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एलआर की नियुक्ति पर झुकी सरकार

Sat, 07 May 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 07 May 2016 02:07 AM IST
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Leaning government on the appointment of LR
मुख्य स‌च‌िव हाईकोर्ट में तलब - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
हाईकोर्ट के सख्त तेवर को देखते हुए अंतत: प्रदेश सरकार को प्रमुख सचिव न्याय/एलआर की नियुक्ति में झुकना पड़ा। महीनों से इस पद पर नियुक्ति को लेकर टाल मटोल कर रही सरकार ने शुक्रवार को गोरखपुर के जिला जज रंगनाथ पांडेय को इस पद पर नियुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने श्री पांडेय के नाम की ही संस्तुति की थी, मगर सरकार ने कोर्ट का प्रस्ताव यह कह कर मानने से इंकार कर दिया था कि हाईकोर्ट की ओर से एक ही नाम का प्रस्ताव आया है। नियुक्ति के लिए उनको कुछ और नामों का विकल्प चाहिए। हाईकोर्ट को सरकार की यह दलील मंजूर नहीं थी।
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पिछली सुनवाई पर सात जजों की वृहद पीठ ने प्रमुख सचिव न्याय के पद पर नियुक्ति को लेकर की जा रही हीलाहवाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। मुख्य सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे में गलत जानकारी देने से भी वृहदपीठ बेहद खफा थी। पीठ ने यह साफ कर दिया था कि यदि उनकी संस्तुति पर शीघ्र नियुक्ति नहीं होती है तो नतीजा गंभीर हो सकता है।
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शुक्रवार को सुनवाई प्रारंभ हुई तो प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए पूर्व महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने सुप्रीमकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार को पैनल मांगने का हक है। उन्होंने कहा कि इस मामले को नजीर नहीं बनाया जाना चाहिए और भविष्य में अदालत तथा सरकार के बीच ऐसी स्थिति नहीं उत्पन्न होनी चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को मानने से इंकार करते हुए कहा कि सरकार चाहे तो किसी आईएएस अधिकारी को इस पद पर नियुक्त कर ले, मगर न्यायिक अधिकारी को नियुक्त करना है तो चीफ जस्टिस की संस्तुति ही माननी होगी।
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गलत हलफनामे के लिए मुख्य सचिव आलोक रंजन द्वारा कोर्ट मेें लिखित हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी गई, जिसे वृहद पीठ ने स्वीकार कर लिया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले को अब और नहीं बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए प्रकरण यहीं समाप्त किया जा रहा है।

हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा को लेकर कोताही तथा वाहनों की चोरी होने को वृहदपीठ ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सीओ हाईकोर्ट सुरक्षा राजबीर सिंह को अपने सामने तलब कर कड़ी फटकार लगाई है। उनसे पूछा गया कि कोर्ट परिसर से कितने वाहन चोरी हुए हैं और क्या कार्रवाई की गई है। सीओ के पास इसका माकूल जवाब नहीं था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस किसी की भी जांच नहीं कर रही है।

यहां वकील की ड्रेस पहनकर कोई भी आ सकता है। सीएससी रमेश उपाध्याय ने बताया कि सुरक्षा के डीएफएमडी, एचएचएमडी लगाए गए हैं। वाहनों की चेकिंग के लिए स्कैनर लगा दिए गए हैं। पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि करोड़ों खर्च कर लगाए गए उपकरणों का प्रयोग नहीं हो रहा है। सीओ ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे से चोर का पता लगाने में सफलता नहीं मिली। कैमरे की क्षमता बढ़ाई जा रही है। कोर्ट ने डीएम और एसएसपी को पार्किंग के लिए जमीन तलाश करने का निर्देश दिया है।

वाराणसी कचहरी में बम पाए जाने की घटना को लेकर अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस घटना का खुलासा कर पाने में नाकाम है। अपर सचिव विधि मो. शाहिद ने बताया कि 34 जिलों की सुरक्षा के लिए बजट मिल चुका है। 75 करोड़ रुपये खर्च करके सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं। वाराणसी में सुरक्षा पर पांच करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके लिए पूरक बजट से व्यवस्था की जाएगी।


अदालतों में बिजली का अलग फीडर देने पर काम चल रहा है और सितंबर तक सभी जिला अदालतों को अलग फीडर से जोड़ दिया जाएगा। सरकार ने मार्निंग कोर्टों को जून से 24 घंटे बिजली देने का आश्वासन दिया है। 35 जिला अदालतों और 27 जेलों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से जोड़ दिया गया है। 111 परिवार न्यायालयों के गठन को सरकार की मंजूरी मिल गई है, हाईकोर्ट इस सहमत नहीं है। मुकदमों की संख्या के आधार पर तय होगा कि कितनी अदालतें बनेंगी।
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