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Prayagraj News: जघन्य मामलों में नामजद वकील नहीं कर सकेंगे वकालत, ट्रायल भी चलेगा 100 किलोमीटर दूर

Sat, 18 Jul 2026 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Sat, 18 Jul 2026 11:13 PM IST
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Lawyers named in heinous cases will be barred from representing clients; trials will also be held 100 kilometers away.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सात साल से ज्यादा की सजा वाले जघन्य मामलों में नामजद वकील वकालत नहीं कर सकेंगे। बेगुनाह साबित होने से पहले वे किसी कोर्ट में न पेश होंगे न ही बहस करेंगे। उनका ट्रायल भी उनके गृह जनपद से सौ किलोमीटर दूर दूसरे जिले में होगा।
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प्रदेश के दागी वकीलों पर सख्त टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कहा कि जब सत्ता और अधिकार रखने वाले लोग अन्याय के सामने मूकदर्शक रहते हैं तो उसका दुष्परिणाम केवल अपराधी तक सीमित नहीं रहता बल्कि निर्दोष लोगों और आने वाली पीढ़ियों को भी कीमत चुकानी पड़ती है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे तत्वों की मौजूदगी न केवल न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर कर रही है बल्कि यह एक गंभीर संस्थागत और नैतिक संकट भी उत्पन्न कर रही है।
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इटावा के एक वकील की याचिका पर 61 पेज के अपने फैसले में कोर्ट ने यूपी बार काउंसिल के सचिव को फर्जी डिग्रीधारी 105 वकीलों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर कराने व उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश दिया है। साथ ही सुझाव दिया कि अधिवक्ता पंजीकरण के लिए पुलिस वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जाए। बार काउंसिल व विश्वविद्यालयों के बीच डिजिटल लिंक स्थापित हो ताकि डिग्रियों का रियल-टाइम सत्यापन संभव हो सके। कोर्ट ने दिए गए निर्देशों की अनुपालन आख्या तलब करते हुए मामले को 20 अगस्त को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
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प्रदेश भर में 4,157 दागी वकीलों पर दर्ज है 5,056 मामले
कोर्ट ने पाया कि बार काउंसिल की ओर से पेश रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश भर में 4,157 अधिवक्ता दागी है। कोर्ट ने कहा कि 105 की फर्जीवाड़े की रिपोर्ट ने न्यायिक जगत को हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पूरे उत्तर प्रदेश में 4,157 अधिवक्ता आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, जिनमें कुल 5,056 मामले दर्ज हैं। इनमें से 418 अधिवक्ता ऐसे हैं, जिन पर तीन या उससे अधिक मामले चल रहे हैं। ने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि 28 अधिवक्ता तो ऐसे हैं, जिनके खिलाफ 11 या उससे अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा, एक सत्यापन प्रक्रिया में 105 ऐसे अधिवक्ताओं की पहचान हुई है जिन्होंने फर्जी शैक्षणिक डिग्री (एलएलबी, स्नातक आदि) के आधार पर पंजीकरण हासिल कर लिया है। हालांकि, कोर्ट ने इन आंकड़ों को सतही करार दिया। कहा कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
कोर्ट ने यूपी बार काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कहा कि बार काउंसिल में पंजीकरण की अपनाई जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया काफी कमजोर है। वह केवल स्व-घोषणा और अधिवक्ता साथियों के प्रमाण पर निर्भर है। नामांकन के समय न तो चरित्र सत्यापन होता है और न ही डिग्री का विश्वविद्यालयों से स्वतंत्र सत्यापन किया जाता है। कोर्ट ने यूपी बार काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कहा कि बार काउंसिल में पंजीकरण की अपनाई जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया काफी कमजोर है। वह केवल स्व-घोषणा और अधिवक्ता साथियों के प्रमाण पर निर्भर है। नामांकन के समय न तो चरित्र सत्यापन होता है और न ही डिग्री का विश्वविद्यालयों से स्वतंत्र सत्यापन किया जाता है।
महानिबंधक को अधिसूचना जारी करने का आदेश
कोर्ट ने महानिबंधक को 30 दिन में वकीलों के लंबित मुकदमे पड़ोसी जिले में स्थानांतरित करने की योजना अधिसूचना के जरिये जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अगले पांच वर्षों के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई है। इन मामलों की सुनवाई के लिए जिला जज के अधीन विशेष अदालतें होंगी। इन मामलों की निगरानी संबंधित जिला जज करेंगे।

टिप्पणी
वकील अदालतों के अधिकारी होते हैं। हाल के वर्षों में देखा गया है कि कुछ वकील आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। वे अपने जिले में साथी वकीलों के समूहों के साथ निष्पक्ष ट्रायल में बाधा उत्पन्न करते है। इलाहाबाद हाईकोर्ट
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