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High Court: बिना रेंट एग्रीमेंट के भी मकान मालिक कर सकेंगे किराएदार के खिलाफ बेदखली का मुकदमा

Thu, 01 Jan 2026 07:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Jan 2026 07:31 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किराएदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित किया है।

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Landlords can file eviction cases against tenants even without a rent agreement
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किराएदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि मकान मालिक और किराएदार के बीच कोई रेंट एग्रीमेंट नहीं हुआ है या इसकी जानकारी रेंट अथॉरिटी को नहीं दी गई है। तब भी मकान मालिक किराएदार को बेदखल करने के लिए आवेदन कर सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने केनरा बैंक शाखा कार्यालय अलीगढ़, बरेली की मेसर्स टिफको एंड एसोसिएट्स व अन्य की याचिका पर दिया है।

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संबंधित मामले में प्रतिवादी मकान मालिकों ने याचियों के खिलाफ किराया प्राधिकरण (रेंट ट्रिब्यूनल) व लघुवाद न्यायालय के समक्ष बेदखली के लिए आवेदन दायर किया था। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट में वाद दायर किया। उनका कहना था कि उनके व मकान मालिक के बीच कोई भी रेंड एग्रीमेंट नहीं हुआ है। ऐसे में बिना रेंड एग्रीमेंट के ट्रिब्यूनल व लघुवाद न्यायालय को मामले की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।

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केनरा बैंक के मामले में मकान मालिक की ओर से अधिवक्ता विपुल राज गौतम ने हाईकोर्ट के अमित गुप्ता बनाम गुलाब चंद्र कनेडिया के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि रेंट ट्रिब्यूनल के समक्ष रेट एग्रीमेंट प्रस्तुत नहीं किया है तब भी लघुवाद न्यायालय में वाद दायर किया जा सकता है। अन्य कई दलीलें उन्होंने दी। एकल पीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि हालांकि कानून में लिखित समझौते का प्रावधान है, लेकिन इसके अभाव में मकान मालिक को उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

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यूपी किराएदारी अधिनियम के अनुसार यदि रेंट एग्रीमेंट को ट्रिब्यूनल के समक्ष जमा नहीं किया गया है, तो मकान मालिक केवल इसी आधार पर भी बेदखली के लिए आवेदन करने का पात्र है। रेंट ट्रिब्यूनल का अधिकार क्षेत्र केवल उन मामलों तक सीमित नहीं है जहां लिखित समझौता जमा किया गया हो। यह उन किराए दारियों पर भी लागू होता है जहां कोई लिखित अनुबंध नहीं है। अदालत ने विभिन्न याचिकाओं को निस्तारित करते हुए संबंधित रेंट ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वे इन मामलों को गुण-दोष के आधार पर तय करें।

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