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अपराजिता : और प्रभावी बने कानून, खत्म हो दया याचिका
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Laws become more effective, mercy petition ends
- फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। कानून के लचीलेपन को दूर किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी ही वजहों से निर्भया के दोषियों को फांसी मिलने में देरी हो रही है। कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ ही दया याचिका जैसे प्रावधानों को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए। बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए सामाजिक सोच में बदलाव सबसे अहम है। वे शिक्षित होने के साथ ही स्वावलंबी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। राजनीति से लेकर कार्यक्षेत्र तक में महिलाओं की भागीदारी 33 प्रतिशत तक सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में बृहस्पतिवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत आयोजित ‘स्त्री सुरक्षा: समाज कितना संवेदनशील’ विषयक भाषण प्रतियोगिता में ज्यादातर प्रतिभागियों ने कहा कि महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच रखें और उनके सहअस्तित्व को सम्मान दें। पितृसत्तात्मक सोच से बाहर निकलें। महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव तथा असमानता खत्म हो। साथ ही सेक्स एजुकेशन को पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए इसके बारे में भी विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जानी चाहिए।
कानून की अपेक्षा समाज की मानसिकता में बदलाव अधिक जरूरी है। इससे महिलाओं के प्रति बढ़ रहे आपराधिक मामलों में कमी आएगी। जरूरी यह भी कि सामाजिक, पारिवारिक ढांचे को मजबूती मिले। यदि बेटों को परिवार से ही बहन, बेटियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की सीख दी जाएगी तो यह बदलाव समाज में भी दिखेगा। यह भी कि सामूहिक जिम्मेदारी तय करने के बजाय यदि हम ‘एक बटा सवा सौ करोड़ भारतीय’ के तौर पर अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाते हुए स्वयं को सुधार लें तो पूरा देश स्वयं सुधर जाएगा।
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प्रतियोगिता के निर्णायकों डॉ.रचना सिंह और डॉ.मनोज दुबे ने ‘अमर उजाला अपराजिता’ की पहल का स्वागत करते हुए प्रतिभागियों को स्त्री सम्मान और स्वाभिमान के प्रति और सजग होने की सीख दी। डॉ.हर्षमणि सिंह ने कार्यक्रम का बखूबी संचालन किया। सभी विजेताओं को ‘अमर उजाला’ की ओर से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने मौजूदगी दर्ज कराई।
जो प्रतियोगिता के विजेता
आयुष गुप्ता/प्रथम स्थान
देवेंद्र शुक्ला तथा अभय दुबे/द्वितीय स्थान
प्रियंका विश्वकर्मा तथा खुशनुमा खान/तृतीय स्थान
सचिन तथा बृहस्पतिमणि त्रिपाठी/सांत्वना पुरस्कार
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ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में बृहस्पतिवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत आयोजित ‘स्त्री सुरक्षा: समाज कितना संवेदनशील’ विषयक भाषण प्रतियोगिता में ज्यादातर प्रतिभागियों ने कहा कि महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच रखें और उनके सहअस्तित्व को सम्मान दें। पितृसत्तात्मक सोच से बाहर निकलें। महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव तथा असमानता खत्म हो। साथ ही सेक्स एजुकेशन को पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए इसके बारे में भी विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जानी चाहिए।
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कानून की अपेक्षा समाज की मानसिकता में बदलाव अधिक जरूरी है। इससे महिलाओं के प्रति बढ़ रहे आपराधिक मामलों में कमी आएगी। जरूरी यह भी कि सामाजिक, पारिवारिक ढांचे को मजबूती मिले। यदि बेटों को परिवार से ही बहन, बेटियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की सीख दी जाएगी तो यह बदलाव समाज में भी दिखेगा। यह भी कि सामूहिक जिम्मेदारी तय करने के बजाय यदि हम ‘एक बटा सवा सौ करोड़ भारतीय’ के तौर पर अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाते हुए स्वयं को सुधार लें तो पूरा देश स्वयं सुधर जाएगा।
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प्रतियोगिता के निर्णायकों डॉ.रचना सिंह और डॉ.मनोज दुबे ने ‘अमर उजाला अपराजिता’ की पहल का स्वागत करते हुए प्रतिभागियों को स्त्री सम्मान और स्वाभिमान के प्रति और सजग होने की सीख दी। डॉ.हर्षमणि सिंह ने कार्यक्रम का बखूबी संचालन किया। सभी विजेताओं को ‘अमर उजाला’ की ओर से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने मौजूदगी दर्ज कराई।
जो प्रतियोगिता के विजेता
आयुष गुप्ता/प्रथम स्थान
देवेंद्र शुक्ला तथा अभय दुबे/द्वितीय स्थान
प्रियंका विश्वकर्मा तथा खुशनुमा खान/तृतीय स्थान
सचिन तथा बृहस्पतिमणि त्रिपाठी/सांत्वना पुरस्कार

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