्रेम भावना को और गाढ़ा करती रहीं।
संगमनगरी में होली की सुबह रंगों के साथ हुई। किसी ने वेणी माधव के दरबार से तो किसी ने त्रिवेणी संगम और बड़े हनुमान के दरबार में अबीर-गुलाल चढ़ाकर होली की शुरुआत की। कटरा में युवकों की टोलियां सुबह की निकल पड़ीं। अशोक नगर, गंगानगर में डीजे के धुन पर युवा खूब थिरके। होली के गीतों के अलावा फिल्मी धुनों पर होली की मस्ती से सराबोर टोलियां दिन भर झूमती और थिरकती रहीं। आनंद भवन, भरद्वाज आश्रम, बालसन चौराहे से लेकर लक्ष्मी टाकीज तक हर होली के रंग छा गए। मनमोहन पार्क के पास डीजे की धुन पर लोग थिरकते रहे। इसी तरह हर ओर होली गीतों की मस्ती छाई रही। होली का नजारा देखने के लिए लोग छतों पर भी खड़े रहे।
महिलाएं, बच्चे छतों से बाल्टी-डिब्बे में रंग भरकर उड़ेलते रहे तो पिचकारियां भी खूब चलती रहीं। पुराने शहर चौक के अलावा शहर के अन्य मोहल्लों में भी होली का रंग इसी तरह छाया रहा। तेलियरगंज, अल्लापुर, रामबाग,साउथ मलाका, रामबाग, कीडगंज, बैरहना, लूकरगंज, हिम्मतगंज, प्रीतमनगर, सुलेमसराय, कर्नलगंज,मम्फोर्डगंज और सिविल लाइंस में होलियारों की टोलियां उमंग में डूबी रहीं।
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कई जगह टूटी होलिका दहन की परंपरा, नहीं निकले लोग
प्रयागराज। होली पर महामारी का भी खौफ बना रहा। बढ़ते संक्रमण कुछ पॉश कॉलोनियों में इस तरह लोग सहम रहे कि होलिकाओं की न तो स्थापना की गई और ना ही दहन किया गया। रंग खेलने की तो बात ही अलग रही। एडीजी आवास से लेकर नेवादा तक दर्जन भर स्थानों पर इस बार होलिका की स्थापना नहीं की गई और परंपरा टूट गई। इस दौरान तमाम लोगों को होलिका दहन के लिए दूसरे मुहल्लों में जाना पड़ा। नेवादा के राजेश जायसवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण के डर से भीड़ से बचने के लिए इस बार वहां लोगों ने होलिकाएं नहीं स्थापित कीं। हालांकि कुछ स्थानों पर ऐसी रवायतों को मानने वालों के गांव चले जाने की वजह से भी होलिकाएं नहीं लगाई जा सकीं। इन इलाकों में होली खेलने के लिए भी लोग कम निकले।
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संगमनगरी में होली की सुबह रंगों के साथ हुई। किसी ने वेणी माधव के दरबार से तो किसी ने त्रिवेणी संगम और बड़े हनुमान के दरबार में अबीर-गुलाल चढ़ाकर होली की शुरुआत की। कटरा में युवकों की टोलियां सुबह की निकल पड़ीं। अशोक नगर, गंगानगर में डीजे के धुन पर युवा खूब थिरके। होली के गीतों के अलावा फिल्मी धुनों पर होली की मस्ती से सराबोर टोलियां दिन भर झूमती और थिरकती रहीं। आनंद भवन, भरद्वाज आश्रम, बालसन चौराहे से लेकर लक्ष्मी टाकीज तक हर होली के रंग छा गए। मनमोहन पार्क के पास डीजे की धुन पर लोग थिरकते रहे। इसी तरह हर ओर होली गीतों की मस्ती छाई रही। होली का नजारा देखने के लिए लोग छतों पर भी खड़े रहे।
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महिलाएं, बच्चे छतों से बाल्टी-डिब्बे में रंग भरकर उड़ेलते रहे तो पिचकारियां भी खूब चलती रहीं। पुराने शहर चौक के अलावा शहर के अन्य मोहल्लों में भी होली का रंग इसी तरह छाया रहा। तेलियरगंज, अल्लापुर, रामबाग,साउथ मलाका, रामबाग, कीडगंज, बैरहना, लूकरगंज, हिम्मतगंज, प्रीतमनगर, सुलेमसराय, कर्नलगंज,मम्फोर्डगंज और सिविल लाइंस में होलियारों की टोलियां उमंग में डूबी रहीं।
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कई जगह टूटी होलिका दहन की परंपरा, नहीं निकले लोग
प्रयागराज। होली पर महामारी का भी खौफ बना रहा। बढ़ते संक्रमण कुछ पॉश कॉलोनियों में इस तरह लोग सहम रहे कि होलिकाओं की न तो स्थापना की गई और ना ही दहन किया गया। रंग खेलने की तो बात ही अलग रही। एडीजी आवास से लेकर नेवादा तक दर्जन भर स्थानों पर इस बार होलिका की स्थापना नहीं की गई और परंपरा टूट गई। इस दौरान तमाम लोगों को होलिका दहन के लिए दूसरे मुहल्लों में जाना पड़ा। नेवादा के राजेश जायसवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण के डर से भीड़ से बचने के लिए इस बार वहां लोगों ने होलिकाएं नहीं स्थापित कीं। हालांकि कुछ स्थानों पर ऐसी रवायतों को मानने वालों के गांव चले जाने की वजह से भी होलिकाएं नहीं लगाई जा सकीं। इन इलाकों में होली खेलने के लिए भी लोग कम निकले।

Leaving behind the fear of Corona, the colors of Holi are red- फोटो : ALDCOMPACT