{"_id":"5d44874e8ebc3e6cce128f45","slug":"learn-in-contrasting-situations-from-rajarshi-allahabad-news-ald2511041193","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजर्षि से विषम परिस्थितियों में सीखें लक्ष्य भेदना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजर्षि से विषम परिस्थितियों में सीखें लक्ष्य भेदना
विज्ञापन
Learn in contrasting situations from Rajarshi
- फोटो : CITY DESK
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजर्षि से विषम परिस्थितियों में भी सीखें लक्ष्य भेदना
0 जयंती समारोह में बोले पश्चिम बंगाल के निवर्तमान राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी
प्रयागराज। भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती बृहस्पतिवार को उल्लासपूर्वक मनाई गई। अखिल भारतीय युवा खत्री समाज की ओर से हुए जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के निवर्तमान राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा, टंडन जी से विषम परिस्थितियों मे भी लक्ष्य भेदना सीखना होगा। अंग्रेजों की परतन्त्रता की जंजीर में जकड़े भारत को स्वतन्त्र कराने के लिए संग्राम छिड़ा हुआ था। ऐसे समय में उन्होंने महसूस किया कि जब तक देश अपनी मातृभाषा से नहीं जुड़ेगा, स्वतन्त्रता का कोई अर्थ नहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना करके देश की दिशा बदली। युवाओं को उनके जीवन से शिक्षा लेने की आवश्यकता है।
कल्याणी देवी स्थित लाजपत शिशु विहार में हुए कार्यक्रम में राजकुमार चोपड़ा, आनन्द जी टंडन ‘पप्पन जी’, डा.शशि टंडन, कृष्णा बहल, कुंवर जी टंडन, आलोक खरे, राम प्रसाद यादव, मोहनजी टंडन, अनिल टंडन, ऋषभ टंडन, बृजेश सिडाना, प्रकाश टंडन, विनीत सेठ आदि मौजूद थे।
0 इनसेट
पुरस्कृत किए गए विजेता
राजर्षि टंडन के जीवन पर हुई अन्तर्विद्यालय प्रतियोगिता के ग्रुप ए में कार्तिकेय अग्रवाल, गौरव सिंह, प्रियांशी अग्रवाल, ग्रुप बी में भावा टंडन,
अभय यादव, विशेष अग्रवाल, चित्रकला में काव्यांजलि, राजश्री टंडन, आराध्य को क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार मिला। बेस्ट राइटिंग में मानस साहू, विवेक गुप्ता,नेहा यादव ने पुरस्कार जीता। मुख्य अतिथि ने उन्हें प्रमाणपत्र और उपहार देकर पुरस्कृत किया।
विज्ञापन
00
टंडन जी का योगदान अतुलनीय
0 खत्री सभा की ओर से निकाली गई रैली
प्रयागराज। खत्री सभा की ओर से राजर्षि टंडन की जयंती धूमधाम से मनाई गई। अतरसुइया स्थित टंडन जी के आवास पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि के बाद शोभायात्रा निकाली गई। फूलों से सजे रथ पर राजर्षि टंडन का चित्र रखा गया था। इसमें कई विद्यालयों के विद्यार्थी बैंड बाजे व स्कूल के बैनर के साथ शामिल हुए। इस दौरान राजर्षि टंडन अमर रहें के नारे भी लगाए गए। शोभायात्रा कल्याणी देवी से होते हुए रमादेवी इंटर कॉलेज पहुंचकर पूरी हुई। इसमें सात स्कूलों के छह सौ से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए।
मुख्य अतिथि महापौर अभिलाषा गुप्ता ने टंडन जी के योगदान की चर्चा की । महामंत्री बृजेश मेहरोत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन एवं सतीश टंडन ने संचालन किया। कार्यक्रम में संयोजक दीपक मेहरोत्रा सहित कुंवर जी टंडन, राकेश चढ्ढा, रवि मेहरोत्रा, राजीव टंडन, डा. प्रमोद टंडन, अनिल टंडन, मोहनजी टंडन, कविता मेहरोत्रा, पूनम मेहरोत्रा, पूजा कक्कड़ आदि मौजूद थीं।
000
साहित्य सम्मेलन ही नहीं हिन्दी के भी प्राण थे राजर्षि
प्रयागराज। हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती पर हुए समारोह में बतौर अध्यक्ष डॉ.हरिनारायण दुबे ने कहा कि हिन्दी को आगे बढ़ाने और इसे राजभाषा के रूप में स्थापित करने में उनका योगदान अतुलनीय है। वह साहित्य सम्मेलन ही नहीं हिन्दी के भी प्राण थे।
सम्मेलन के प्रधानमंत्री विभूति मिश्र ने कहा, हिन्दी के विकास केसाथ ही देश की समस्याओं के समाधान में टंडन जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ.रामकिशोर शर्मा ने कहा, हिन्दी को संपर्क भाषा के रूप ेमं विकसित करने में टंडन जी ने अथक प्रयास किया। कार्यक्रम में श्यामकृष्ण पांडेय, रमा निवास पांडेय, भगवती प्रसाद पांडेय, आनंद कुमार आदि मौजूद थे। संचालन शेषमणि पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन राजकुमार शर्मा ने किया।
विज्ञापन
0 जयंती समारोह में बोले पश्चिम बंगाल के निवर्तमान राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी
प्रयागराज। भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती बृहस्पतिवार को उल्लासपूर्वक मनाई गई। अखिल भारतीय युवा खत्री समाज की ओर से हुए जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के निवर्तमान राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा, टंडन जी से विषम परिस्थितियों मे भी लक्ष्य भेदना सीखना होगा। अंग्रेजों की परतन्त्रता की जंजीर में जकड़े भारत को स्वतन्त्र कराने के लिए संग्राम छिड़ा हुआ था। ऐसे समय में उन्होंने महसूस किया कि जब तक देश अपनी मातृभाषा से नहीं जुड़ेगा, स्वतन्त्रता का कोई अर्थ नहीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना करके देश की दिशा बदली। युवाओं को उनके जीवन से शिक्षा लेने की आवश्यकता है।
कल्याणी देवी स्थित लाजपत शिशु विहार में हुए कार्यक्रम में राजकुमार चोपड़ा, आनन्द जी टंडन ‘पप्पन जी’, डा.शशि टंडन, कृष्णा बहल, कुंवर जी टंडन, आलोक खरे, राम प्रसाद यादव, मोहनजी टंडन, अनिल टंडन, ऋषभ टंडन, बृजेश सिडाना, प्रकाश टंडन, विनीत सेठ आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
0 इनसेट
पुरस्कृत किए गए विजेता
राजर्षि टंडन के जीवन पर हुई अन्तर्विद्यालय प्रतियोगिता के ग्रुप ए में कार्तिकेय अग्रवाल, गौरव सिंह, प्रियांशी अग्रवाल, ग्रुप बी में भावा टंडन,
अभय यादव, विशेष अग्रवाल, चित्रकला में काव्यांजलि, राजश्री टंडन, आराध्य को क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार मिला। बेस्ट राइटिंग में मानस साहू, विवेक गुप्ता,नेहा यादव ने पुरस्कार जीता। मुख्य अतिथि ने उन्हें प्रमाणपत्र और उपहार देकर पुरस्कृत किया।
विज्ञापन
00
टंडन जी का योगदान अतुलनीय
0 खत्री सभा की ओर से निकाली गई रैली
प्रयागराज। खत्री सभा की ओर से राजर्षि टंडन की जयंती धूमधाम से मनाई गई। अतरसुइया स्थित टंडन जी के आवास पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि के बाद शोभायात्रा निकाली गई। फूलों से सजे रथ पर राजर्षि टंडन का चित्र रखा गया था। इसमें कई विद्यालयों के विद्यार्थी बैंड बाजे व स्कूल के बैनर के साथ शामिल हुए। इस दौरान राजर्षि टंडन अमर रहें के नारे भी लगाए गए। शोभायात्रा कल्याणी देवी से होते हुए रमादेवी इंटर कॉलेज पहुंचकर पूरी हुई। इसमें सात स्कूलों के छह सौ से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए।
मुख्य अतिथि महापौर अभिलाषा गुप्ता ने टंडन जी के योगदान की चर्चा की । महामंत्री बृजेश मेहरोत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन एवं सतीश टंडन ने संचालन किया। कार्यक्रम में संयोजक दीपक मेहरोत्रा सहित कुंवर जी टंडन, राकेश चढ्ढा, रवि मेहरोत्रा, राजीव टंडन, डा. प्रमोद टंडन, अनिल टंडन, मोहनजी टंडन, कविता मेहरोत्रा, पूनम मेहरोत्रा, पूजा कक्कड़ आदि मौजूद थीं।
000
साहित्य सम्मेलन ही नहीं हिन्दी के भी प्राण थे राजर्षि
प्रयागराज। हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती पर हुए समारोह में बतौर अध्यक्ष डॉ.हरिनारायण दुबे ने कहा कि हिन्दी को आगे बढ़ाने और इसे राजभाषा के रूप में स्थापित करने में उनका योगदान अतुलनीय है। वह साहित्य सम्मेलन ही नहीं हिन्दी के भी प्राण थे।
सम्मेलन के प्रधानमंत्री विभूति मिश्र ने कहा, हिन्दी के विकास केसाथ ही देश की समस्याओं के समाधान में टंडन जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ.रामकिशोर शर्मा ने कहा, हिन्दी को संपर्क भाषा के रूप ेमं विकसित करने में टंडन जी ने अथक प्रयास किया। कार्यक्रम में श्यामकृष्ण पांडेय, रमा निवास पांडेय, भगवती प्रसाद पांडेय, आनंद कुमार आदि मौजूद थे। संचालन शेषमणि पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन राजकुमार शर्मा ने किया।