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Prayagraj News: सरस्वती हाईटेक सिटी में दस साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का टोटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:17 AM IST
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Lack of basic amenities in Saraswati Hi-Tech City even after ten years.
सरस्वती हाईटेक सिटी रिटेनिंग वॉल न बनाने के कारण बारिश में नाले के नीचे की मिट्टी गिरने से नाल - फोटो : credit
वर्ष 2016 में विकसित सरस्वती हाईटेक सिटी दस साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। आवंटियों का आरोप है कि ए, बी और सी ब्लॉक में केवल पांच फीसदी सुविधाएं ही विकसित हो पाई हैं।
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बिजली, पानी, सड़क, सुरक्षा और जल निकासी जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी न होने से परिवारों में आक्रोश बढ़ रहा है। सी ब्लॉक के प्रवीण सिंह ने बताया कि उनके प्लॉट का बिजली बॉक्स काम नहीं करता। उन्हें दूर से कनेक्शन खींचकर घर तक बिजली पहुंचानी पड़ रही है।
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पानी की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। उत्तम मिश्रा के अनुसार, पानी की पाइप लाइन कागजों तक सीमित है। नियमित जलापूर्ति न होने से परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अनुपम सिंह, प्रवीण सिंह, अशोक सिंह और अजय राज जैसे आवंटियों का कहना है कि टाउनशिप में अस्पताल, बाजार, मॉल, थाना और फायर ब्रिगेड जैसी सुविधाएं नहीं हैं।
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अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें बाहर निर्भर रहना पड़ता है। बुनियादी ढांचे के अभाव में घर का निर्माण कराना भी चुनौती है। टाउनशिप में हरियाली और मनोरंजन के लिए विकसित पार्क की स्थिति खराब है। निवासियों के अनुसार, पार्क में जलभराव के कारण वह उपयोग के लायक नहीं रहा।
जुर्माना वसूली पर नाराजगी और संघर्ष का निर्णय
शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त प्रभाकर त्रिपाठी समेत कई आवंटियों ने जुर्माने और ब्याज का विरोध किया है। उनका सवाल है कि जब बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं हुईं, तो देरी की पेनल्टी किस आधार पर ली जा रही है। लगातार समस्याओं से परेशान आवंटियों ने अब एक समिति पंजीकृत कराई है। यह समिति परियोजना में कथित अनियमितताओं, विकास कार्यों में देरी और सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठाएगी।



आवंटन के बाद लोग मकान नहीं बना रहे हैं। ऐसे लोगों को एक वर्ष का समय दिया गया था। लेकिन निर्माण नहीं कराएं। शासनादेश के तहत ही नोटिस दी गई हैं। जहां तक बिजली का सवाल हैं , लोग कनेक्शन नहीं ले रहे हैं। पार्क में बाढ़ के कारण पानी भर गया हैं। जो भी समस्याएं है उसे जल्द दूर किया जाएगा। -संतोष कुमार, जीएम यूपीसीडा
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